
बेंगलुरु : कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बहुचर्चित बिटकॉइन घोटाले की जांच को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) की मंजूरी देना राज्य सरकार का अधिकार है और यह निर्णय केवल पर्याप्त कानूनी आधार तथा ठोस कारणों के आधार पर ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मामले में बिना पर्याप्त साक्ष्यों के अभियोजन की अनुमति नहीं देगी और कानून के अनुरूप ही निर्णय लिया जाएगा।
प्रियांक खड़गे का यह बयान उस समय आया है जब बिटकॉइन घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी चार्जशीट से चार पुलिस अधिकारियों के नाम हटा दिए हैं। बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के कारण जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया।
सरकार कानून के दायरे में करेगी फैसला
मीडिया से बातचीत में गृह मंत्री ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभियोजन की मंजूरी के लिए उचित और वैध कारण प्रस्तुत किए जाते हैं, तो सरकार कानून के अनुसार उस पर विचार करेगी।
उन्होंने कहा, "सरकार किसी भी मामले में तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद ही फैसला लेती है। यदि पर्याप्त आधार होगा तो अभियोजन की मंजूरी देने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय राजनीतिक नहीं बल्कि पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
चार्जशीट से हटाए गए अधिकारियों के नाम
बिटकॉइन घोटाले की जांच कर रही SIT ने हाल ही में अपनी चार्जशीट से चार पुलिस अधिकारियों के नाम हटा दिए थे। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति राज्य सरकार से प्राप्त नहीं हो सकी।
इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रियांक खड़गे ने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा करेगी और यह भी देखा जाएगा कि चार्जशीट से अधिकारियों के नाम हटाने के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
छह महीने पुराने फैसले की होगी समीक्षा
गृह मंत्री ने बताया कि यह मामला लगभग छह महीने पुराना है। उन्होंने कहा कि सरकार यह जांच करेगी कि उस समय संबंधित एजेंसियों ने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं।
उन्होंने कहा, "अगर यह निर्णय छह महीने पहले लिया गया था तो यह देखा जाएगा कि उस समय सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं। यदि कहीं प्रक्रिया में कोई कमी पाई जाती है तो उसकी भी समीक्षा की जाएगी।"
जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी संवेदनशील मामले में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बिटकॉइन घोटाले जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को बचाना या फंसाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
बिटकॉइन घोटाले की जांच जारी
बिटकॉइन घोटाला पिछले कुछ वर्षों से कर्नाटक की राजनीति और कानून व्यवस्था से जुड़ा चर्चित मामला रहा है। इस मामले में आर्थिक लेनदेन, साइबर अपराध और कथित पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे हैं।
विशेष जांच दल (SIT) पूरे मामले की जांच कर रही है और अब तक कई पहलुओं की पड़ताल की जा चुकी है। जांच एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
सरकार ने दोहराई निष्पक्ष जांच की बात
गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में जांच एजेंसी अतिरिक्त साक्ष्य या नए तथ्य प्रस्तुत करती है, तो सरकार कानून के अनुरूप आवश्यक निर्णय लेने के लिए तैयार रहेगी।
आगे की कार्रवाई पर नजर
बिटकॉइन घोटाले से जुड़े इस घटनाक्रम के बाद अब सबकी नजर सरकार और SIT की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं या अभियोजन की मंजूरी के लिए दोबारा अनुरोध किया जाता है, तो सरकार उसकी कानूनी समीक्षा कर निर्णय ले सकती है।
फिलहाल गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि राज्य सरकार इस मामले में किसी भी निर्णय से पहले कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों को प्राथमिकता देगी तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के अपने रुख पर कायम रहेगी।





