
बेंगलुरु: कर्नाटक में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। लोकायुक्त की अलग-अलग टीमों ने राज्य के पांच जिलों—कलबुर्गी, हुबली, चिक्कबल्लापुर, बीदर और चित्रदुर्ग—में सरकारी अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने मकानों, कार्यालयों और अन्य परिसरों की तलाशी लेते हुए संपत्ति तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।
छापेमारी मुख्य रूप से उन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ की गई, जिन पर अपनी ज्ञात आय के मुकाबले अधिक संपत्ति अर्जित करने का संदेह है। तलाशी के दौरान जमीन, मकान, बैंक खातों, निवेश और अन्य चल-अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों को जांच के दायरे में लिया गया है। जब्त दस्तावेजों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद ही कथित अनुपातहीन संपत्ति की वास्तविक मात्रा स्पष्ट होगी।
कलबुर्गी में GESCOM की AEE के ठिकानों पर छापा
कलबुर्गी में लोकायुक्त की टीम ने गुलबर्गा इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (GESCOM) से जुड़ी असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजेश्वरी के आवास और कार्यालय पर छापेमारी की।
#WATCH | Karnataka | Lokayukta Officials conducted a raid and search operation at the residence and office of GESCOM Assistant Executive Engineer (AEE) Rajeshwari in Kalaburagi in a disproportionate assets case.
— ANI (@ANI) September 22, 2026
The raid took place at her house located in Mahalakshmi Layout and… pic.twitter.com/deNY1Sabsv
सुबह शुरू हुई कार्रवाई के दौरान टीम ने घर में मौजूद संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की। इसके साथ ही कार्यालय से भी सरकारी सेवा, आय और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए।
लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अधिकारी और उनके परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों का मूल्य उनकी वैध आय के अनुपात में है या नहीं। इसके लिए वेतन, बैंक लेनदेन, संपत्ति खरीद और दूसरे निवेश से जुड़े रिकॉर्ड की तुलना की जा सकती है।
HESCOM अधिकारी किरण कुमार बिंदूर के घर तलाशी
हुबली में भी लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की। यहां हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड (HESCOM) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर किरण कुमार बिंदूर के आवास पर छापा मारा गया।
कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़ी बताई जा रही है। लोकायुक्त अधिकारियों ने घर में मिले दस्तावेजों और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारी से जुड़े अन्य निवेश और वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी सेवा के दौरान हुई घोषित आय और अर्जित संपत्ति के बीच कोई असामान्य अंतर है या नहीं।
पांच जिलों में एक साथ कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक या दो अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। अलग-अलग टीमों ने कलबुर्गी, हुबली, चिक्कबल्लापुर, बीदर और चित्रदुर्ग में एक साथ छापेमारी की।
एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई करने का उद्देश्य संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित करना होता है। आय से अधिक संपत्ति की जांच में केवल किसी अधिकारी के घर में मिली नकदी या सामान ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि जमीन, मकान, बैंक खाते, शेयर, निवेश, वाहन और परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों का भी सत्यापन किया जाता है।
लोकायुक्त की टीमें अलग-अलग ठिकानों से मिले दस्तावेजों को एकत्र कर उनकी जांच कर रही हैं।
संपत्तियों के दस्तावेज खंगाले
छापेमारी के दौरान अधिकारियों का मुख्य ध्यान संपत्ति और वित्तीय रिकॉर्ड पर रहा। जांच टीमों ने कथित रूप से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इनका विस्तृत सत्यापन किया जाना है।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी संबंधित सरकारी कर्मचारी की एक निश्चित अवधि की वैध आय का आकलन करती है। इसके बाद उसी अवधि में उसके खर्च और अर्जित संपत्ति की तुलना की जाती है।
अगर जांच में यह सामने आता है कि उपलब्ध संपत्ति ज्ञात और वैध आय के स्रोतों से संतोषजनक रूप से मेल नहीं खाती, तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल छापेमारी में मिली संपत्ति को अंतिम रूप से अवैध या भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति कहना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। दस्तावेजों और आय के स्रोतों के सत्यापन के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
बैंक खातों और निवेश की भी हो सकती है जांच
ऐसे मामलों में जांच केवल घर और जमीन तक सीमित नहीं रहती। संबंधित अधिकारियों के बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, बीमा, निवेश और अन्य वित्तीय साधनों की जानकारी भी जांच के दायरे में आ सकती है।
जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि संपत्ति सीधे अधिकारी के नाम पर है या परिवार के किसी सदस्य अथवा अन्य व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई है। संपत्ति खरीदने के लिए धन कहां से आया, इसका रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होता है।
इसी तरह महंगे वाहन, आभूषण और अन्य चल संपत्तियों का मूल्यांकन भी कुल संपत्ति की गणना में किया जा सकता है।
सुबह-सुबह पहुंचीं लोकायुक्त की टीमें
लोकायुक्त की कार्रवाई मंगलवार सुबह शुरू हुई। कई टीमों ने लगभग एक ही समय पर अलग-अलग जिलों में संबंधित अधिकारियों के ठिकानों पर पहुंचकर तलाशी शुरू की।
इस तरह की समन्वित कार्रवाई में लोकायुक्त पुलिस पहले संबंधित अधिकारी की आय, संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी जुटाती है। पर्याप्त आधार मिलने पर मामला दर्ज कर तलाशी की कार्रवाई की जाती है।
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों की सूची तैयार करने के बाद उनकी विस्तृत जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के बाद यह पता चलता है कि संबंधित अधिकारी की वास्तविक संपत्ति कितनी है और उसका कितना हिस्सा ज्ञात आय से मेल खाता है।
सरकारी अधिकारियों पर बढ़ी निगरानी
कर्नाटक लोकायुक्त पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार, रिश्वत और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई कर रहा है। किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिलने या संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी की जानकारी सामने आने पर प्रारंभिक सत्यापन के बाद कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी पद पर रहते हुए किसी अधिकारी की वैध आय का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। ऐसे में अगर उसके पास ऐसी संपत्ति सामने आती है, जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं है, तो जांच एजेंसी उससे संबंधित विवरण मांग सकती है।
हालांकि किसी छापेमारी या मामला दर्ज होने का अर्थ अपने आप दोष सिद्ध होना नहीं है। अंतिम निष्कर्ष जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होता है।
दस्तावेजों की जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
पांच जिलों में हुई छापेमारी के दौरान मिली संपत्तियों और दस्तावेजों का अब लोकायुक्त अधिकारी विस्तृत मूल्यांकन करेंगे। जमीन और मकानों की कीमत, बैंक बैलेंस, निवेश और अन्य संपत्तियों को जोड़कर संबंधित अधिकारियों की कुल संपत्ति का आकलन किया जाएगा।
इसके बाद उनकी ज्ञात आय और खर्च से तुलना की जाएगी। अगर बड़ा अंतर मिलता है और संबंधित अधिकारी उसका संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाते हैं, तो जांच आगे बढ़ सकती है।
कलबुर्गी में GESCOM की AEE राजेश्वरी और हुबली में HESCOM के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर किरण कुमार बिंदूर से जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई इस व्यापक अभियान का हिस्सा है। अब लोकायुक्त की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जब्त रिकॉर्ड में कितनी संपत्ति आय से अधिक पाई जाती है और किन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





