कर्नाटक

नवजात शिशु को कचरे के ढेर में छोड़कर भागने की कोशिश, ग्रामीणों ने मां को पकड़ा

Kavita2
29 Sept 2026 12:14 PM IST
नवजात शिशु को कचरे के ढेर में छोड़कर भागने की कोशिश, ग्रामीणों ने मां को पकड़ा
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कलाबुरागी। कर्नाटक के कलाबुरागी तालुक के श्रीनिवास सरदागी गांव में एक दिन के नवजात शिशु को कचरे के ढेर में छोड़कर भागने की कोशिश का मामला सामने आया है। घटना को देख ग्रामीण तुरंत हरकत में आए और कथित तौर पर बच्चे को छोड़कर जा रही महिला तथा उसकी मां को रोक लिया। इसके बाद नवजात को सुरक्षित निकालकर पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक एक महिला अपनी मां के साथ ऑटो-रिक्शा से श्रीनिवास सरदागी गांव पहुंची थी। आरोप है कि दोनों ने एक दिन के नवजात शिशु को गांव में कचरे के ढेर के पास छोड़ दिया और ऑटो-रिक्शा से वहां से निकलने की कोशिश की।

इसी दौरान आसपास मौजूद ग्रामीणों की नजर उन पर पड़ गई। बच्चे को कचरे के पास छोड़ते देखकर लोगों को संदेह हुआ और उन्होंने तत्काल ऑटो-रिक्शा को रोक लिया। ग्रामीणों ने नवजात को वहां से उठाया और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद पुलिस को घटना की सूचना दी।

घटना की जानकारी गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। नवजात शिशु को इस तरह छोड़ने की घटना को लेकर लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने महिला और उसकी मां को पुलिस के आने तक रोके रखा।

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों महिलाओं को अपने साथ ले गई। नवजात को भी आवश्यक देखभाल और आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों के सुपुर्द किया गया।

शनिवार को मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंची। चाइल्ड हेल्पलाइन के कोऑर्डिनेटर बसवराज तेंगली ने यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों से संपर्क किया और महिला तथा एक दिन के नवजात के पुनर्वास की व्यवस्था करने को कहा।

चाइल्ड हेल्पलाइन की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि नवजात की स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित देखभाल सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इतनी कम उम्र के बच्चे को खुले में या कचरे के पास छोड़ना उसके स्वास्थ्य और जीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने बच्चे को छोड़ने का फैसला क्यों लिया और घटना के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। महिला की पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानकारी जुटाई जा सकती है ताकि पूरे मामले की वास्तविक वजह सामने आ सके।

इस मामले में महिला की मां की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह समझने का प्रयास कर रही है कि बच्चे को वहां छोड़ने की योजना किसने बनाई थी और दोनों की इस घटना में क्या भूमिका रही।

ग्रामीणों की सतर्कता के कारण नवजात को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। यदि लोगों की नजर बच्चे पर नहीं पड़ती तो खुले स्थान पर पड़े रहने से उसकी हालत गंभीर हो सकती थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने बच्चे की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मामले में बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति की भी जांच की जा रही है। एक दिन के नवजात को विशेष देखभाल की जरूरत होती है और शरीर का तापमान गिरने, संक्रमण या भोजन नहीं मिलने जैसी परिस्थितियां उसके लिए गंभीर हो सकती हैं।

चाइल्ड हेल्पलाइन से जुड़े अधिकारियों का प्रयास है कि नवजात को नियमानुसार सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और उसकी देखभाल की पूरी व्यवस्था हो। इसके साथ ही महिला की स्थिति का भी आकलन कर जरूरत के मुताबिक पुनर्वास और परामर्श की व्यवस्था की जा सकती है।

मामले में संबंधित महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। नवजात से जुड़े मामलों में बच्चे की सुरक्षा और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आगे की प्रक्रिया तय की जाती है।

पुलिस घटना के संबंध में ग्रामीणों के बयान भी दर्ज कर सकती है। खासतौर पर उन लोगों से जानकारी ली जाएगी जिन्होंने महिला को बच्चे को छोड़ते देखा और ऑटो-रिक्शा रोककर दोनों महिलाओं को पकड़ा था।

ऑटो-रिक्शा चालक से भी पूछताछ की जा सकती है ताकि यह पता चल सके कि महिला और उसकी मां कहां से आई थीं और उन्हें किस स्थान पर जाना था। इससे घटना से पहले और बाद की गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।

घटना ने नवजात बच्चों की सुरक्षा और संकट की स्थिति में महिलाओं को उपलब्ध सहायता व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी महिला को यदि बच्चे की देखभाल करने में कठिनाई हो तो कानूनी और संस्थागत सहायता के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं। ऐसे मामलों में बच्चे को असुरक्षित स्थान पर छोड़ने की बजाय संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया जा सकता है।

फिलहाल नवजात को बचा लिया गया है और उसकी देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस महिला और उसकी मां से पूछताछ कर घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है।

चाइल्ड हेल्पलाइन के कोऑर्डिनेटर बसवराज तेंगली ने भी संबंधित पुलिस अधिकारियों से महिला और बच्चे दोनों के पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

श्रीनिवास सरदागी गांव में हुई इस घटना में ग्रामीणों की तत्परता से एक दिन के नवजात की जान संभावित खतरे से बच गई। अब पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी बच्चे की सुरक्षा के साथ पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।

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