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कर्नाटक में कैंटीन से जंक फूड पर रोक

Kavita2
19 July 2026 11:23 AM IST
कर्नाटक में कैंटीन से जंक फूड पर रोक
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मंगलुरु : कर्नाटक सरकार ने बच्चों और मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और अस्पतालों की कैंटीन में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने कहा है कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।

मंगलुरु के जिला वेनलॉक अस्पताल में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में कई स्वास्थ्य समस्याओं की एक बड़ी वजह खान-पान की गलत आदतें बन रही हैं। उन्होंने चिंता जताई कि जंक फूड के बढ़ते सेवन से लोगों में मोटापा, मधुमेह, हृदय संबंधी बीमारियां और अन्य जीवनशैली से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं।

यू.टी. खादर ने कहा कि स्कूल और अस्पताल जैसे स्थानों पर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक वातावरण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संस्थानों की कैंटीन में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं होनी चाहिए, जो लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

मंत्री ने बताया कि जंक फूड पर रोक लगाने की शुरुआत सबसे पहले जिला वेनलॉक अस्पताल से की जाएगी। इसके बाद यहां लागू किए जाने वाले मॉडल को राज्य के अन्य सरकारी और निजी अस्पतालों में भी अपनाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य है कि अस्पताल परिसर में मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए स्कूलों में भी इसी तरह के कदम उठाने की जरूरत है। स्कूलों में उपलब्ध भोजन और खाद्य सामग्री का बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए कैंटीन में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देना जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को भी चेतावनी दी कि बाजार में कोई भी खाद्य उत्पाद उतारने से पहले उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य में खाद्य जांच व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत मौजूदा खाद्य जांच प्रयोगशालाओं को आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की योजना बनाई जा रही है।

इसके अलावा, बेंगलुरु में एक नई खाद्य जांच प्रयोगशाला स्थापित करने की भी तैयारी है। इस प्रयोगशाला के माध्यम से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता और मानकों का ध्यान रखना चाहिए।

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, अस्पतालों की सुविधाओं और मरीजों को दी जा रही सेवाओं की समीक्षा की। मंत्री ने अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं में जंक फूड का बढ़ता सेवन चिंता का विषय है। अधिक मात्रा में तले-भुने और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन से लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में स्कूलों और अस्पतालों जैसे स्थानों पर स्वस्थ भोजन को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कर्नाटक सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को कम करने की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। सरकार अब इस नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी।

मंत्री यू.टी. खादर ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के साथ-साथ बीमारी से बचाव पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित करने से कई बीमारियों को रोका जा सकता है।

वेनलॉक अस्पताल से शुरू होने वाली यह पहल आने वाले समय में पूरे राज्य के अस्पतालों और स्कूलों में लागू की जा सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे बच्चों, मरीजों और आम लोगों में स्वस्थ भोजन को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होंगे।

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