कर्नाटक
अडानी मुद्दे पर बीजेपी ने घेरा कांग्रेस को डेके शिवकुमार की बैठक में उठाया सवाल
Ratna Netam
23 Aug 2026 9:24 PM IST

x
बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उद्योगपति गौतम अडानी की मुलाकात को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बैठक को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे “डबल स्टैंडर्ड” बताया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस एक तरफ अडानी समूह को लेकर लगातार सवाल उठाती रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस शासित राज्यों में उसी समूह के साथ बैठकें और कारोबारी संबंध बनाए जा रहे हैं।
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में दोहरा रवैया दिखाई देता है। पार्टी का कहना है कि जब विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस अडानी समूह पर आरोप लगाती है, तो उसे उद्योगपति के साथ किसी भी तरह का संबंध गलत नजर आता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही कांग्रेस सरकारें निवेश और विकास परियोजनाओं के लिए अडानी समूह से बातचीत करती हैं।
दरअसल, डीके शिवकुमार और गौतम अडानी की मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बैठक को लेकर कांग्रेस की ओर से इसे राज्य के विकास, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी इसे कांग्रेस के पुराने बयानों से जोड़ते हुए सवाल उठा रही है।
बीजेपी ने उठाए सवाल
बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस नेता केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अडानी समूह को लेकर आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन जब बात राज्यों में निवेश और उद्योगों की आती है तो कांग्रेस सरकारें अडानी समूह सहित बड़े उद्योगपतियों से मुलाकात करती हैं।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर किसी उद्योगपति के साथ काम करना गलत है तो कांग्रेस सरकारों को भी इससे दूरी बनानी चाहिए, लेकिन अगर विकास के लिए निवेश जरूरी है तो फिर राष्ट्रीय स्तर पर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी कांग्रेस को जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस की ओर से आमतौर पर यह कहा जाता रहा है कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का काम प्रदेश में निवेश लाना और रोजगार के अवसर पैदा करना होता है। उद्योगपतियों और कंपनियों के साथ बातचीत राज्य के विकास के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकारें किसी व्यक्ति विशेष के आधार पर नहीं बल्कि परियोजनाओं और जनहित को ध्यान में रखकर फैसले लेती हैं। निवेश से राज्य में रोजगार, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
अडानी समूह और राज्यों में निवेश
देश के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अडानी समूह कई राज्यों में अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश करता रहा है। ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में समूह की परियोजनाएं हैं। कई राज्य सरकारें औद्योगिक विकास के लिए बड़े निवेशकों से संपर्क करती हैं।
राजनीतिक दल अक्सर उद्योगपतियों के साथ होने वाली बैठकों को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं। सत्ता पक्ष इसे विकास और निवेश से जोड़ता है, जबकि विपक्ष कई बार इसे नीतिगत सवालों और पारदर्शिता से जोड़कर उठाता है।
सियासी बहस हुई तेज
डीके शिवकुमार और गौतम अडानी की मुलाकात ने एक बार फिर उद्योग और राजनीति के रिश्ते पर बहस शुरू कर दी है। बीजेपी जहां इसे कांग्रेस की दोहरी नीति बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राज्य के विकास और निवेश आकर्षित करने की प्रक्रिया बता रही है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और गरमा सकता है, क्योंकि दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विकास परियोजनाओं, निवेश और उद्योगों से जुड़े फैसले अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
TagsAdaniissuesBJPCongressअडानीमुद्देबीजेपीकांग्रेसजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





