
Karnataka कर्नाटक: कन्नड़ साहित्य और पत्रकारिता जगत की वरिष्ठ लेखिका इंदिरा लंकेश का सोमवार को निधन हो गया। वे 84 वर्ष की थीं और लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही थीं।
Indira Lankesh ने सोमवार सुबह बेंगलुरु के राजाजीनगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर फैल गई है।
इंदिरा लंकेश, वरिष्ठ पत्रकार और प्रसिद्ध लेखक डी. पी. लंकेश की पत्नी थीं। अपने लेखन और साहित्यिक योगदान के माध्यम से उन्होंने कन्नड़ साहित्य को एक अलग पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार के अनुसार, वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं और उम्र के कारण उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी।
इंदिरा लंकेश अपने पीछे एक समृद्ध साहित्यिक और पत्रकारिक विरासत छोड़ गई हैं। उनके परिवार में उनकी बेटी Kavitha Lankesh और बेटे Indrajit Lankesh शामिल हैं, जो दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इसके अलावा उनके पीछे रिश्तेदारों, मित्रों और प्रशंसकों का बड़ा दायरा भी है, जो उनके योगदान को याद कर रहे हैं।
साहित्यिक जगत के कई लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि उनके जाने से कन्नड़ साहित्य में एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। उन्हें एक संवेदनशील लेखिका और सशक्त विचारक के रूप में याद किया जा रहा है।
उनके निधन के बाद बेंगलुरु और कर्नाटक के साहित्यिक एवं पत्रकारिता समुदाय में शोक का माहौल है। कई साहित्यकारों और पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया।
इंदिरा लंकेश का लेखन सामाजिक विषयों और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित रहा है, जिसने पाठकों के बीच एक खास पहचान बनाई। उनके विचार और साहित्यिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।





