
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के हम्पी में एक महत्वपूर्ण आर्कियोलॉजिकल खोज सामने आई है, जिससे एक बार फिर विजयनगर साम्राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि के नए प्रमाण मिले हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के हम्पी ज़ोन की टीम को जैन मंदिर परिसर के पास की खुदाई के दौरान विजयनगर काल के एक प्राचीन मंदिर की छत का हिस्सा मिला है।
ASI द्वारा यह खुदाई जैन मंदिर कॉम्प्लेक्स के आसपास के क्षेत्र में इसलिए शुरू की गई थी क्योंकि विशेषज्ञों को आशंका थी कि इस इलाके में विजयनगर काल की कई ऐतिहासिक संरचनाएं मिट्टी के नीचे दबी हो सकती हैं। लंबे समय से यह क्षेत्र पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
खुदाई के दौरान मिट्टी की परतों के नीचे पत्थर से बनी मंदिर की छत का अवशेष मिला, जिससे यह संकेत मिलता है कि यहां कभी एक पूर्ण मंदिर संरचना मौजूद रही होगी। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना हो सकता है और विजयनगर साम्राज्य के धार्मिक और स्थापत्य इतिहास को समझने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस खोज के बारे में जानकारी देते हुए ASI हम्पी ज़ोन के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट के. रामकृष्ण रेड्डी अवारपु ने बताया कि खोजी गई संरचना का आकार लगभग 4.35 मीटर लंबाई और 4.26 मीटर चौड़ाई का है। उन्होंने बताया कि यह अवशेष मंदिर के गर्भगृह (पवित्र स्थान) की छत से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर की ईंटों से बनी संरचना समय के साथ काफी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। फिलहाल खुदाई में केवल गर्भगृह की छत का हिस्सा ही सुरक्षित अवस्था में मिला है, जबकि बाकी संरचना मिट्टी और मलबे के नीचे दबी या नष्ट हो चुकी है।
पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज विजयनगर साम्राज्य की धार्मिक वास्तुकला और निर्माण शैली को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हम्पी पहले से ही यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में अपनी ऐतिहासिक पहचान रखता है और यहां लगातार हो रही खोजें इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता को और मजबूत करती हैं।
ASI की टीम अब इस क्षेत्र में और विस्तृत खुदाई करने की योजना बना रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस मंदिर परिसर से जुड़े अन्य ढांचे भी जमीन के नीचे मौजूद हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिल सकते हैं।
इस खोज ने न केवल इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि देशभर में विजयनगर साम्राज्य की विरासत को लेकर एक नई रुचि भी पैदा की है।





