कर्नाटक

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ किसानों का बड़ा प्रदर्शन

Kavita2
21 Sept 2026 10:42 AM IST
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ किसानों का बड़ा प्रदर्शन
x

कर्नाटक। पश्चिमी घाट से जुड़ी डॉ. के. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के विरोध में रविवार को हजारों किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। किसानों ने करीब 10 किलोमीटर तक पैदल मार्च निकाला और श्रृंगेरी रोड को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने रिपोर्ट के प्रावधानों का विरोध करते हुए सरकार से अपनी मांगों पर ध्यान देने की अपील की।

जानकारी के अनुसार, संगमेश्वर पेटा क्षेत्र के किसानों ने बालेहोन्नूर में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रस्तावित संबोधन के विरोध में पैदल मार्च शुरू किया। बड़ी संख्या में किसान एकजुट होकर कार्यक्रम स्थल की ओर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने श्रृंगेरी स्टेट हाईवे को जाम कर दिया। सड़क पर बैठकर किसानों ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से रिपोर्ट को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

किसानों का कहना था कि पश्चिमी घाट क्षेत्र से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों और किसानों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट के लागू होने से क्षेत्र के लोगों और कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारी किसानों ने मांग की कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार खुद मौके पर आकर उनकी बात सुनें। किसानों का कहना था कि जब तक मुख्यमंत्री प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर उनसे बातचीत नहीं करेंगे, तब तक वे सड़क से जाम नहीं हटाएंगे।

बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही तेज धूप में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। उन्होंने मुख्यमंत्री के आने का इंतजार किया और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे।

हालांकि, दोपहर में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का हेलिकॉप्टर रंभापुरी मठ के पास बने हेलीपैड पर उतरा। इसके बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले मठ पहुंचे और संतों से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इसके चलते उनके निर्धारित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में देरी हुई।

मुख्यमंत्री के पहुंचने में देरी के कारण किसानों का विरोध और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।

पश्चिमी घाट क्षेत्र पर्यावरणीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट में पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश की गई थी। इसी को लेकर कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और किसानों ने समय-समय पर विरोध जताया है।

किसानों का तर्क है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और कृषि हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की, जिससे पर्यावरण और लोगों के हितों के बीच संतुलन बना रहे।

प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया।

किसानों के प्रदर्शन के कारण सड़क यातायात प्रभावित हुआ। हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए बाधित रही, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन जारी रख सकते हैं। उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत कराना है।

फिलहाल प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

Next Story