
कोच्चि। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कांग्रेस छोड़ चुके पुराने नेताओं से पार्टी में वापस लौटने की खुली अपील की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाले जो नेता किसी कारण से पार्टी से दूर चले गए हैं, उन्हें फिर से साथ आना चाहिए। उनका कहना है कि पुराने नेताओं की वापसी से पार्टी मजबूत होगी और कांग्रेस की विचारधारा को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भट्टी विक्रमार्क बुधवार को कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अपील केवल तेलंगाना या आंध्र प्रदेश के नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के किसी भी हिस्से में कांग्रेस छोड़ चुके नेताओं के लिए है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज भी कांग्रेस की मूल विचारधारा में भरोसा रखते हैं, उनके लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि पुराने कांग्रेसी नेता दोबारा एक मंच पर आते हैं तो पार्टी की संगठनात्मक ताकत बढ़ सकती है। उन्होंने इसे केवल चुनावी गणित का मामला न बताते हुए विचारधारा और संगठन से जुड़ा विषय बताया। उनके मुताबिक कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहे नेताओं के पास राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक समझ और कार्यकर्ताओं से पुराना संपर्क है।
भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सबसे अधिक खुश होंगे यदि कांग्रेस छोड़ चुके पुराने नेता वापस पार्टी में आते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े लोगों का एक साथ आना देश और पार्टी दोनों के लिए उपयोगी होगा।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ वर्षों में अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ी है। इनमें से कुछ नेताओं ने अन्य दलों का दामन थामा, जबकि कुछ ने अपनी अलग राजनीतिक राह बनाई। ऐसे में भट्टी की अपील को पार्टी के पुराने नेताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि उन्होंने किसी एक नेता का नाम लेकर वापसी की अपील नहीं की। उनका संदेश व्यापक था और उन्होंने कहा कि चाहे आंध्र प्रदेश हो, तेलंगाना हो या देश का कोई दूसरा हिस्सा, कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाले पुराने नेताओं को साथ आना चाहिए।
भट्टी विक्रमार्क का यह बयान नया जरूर है, लेकिन इस तरह की अपील वह पहले भी कर चुके हैं। जुलाई 2024 में भी उन्होंने कांग्रेस छोड़ चुके पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से पार्टी में लौटने की अपील की थी। उस समय तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी उनकी इस अपील का समर्थन किया था।
इससे यह संकेत मिलता है कि तेलंगाना कांग्रेस का एक धड़ा पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ने के पक्ष में लंबे समय से आवाज उठाता रहा है। पार्टी के लिए यह रणनीति खासतौर पर उन राज्यों में उपयोगी हो सकती है, जहां कांग्रेस से अलग होकर बने राजनीतिक समूहों या अन्य दलों में गए नेताओं की अभी भी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ है।
भट्टी विक्रमार्क ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि कांग्रेस की ताकत केवल शीर्ष नेतृत्व से नहीं, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े लोगों से बनती है। हाल ही में तेलंगाना में पार्टी कार्यकर्ताओं की एक बैठक में भी उन्होंने बूथ स्तर के एजेंटों को कांग्रेस की रीढ़ बताया था।
उनका कहना है कि पार्टी के पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाकर ही संगठन को मजबूत किया जा सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस छोड़ चुके नेताओं को वापसी का संदेश दिया।
कांग्रेस के सामने पिछले कुछ वर्षों से कई राज्यों में संगठनात्मक चुनौतियां रही हैं। कुछ जगह वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक हुए, तो कई राज्यों में बड़े चेहरों ने पार्टी छोड़ी। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसके कारण अलग रहे हैं। ऐसे में सभी दल-बदल को केवल एक ही वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।
भट्टी विक्रमार्क ने अपने बयान में इन नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करने के लिए पुराने नेताओं को मतभेद पीछे छोड़कर एक साथ आना चाहिए।
तेलंगाना में कांग्रेस इस समय सत्ता में है और भट्टी विक्रमार्क उपमुख्यमंत्री के साथ वित्त, योजना और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हैं। उनके बयान को इसलिए भी महत्व मिल रहा है क्योंकि वह पार्टी के वरिष्ठ राज्य स्तरीय नेताओं में शामिल हैं।
कोच्चि में उनका यह कार्यक्रम दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित था। कार्यक्रम में भट्टी विक्रमार्क ने तेलंगाना में विकास, शासन और अवसरों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।
कांग्रेस के पुराने नेताओं की वापसी की अपील भविष्य की संगठनात्मक राजनीति से भी जुड़ी मानी जा रही है। पार्टी यदि ऐसे नेताओं को वापस जोड़ने का प्रयास करती है तो राज्य स्तर पर पुराने समीकरण फिर से बन सकते हैं। हालांकि किस नेता की वापसी संभव है और किसकी नहीं, यह पूरी तरह संबंधित नेता और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर निर्भर करेगा।
भट्टी विक्रमार्क ने यह साफ किया कि उनकी प्राथमिकता कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस विचारधारा में विश्वास रखते हैं, उन्हें अलग-अलग रास्तों पर रहने के बजाय एक साथ आकर काम करना चाहिए।
फिलहाल उनकी अपील के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस छोड़ चुके किसी बड़े नेता की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आती है या नहीं। अभी तक इसे एक व्यापक राजनीतिक आमंत्रण के रूप में ही देखा जा रहा है।
भट्टी विक्रमार्क के बयान का मुख्य संदेश यही है कि कांग्रेस अपने पुराने नेताओं को दोबारा जोड़कर संगठन को व्यापक बनाना चाहती है। उन्होंने पार्टी से दूर जा चुके नेताओं से कहा है कि वे वापस आएं और कांग्रेस की विचारधारा तथा संगठन को मजबूत करने में योगदान दें।





