
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी और देश की आईटी हब कही जाने वाली बेंगलुरु नगरी को विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी योजना तैयार की है। वर्ष 2037 में बेंगलुरु की स्थापना के 500 साल पूरे होने वाले हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शहर के व्यापक विकास के लिए अगले 10 वर्षों में लगभग एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का खाका प्रस्तुत किया है। योजना में ट्रैफिक जाम, पेयजल संकट, कचरा प्रबंधन, सड़क निर्माण और सार्वजनिक परिवहन जैसी प्रमुख समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया गया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को बेंगलुरु के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के विकास में किसी विधानसभा क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों की जरूरी परियोजनाओं के प्रस्ताव देने को कहा और भरोसा दिलाया कि सरकार प्राथमिकता के आधार पर धनराशि उपलब्ध कराएगी।
2037 तक बेंगलुरु को विश्वस्तरीय शहर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपने आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में आयोजित बैठक के दौरान बेंगलुरु के भविष्य को लेकर विस्तृत योजना प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2037 में बेंगलुरु की स्थापना के 500 वर्ष पूरे होंगे। इसे ध्यान में रखते हुए अगले दस वर्षों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास की योजना तैयार की गई है।
प्रस्तावित परियोजनाओं पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य शहर की तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुसार आधुनिक सुविधाएं विकसित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु में जनसंख्या और वाहन तेजी से बढ़े हैं, लेकिन सड़क सुविधाओं का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हुआ है। इसलिए परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
ट्रैफिक जाम से राहत के लिए बनेंगे 40 KM लंबे टनल रोड
बेंगलुरु की सबसे बड़ी समस्याओं में ट्रैफिक जाम प्रमुख है। इसे देखते हुए सरकार ने 40 किलोमीटर लंबा दो लेन वाला सुरंग मार्ग विकसित करने की योजना बनाई है।
इस परियोजना का उद्देश्य शहर के व्यस्त इलाकों में वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हेब्बाल में दो किलोमीटर लंबे छोटे सुरंग मार्ग पर काम शुरू हो चुका है।
इसके अलावा 16.5 किलोमीटर लंबे उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर की अनुमानित लागत 17,780 करोड़ रुपये है। इसमें राज्य सरकार लगभग सात हजार करोड़ रुपये निवेश करेगी।
वहीं, 21 किलोमीटर लंबे पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।
हालांकि, इन परियोजनाओं के पूरा होने की समय-सीमा और यातायात पर वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
120 किलोमीटर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी
सरकार ने शहर में 120 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी बनाई है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत 23,165 करोड़ रुपये बताई गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, एलिवेटेड कॉरिडोर को राष्ट्रीय राजमार्गों के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
प्रस्तावित नेटवर्क को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। दस किलोमीटर से कम लंबे कॉरिडोर पर टोल नहीं लगाने की योजना है।
सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों और आवासीय इलाकों के बीच यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
2027 तक 170 किलोमीटर होगा मेट्रो नेटवर्क
बेंगलुरु में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल शहर में लगभग 96 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक इसे बढ़ाकर 170 किलोमीटर करना है।
इसके अतिरिक्त शहर में वर्तमान में लगभग सात हजार बसें संचालित हैं। भविष्य में 4,500 अतिरिक्त बसें जोड़ने की योजना तैयार की गई है।
साथ ही वर्ष 2030 तक लगभग 150 किलोमीटर लंबे उपनगरीय रेल नेटवर्क का विकास करने का लक्ष्य रखा गया है।
इन योजनाओं से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने और सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ने की उम्मीद है।
1500 KM सड़कों का होगा कायाकल्प
राज्य सरकार ने बेंगलुरु की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए भी व्यापक योजना तैयार की है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, शहर में लगभग 1,500 किलोमीटर प्रमुख और उप-प्रमुख सड़कों का उन्नयन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त करीब 500 किलोमीटर नई सड़कें विकसित करने का प्रस्ताव है।
योजना में वर्षा जल निकासी नालों के किनारे 300 किलोमीटर बफर रोड और 68 किलोमीटर बिजनेस कॉरिडोर का विकास शामिल है।
शहर की 17 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड के पुनर्विकास की भी तैयारी है।
इसके अलावा बाहरी क्षेत्रों में 18 किलोमीटर सड़क पर व्हाइट टॉपिंग का काम शुरू करने की योजना है।
सरकार ने 37 किलोमीटर डबल डेकर सड़क का प्रस्ताव भी केंद्र के समक्ष रखा है, जिसमें अब तक 11 किलोमीटर को अनुमति मिलने की जानकारी दी गई है।
पेयजल संकट दूर करने के लिए कावेरी परियोजना का विस्तार
बेंगलुरु में गर्मियों के दौरान पेयजल की समस्या गंभीर चुनौती बन जाती है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि शहर में अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के लिए कावेरी जलापूर्ति परियोजना के छठे चरण को आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी की सीमा से बाहर स्थित 65 ग्राम पंचायतों को शहरी स्थानीय निकायों में बदलने की योजना है।
इन क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से पेयजल आपूर्ति, सीवरेज और सड़क सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सरकार का मानना है कि आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होने से मुख्य शहर पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
कचरा प्रबंधन में बड़ा बदलाव, वाहनों में GPS अनिवार्य
बेंगलुरु में कचरे की समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहर के 27 क्षेत्रों में कचरा संग्रहण के लिए कुल 33 पैकेज तैयार किए गए हैं।
इनमें से 21 पैकेज के टेंडर खोले जा चुके हैं और पात्र एजेंसियों को जल्द कार्यादेश जारी किए जाएंगे।
नई व्यवस्था में प्रतिदिन लगभग नौ हजार टन कचरे के संग्रहण की क्षमता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सभी कचरा संग्रहण वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य होगा और केवल नए वाहनों का इस्तेमाल करने की शर्त रखी गई है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कचरा उठाने के काम में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधायकों को फंड देने में भेदभाव नहीं करने का भरोसा
बैठक में मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु के सभी विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों में सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच भेदभाव नहीं करेगी।
जनप्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने क्षेत्रों में आवश्यक सड़क, पेयजल, सीवरेज और अन्य परियोजनाओं के प्रस्ताव सरकार के सामने प्रस्तुत करें।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जरूरी कार्यों के प्रस्ताव मिलने पर धनराशि जारी करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, विपक्ष के एक विधायक ने बैठक में तत्काल स्थानीय समस्याओं के समाधान की तुलना में दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अधिक चर्चा होने की बात कही।
एक लाख करोड़ की योजना से बेंगलुरु के विकास को मिलेगी रफ्तार
बेंगलुरु देश के प्रमुख आईटी, स्टार्टअप और औद्योगिक केंद्रों में शामिल है। यहां तेजी से बढ़ती आबादी के कारण परिवहन, पेयजल और अन्य शहरी सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
राज्य सरकार की दस वर्षीय विकास योजना इन चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास है।
हालांकि, एक लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित परियोजनाओं की अनुमानित आवश्यकता है। इसे पूरी राशि स्वीकृत या जारी हो जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार को इन परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, आवश्यक मंजूरियां लेने और निर्माण कार्य समय पर पूरा कराने की चुनौती का सामना करना होगा।
यदि योजनाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में बेंगलुरु की यातायात व्यवस्था, जलापूर्ति और शहरी सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है।





