कर्नाटक

राहुल गांधी पर भाजपा नेता आर अशोक का तीखा तंज

Ratna Netam
7 Oct 2026 5:34 PM IST
राहुल गांधी पर भाजपा नेता आर अशोक का तीखा तंज
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चित्रदुर्ग। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और चुनाव आयोग के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के दिल्ली में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड पर चढ़ने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता इस समय “राहु काल” से गुजर रहे हैं और इसी वजह से इस तरह के प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल गांधी 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड पर चढ़े थे।
चित्रदुर्ग में भाजपा के सेवा संकल्प कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए आर. अशोक ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख को सड़क पर प्रदर्शन करके नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान और कानून में तय प्रक्रियाएं हैं और उन्हें पूरा करना होता है।
अशोक ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नियम और प्रक्रियाएं हैं। उन्हें सड़क पर खड़े होकर नहीं हटाया जा सकता।” उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में आते हैं तो उसे चुनाव आयोग सही नजर आता है, लेकिन हार की स्थिति में वही पार्टी आयोग पर सवाल उठाती है। यह भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है, जिसका कांग्रेस और विपक्ष लगातार विरोध करते रहे हैं।
राहुल गांधी पर तंज कसते हुए अशोक ने कहा कि वह “राहु काल” से गुजर रहे हैं और उनका विरोध प्रदर्शन इसी का नतीजा है। कन्नड़ मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, अशोक ने राहुल गांधी के आंदोलन को बेअसर बताते हुए कहा कि केवल सड़क पर धरना और नारेबाजी करने से संवैधानिक संस्थाओं में बदलाव नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद से जुड़ी प्रक्रिया होती है और इसके लिए निर्धारित संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना पड़ता है। अशोक का कहना था कि सड़क पर बैठकर नारे लगाने से कोई संवैधानिक पद खाली नहीं कराया जा सकता।
दिल्ली में INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य विपक्षी नेता चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोका, जिसके बाद राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ गए और तिरंगा लहराया। बाद में राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया और फिर रिहा कर दिया गया।
आर. अशोक ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग के साथ-साथ अन्य संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग, सीबीआई, ईडी और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाती है। उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन का पक्ष इससे अलग है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से संबंधित कुछ फैसलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है। चुनाव आयोग ने विपक्ष के पक्षपात संबंधी आरोपों को खारिज किया है।
चित्रदुर्ग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आर. अशोक ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने राज्य सरकार के कामकाज को लेकर कई आरोप लगाए और कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को लेकर भी बयान दिया तथा दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता में आएगा। यह उनका राजनीतिक दावा है।
अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार के एक हालिया बयान पर भी आपत्ति जताई और उनसे माफी मांगने की मांग की। हालांकि, शिवकुमार ने स्पष्ट किया है कि उनकी टिप्पणी धार्मिक गुरुओं को लेकर नहीं, बल्कि मतदाताओं के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि वह सभी धर्मगुरुओं और संतों का सम्मान करते हैं।
इस बीच राहुल गांधी के बैरिकेड पर चढ़ने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। विपक्ष इसे चुनावी मुद्दों पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक प्रतिरोध के रूप में पेश कर रहा है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विवादों का समाधान निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत ही होना चाहिए।
आर. अशोक के ताजा बयान से राहुल गांधी और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक टकराव में एक और नया बयान जुड़ गया है। कांग्रेस जहां अपने विरोध प्रदर्शन को चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र से जोड़ रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय और कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
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