
Karnataka कर्नाटक: शहर के ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर सोमवार सुबह गवर्नर के जुलूस और एक नागरिक के प्रोटेस्ट के चलते ट्रैफिक लगभग 30 मिनट तक पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान सड़क पर लंबी गाड़ियों की कतारें लग गईं और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना ने सोशल मीडिया पर भी सुर्खियां बटोरीं, जहां शहर के सेलिब्रिटी और IT एक्सपर्ट ने VIP कल्चर और सड़क बंद करने के फैसले पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की।
बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, गवर्नर के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत ओल्ड एयरपोर्ट रोड को अस्थायी रूप से बंद किया गया था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने सड़क पर खड़े होकर प्रोटेस्ट किया, जिससे जाम और बढ़ गया। पुलिस ने बाद में ट्रैफिक को धीरे-धीरे बहाल किया और स्थिति पर काबू पाया।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने काफी ध्यान आकर्षित किया। सीनियर IT एक्सपर्ट टीवी मोहनदास पई ने अपनी पोस्ट में VIP कल्चर की कड़ी आलोचना की और डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार को टैग करते हुए सड़क बंद करने के फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की। पई ने कहा कि सार्वजनिक सड़कें आम जनता के लिए हैं, और किसी भी VIP जुलूस के कारण सामान्य नागरिकों की सुविधा बाधित होना स्वीकार्य नहीं है।
इस ट्रैफिक जाम और प्रोटेस्ट की घटना को लेकर कई शहरवासियों ने भी अपनी राय व्यक्त की। कुछ ने सुरक्षा कारणों को समझा, लेकिन अधिकतर ने सड़क बंद करने के तरीके और जनता की असुविधा पर सवाल उठाए।
ट्रैफिक जाम के दौरान कई लोग अपने कार्यालय और जरूरी मीटिंग्स में देर से पहुंचे। स्थानीय यात्री भी नाराज दिखे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रैफिक व्यवस्था की आलोचना की।
पुलिस ने बताया कि भविष्य में इस तरह के VIP दौरे के दौरान ट्रैफिक को व्यवस्थित करने के लिए और अधिक प्रभावी प्लानिंग की जाएगी। इसके तहत रोड़ ब्लॉकेज कम से कम किया जाएगा और आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी।
विशेषज्ञों और शहरवासियों का कहना है कि VIP कल्चर के चलते सड़कें बंद करना आम नागरिक के लिए परेशानी का कारण बनता है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे दौरे के लिए अलग से रूट मैनेजमेंट और समय सारणी तय की जाए, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
इस घटना ने बेंगलुरु में ट्रैफिक और VIP कल्चर पर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। शहरवासियों की मांग है कि सार्वजनिक सड़कें आम जनता के लिए सुरक्षित और सुगम रहनी चाहिए और किसी भी जुलूस या प्रोटेस्ट के दौरान उनका जीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।





