कर्नाटक

SIR पर कांग्रेस की बड़ी बैठक, डी.के. शिवकुमार ने MLA-MLC की वीडियो मीटिंग बुलाई

Kavita2
6 Oct 2026 11:19 AM IST
SIR पर कांग्रेस की बड़ी बैठक, डी.के. शिवकुमार ने MLA-MLC की वीडियो मीटिंग बुलाई
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कर्नाटक : मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार शाम 4 बजे पार्टी के सभी विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की वीडियो मीटिंग बुलाई है। इस बैठक को पार्टी के भीतर SIR को लेकर बढ़ रही चिंताओं और शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हाल के हफ्तों में SIR कांग्रेस के लिए एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरा है। पार्टी लगातार चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है और इस संबंध में एक अभियान भी शुरू किया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर कई स्तरों पर गंभीर सवाल हैं और इसका असर पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।

अब इसी मुद्दे पर पार्टी के अंदरूनी स्तर पर भी विस्तार से चर्चा की तैयारी है। डी.के. शिवकुमार की ओर से बुलाई गई वीडियो बैठक में विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से उनके क्षेत्रों में SIR की स्थिति, मतदाता सूची में हुए बदलाव और स्थानीय स्तर पर सामने आई शिकायतों की जानकारी ली जा सकती है।

पार्टी के अंदर ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण का असर लगभग सभी विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में पड़ा है। इससे कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ी है। पार्टी चाहती है कि अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारियों को एक जगह संकलित किया जाए और आगे की राजनीतिक तथा संगठनात्मक रणनीति उसी के आधार पर तैयार की जाए।

हालांकि पार्टी के अंदर उठ रही शिकायतों और सार्वजनिक मंच पर उठाए जा रहे मुद्दों में अंतर बताया जा रहा है। सार्वजनिक रूप से कांग्रेस चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया को लेकर व्यापक सवाल उठा रही है, जबकि अंदरूनी स्तर पर चर्चा का फोकस निर्वाचन क्षेत्रों में इसके वास्तविक असर और स्थानीय समस्याओं पर रहने की संभावना है।

कांग्रेस के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची से जुड़ा कोई भी बदलाव सीधे चुनावी गणित से जुड़ा होता है। किसी भी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के नाम जुड़ने या हटने से राजनीतिक दलों की रणनीति प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे चुनावी तैयारी से भी जोड़कर देख रहा है।

वीडियो मीटिंग के जरिए पार्टी नेतृत्व विधायकों और MLC से यह भी जान सकता है कि उनके क्षेत्रों में कितने मतदाताओं के नामों को लेकर विवाद सामने आया है, किन इलाकों में शिकायतें ज्यादा हैं और क्या किसी खास पैटर्न को लेकर चिंता है। इन सभी जानकारियों के आधार पर कांग्रेस आगे चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष और अधिक मजबूती से रख सकती है।

पिछले कुछ समय से कांग्रेस इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान चला रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए तथा किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना उचित कारण के नहीं हटना चाहिए।

कांग्रेस की चिंता केवल मौजूदा मतदाता सूची तक सीमित नहीं है। पार्टी इसे आने वाले चुनावों से भी जोड़कर देख रही है। राजनीतिक दलों के लिए मतदाता सूची चुनावी तैयारी का सबसे अहम आधार होती है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम हटते या जुड़ते हैं, तो वहां चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

डी.के. शिवकुमार की इस बैठक को पार्टी के भीतर समन्वय मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सभी विधायक और MLC एक समान रणनीति के साथ इस मुद्दे पर काम करें और स्थानीय स्तर से मिलने वाली शिकायतों को व्यवस्थित तरीके से आगे पहुंचाया जाए।

यह भी माना जा रहा है कि बैठक में विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची की स्थिति पर नजर रखने और पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। हालांकि बैठक के औपचारिक एजेंडे को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

SIR का मुद्दा कांग्रेस की राज्य इकाई के लिए लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। पार्टी इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर उठा रही है। दूसरी ओर, पार्टी के अंदरूनी स्तर पर यह चिंता भी है कि मतदाता सूची के बदलाव का चुनावी परिणामों पर प्रभाव पड़ सकता है।

अब मंगलवार शाम 4 बजे होने वाली वीडियो बैठक पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। बैठक में विधायकों और विधान परिषद सदस्यों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर कांग्रेस अपनी अगली रणनीति तय कर सकती है। यह भी संभव है कि पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे अपने अभियान को और तेज करे तथा निर्वाचन क्षेत्रों से मिले आंकड़ों और शिकायतों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाए।

फिलहाल SIR का मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में लगातार गर्म बना हुआ है। कांग्रेस के लिए यह केवल चुनाव आयोग के खिलाफ उठाया गया राजनीतिक प्रश्न नहीं रह गया है, बल्कि अब पार्टी इसे अपने संगठन, विधायकों और आगामी चुनावी रणनीति से सीधे जोड़कर देख रही है।

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