
बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर राजनीति तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर सूखे से निपटने में देरी का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि राज्य के सभी प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए 175 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए। अशोक का कहना है कि सरकार ने अभी तक केवल 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है, जो पर्याप्त नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने सूखे से परेशान किसानों को राहत देने के लिए कृषि ऋण माफी समेत कई मांगें उठाई हैं।
सरकार पर लगाए लापरवाही के आरोप
आर. अशोक ने बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य सरकार सूखे की गंभीर स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते कदम नहीं उठाए जाने के कारण किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अशोक ने कहा कि सरकार को जमीनी स्थिति को समझते हुए जल्द फैसले लेने चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।
175 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग
बीजेपी नेता ने कहा कि राज्य में सूखे का असर कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ऐसे में केवल 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य के 175 तालुकों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों और ग्रामीणों को सरकारी सहायता मिल सके।
उनका कहना है कि सूखे की स्थिति का सही आकलन कर राहत उपायों का विस्तार किया जाना चाहिए।
किसानों के लिए ऋण माफी की मांग
आर. अशोक ने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए बड़ी राहत की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है और उनकी फसलें प्रभावित हुई हैं। ऐसे में सरकार को किसानों के कृषि ऋण माफ करने चाहिए।
उन्होंने मांग की कि किसानों के लिए 1 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ किए जाएं, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
हर तालुक को 50 करोड़ रुपये देने की मांग
विपक्ष के नेता ने सरकार से पेयजल और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर भी कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक तालुक को कम से कम 50 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी की समस्या दूर की जा सके।
इसके अलावा पशुओं के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग दोहराई
आर. अशोक ने इस दौरान मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को भी दोहराया।
उन्होंने कहा कि सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और जिन मामलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनमें जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
बीजेपी पहले भी मंत्री को लेकर सरकार पर निशाना साधती रही है।
किसानों की स्थिति पर चिंता
बीजेपी नेता ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में किसान पानी की कमी और फसल नुकसान से परेशान हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए केवल घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
उनका कहना है कि सरकार को राहत राशि, पानी की व्यवस्था और कृषि सहायता जैसे मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
सरकार की योजनाओं पर उठाए सवाल
अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि सूखे जैसी गंभीर स्थिति में प्रशासनिक तेजी और प्रभावी योजना की जरूरत होती है, लेकिन सरकार की कार्रवाई धीमी दिखाई दे रही है।
उन्होंने मांग की कि सरकार प्रभावित इलाकों का दोबारा सर्वे कराकर वास्तविक स्थिति के आधार पर राहत कदम उठाए।
राजनीतिक घमासान बढ़ने के संकेत
सूखे के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
जहां विपक्ष सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार की ओर से सूखे की स्थिति और राहत कार्यों को लेकर अपने कदमों का बचाव किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर बहस और तेज होने की संभावना है।





