कर्नाटक

Bengaluru : मेट्रो से महंगी सुरंग सड़क, 1 किमी पर 1,061 करोड़ खर्च

Kavita2
14 July 2026 3:49 PM IST
Bengaluru : मेट्रो से महंगी सुरंग सड़क, 1 किमी पर 1,061 करोड़ खर्च
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बेंगलुरु : कर्नाटक में प्रस्तावित केआर पुरम से हेब्बाल तक सुरंग सड़क परियोजना की निर्माण लागत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के अनुसार, इस सुरंग सड़क की प्रति किलोमीटर निर्माण लागत उसी क्षेत्र में प्रस्तावित मेट्रो रेड लाइन परियोजना की तुलना में करीब डेढ़ गुना अधिक है।

डीपीआर के आंकड़ों के मुताबिक, केआर पुरम से हेब्बाल तक 16.75 किलोमीटर लंबी सुरंग सड़क परियोजना की अनुमानित लागत प्रति किलोमीटर करीब 1,061 करोड़ रुपये है। वहीं, इसी मार्ग के आसपास संचालित होने वाली प्रस्तावित मेट्रो फेज-3ए (रेड लाइन) परियोजना की प्रति किलोमीटर लागत लगभग 687 करोड़ रुपये आंकी गई है।

दोनों परियोजनाओं की लागत की तुलना से यह अंतर सामने आया है कि समान क्षेत्र और लंबी दूरी को कवर करने वाली मेट्रो परियोजना की निर्माण लागत सुरंग सड़क परियोजना की तुलना में काफी कम है।

मेट्रो फेज-3ए (रेड लाइन) की डीपीआर सोमवार को सार्वजनिक की गई थी। इसके बाद दोनों परियोजनाओं की लागत और निर्माण मॉडल को लेकर चर्चा शुरू हुई। मेट्रो परियोजना और सुरंग सड़क दोनों ही शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने वाली बड़ी बुनियादी ढांचा योजनाएं हैं।

डीपीआर के अनुसार, सरजापुर से हेब्बाल तक प्रस्तावित मेट्रो फेज-3ए परियोजना की कुल लंबाई 37.80 किलोमीटर है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 25,999 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसके आधार पर मेट्रो लाइन की औसत निर्माण लागत करीब 687 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आती है।

वहीं, केआर पुरम से हेब्बाल तक प्रस्तावित सुरंग सड़क परियोजना की लंबाई 16.75 किलोमीटर है। इसकी कुल लागत और प्रति किलोमीटर खर्च को देखते हुए यह मेट्रो परियोजना की तुलना में अधिक महंगी साबित हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरंग सड़क परियोजनाओं में जमीन के नीचे निर्माण, खुदाई, सुरक्षा व्यवस्था, वेंटिलेशन सिस्टम, आपातकालीन सुविधाएं और तकनीकी उपकरणों के कारण लागत काफी बढ़ जाती है। भूमिगत निर्माण में कई जटिलताएं होती हैं, जिससे खर्च बढ़ना स्वाभाविक है।

हालांकि, सुरंग सड़क परियोजना के समर्थकों का कहना है कि यह शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में मदद कर सकती है। बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सड़क पर बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत महसूस की जा रही है।

दूसरी ओर, मेट्रो परियोजना को सार्वजनिक परिवहन के लिहाज से अधिक प्रभावी माना जाता है। मेट्रो एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराती है और इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलती है।

रेड लाइन परियोजना को लेकर डीपीआर सार्वजनिक किए जाने के बाद अब नागरिकों और विशेषज्ञों के बीच दोनों परियोजनाओं की उपयोगिता और लागत को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब मेट्रो जैसी सार्वजनिक परिवहन परियोजना कम लागत में अधिक यात्रियों को सुविधा दे सकती है, तो सुरंग सड़क पर इतना बड़ा निवेश कितना प्रभावी होगा।

शहर के यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना का मूल्यांकन केवल निर्माण लागत के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ-साथ भविष्य की जरूरत, यात्रियों की संख्या, पर्यावरणीय प्रभाव और रखरखाव खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

बेंगलुरु में यातायात समस्या लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण सरकार लगातार नए समाधान तलाश रही है। इसी क्रम में मेट्रो विस्तार और सुरंग सड़क जैसी योजनाएं सामने आई हैं।

फिलहाल दोनों परियोजनाओं की लागत तुलना ने शहर में नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर मेट्रो परियोजना को किफायती और जन परिवहन के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, वहीं सुरंग सड़क परियोजना को यातायात दबाव कम करने के लिए एक वैकल्पिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

अब यह देखना होगा कि सरकार इन दोनों परियोजनाओं को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाती है और शहर के यातायात समाधान के लिए किस विकल्प को प्राथमिकता दी जाती है।

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