कर्नाटक
कर्नाटक में 1,000 स्वास्थ्य पदों पर भर्ती को मंजूरी, सरकारी अस्पतालों को मिलेगी मजबूती
Ratna Netam
8 Nov 2026 3:13 PM IST

x
बेंगलुरु। कर्नाटक में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग में 1,000 रिक्त पदों पर भर्ती को मंजूरी दे दी है। राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भर्ती प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों, सामान्य चिकित्सकों और अन्य जरूरी चिकित्सा कर्मचारियों के पद भरे जाएंगे। सरकार के इस फैसले से राज्य के सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है।मंत्री यू.टी. खादर ने 7 नवंबर को चित्रदुर्ग में उपायुक्त कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और आगामी कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए मानव संसाधन की कमी दूर करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
220 मेडिकल अधिकारियों की पहले ही हो चुकी है भर्ती
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में 220 मेडिकल अधिकारियों की भर्ती की जा चुकी है। इन चयनित मेडिकल अधिकारियों को जल्द से जल्द नियुक्ति आदेश जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उपचार के लिए बड़े शहरों या जिला अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़े।उन्होंने बताया कि राज्य के लगभग 80 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अभी भी डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इस समस्या को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग जिला अस्पतालों में भी आवश्यक पदों को भरने की दिशा में काम कर रहा है।सरकार का मानना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी इकाई होते हैं। यहां डॉक्टरों की उपलब्धता होने से सामान्य बीमारियों का उपचार स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है और गंभीर मरीजों को समय रहते बड़े अस्पतालों में रेफर करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और सामान्य चिकित्सकों के पद भी भरे जाएंगे
यू.टी. खादर के मुताबिक, कैबिनेट की मंजूरी के बाद 1,000 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इनमें विशेषज्ञ डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और स्टाफ नर्सों सहित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी पद शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सा कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। नई भर्ती से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को विस्तार देने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सामान्य चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से ओपीडी और अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव कम हो सकता है।
तालुक अस्पतालों को अपग्रेड करने की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के तालुक अस्पतालों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत पांच बेड वाली टेली-आईसीयू सुविधा शुरू करने की योजना है।इस सुविधा के माध्यम से छोटे अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और निगरानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे उन क्षेत्रों के मरीजों को लाभ मिल सकता है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सीमित है।खादर ने बताया कि जिन स्थानों पर मौजूदा जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों के लिए स्थानांतरित किया गया है, वहां नए जिला अस्पताल बनाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा तालुक मुख्यालयों में स्थित अस्पतालों को जिला अस्पताल के स्तर तक अपग्रेड करने के विकल्प पर भी काम किया जा रहा है।
350 नई एंबुलेंस खरीदने को मंजूरी
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने 350 नई एंबुलेंस खरीदने की भी मंजूरी दी है। मंत्री के अनुसार, फिलहाल कर्नाटक में लगभग 450 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं। नई एंबुलेंस शामिल होने के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 800 हो जाएगी।उन्होंने आपातकालीन सेवाओं की जवाबदेही को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। खादर ने बताया कि यदि किसी आपातकालीन कॉल के बाद एंबुलेंस 20 मिनट के भीतर संबंधित स्थान पर नहीं पहुंचती है, तो सेवा प्रदान करने वाली एजेंसी पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।इसके साथ ही एंबुलेंस की आवाजाही पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना और एंबुलेंस सेवाओं की कार्यप्रणाली में सुधार करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल अस्पतालों में कर्मचारियों की भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पतालों का उन्नयन, आपातकालीन परिवहन और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न स्तरों पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं की भी दी जानकारी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यू.टी. खादर ने स्वास्थ्य विभाग के अलावा अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए लगभग 540 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल शिक्षा के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।इसके अलावा संत शिशुनाला शरीफ के नाम पर 10 सीबीएसई स्कूल स्थापित करने और 100 मौलाना आजाद स्कूलों को अपग्रेड करने की योजना भी बताई गई। अरिवु योजना के तहत पात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को ट्यूशन फीस में सहायता दी जा रही है।कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार का 1,000 रिक्त पदों पर भर्ती को मंजूरी देने का फैसला राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने, तालुक अस्पतालों को अपग्रेड करने, टेली-आईसीयू सुविधा और नई एंबुलेंस खरीदने की योजनाओं से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ भर्ती और सुविधाओं के धरातल पर लागू होने के बाद ही सामने आएगा
Next Story





