
Karnataka कर्नाटक: मानसून की शुरुआत इस साल कमजोर रही है और जून 2026 के आंकड़े पिछले कई दशकों की तुलना में काफी निराशाजनक रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, यह महीना राज्य के लिए पिछले पांच दशकों में बारिश की कमी के मामले में चौथा सबसे खराब जून साबित हो सकता है।
राज्य में जून 2026 के दौरान कुल 116 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत से 42 प्रतिशत कम है। इस भारी कमी ने कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती मानसून में यह गिरावट आने वाले महीनों के लिए भी संकेतक मानी जा रही है।
मौसम के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक ने जून 2023 में सबसे खराब बारिश की स्थिति देखी थी, जब सामान्य 199 मिमी के मुकाबले केवल 87 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। उस वर्ष जून महीने में व्यापक सूखे जैसी स्थिति बन गई थी, जिसका असर कृषि उत्पादन पर भी पड़ा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1976 से 2026 के बीच कर्नाटक में कुल 21 से अधिक ऐसे साल रहे हैं जब जून महीने में बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई। इस अवधि में जून की औसत बारिश 190 मिमी से कम रही है, जो दर्शाता है कि राज्य में मानसून का पैटर्न लगातार अस्थिर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, इसी अवधि में 19 ऐसे वर्ष भी रहे हैं जब जून महीने में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। इन वर्षों में जून में औसत वर्षा 210 मिमी से अधिक रही, जिससे स्पष्ट होता है कि राज्य में मानसून की तीव्रता में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, जून 1991 कर्नाटक के लिए सबसे अधिक बारिश वाला महीना रहा, जब कुल 294 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इसके बाद 2007 में 290 मिमी, 1980 में 273 मिमी और 1992 में 271 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की असमान वर्षा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालती है। कर्नाटक में बड़े पैमाने पर किसान मानसून पर निर्भर हैं, ऐसे में कम बारिश होने पर सिंचाई, फसल उत्पादन और जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ जाता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष मानसून की अनियमितता का कारण समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है। हालांकि आने वाले हफ्तों में बारिश की स्थिति में सुधार की संभावना जताई जा रही है।
राज्य सरकार और कृषि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। जल संरक्षण और वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि किसानों को राहत मिल सके।
कुल मिलाकर, जून 2026 की बारिश कर्नाटक के लिए चिंता का विषय बनकर उभरी है और यह आने वाले मानसून सीजन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।





