कर्नाटक

नशे में धुत यात्रियों से परेशान ऐप-कैब ड्राइवर, उल्टी से लेकर किराया न देने तक की बढ़ी घटनाएं

Kavita2
10 Aug 2026 12:08 PM IST
नशे में धुत यात्रियों से परेशान ऐप-कैब ड्राइवर, उल्टी से लेकर किराया न देने तक की बढ़ी घटनाएं
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बेंगलुरु। शहर में ऐप-बेस्ड कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए देर रात नशे में धुत यात्रियों को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाना लगातार चुनौती बनता जा रहा है। ड्राइवरों के मुताबिक, रात के समय कैब में सफर करने वाले कुछ नशे में धुत यात्री न केवल गाड़ी में उल्टी कर देते हैं, बल्कि कई बार किराया देने से भी इनकार कर देते हैं। कुछ मामलों में यात्री इतने नशे में होते हैं कि उन्हें अपना घर या अपार्टमेंट तक याद नहीं रहता। ऐसे में ड्राइवरों को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ता है और कई बार अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड या यात्रियों के रिश्तेदारों की मदद लेनी पड़ती है।

येलाहंका निवासी अरफात, जो वर्ष 2017 से कैब ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं, ने देर रात नशे में यात्रियों से जुड़ी ऐसी कई परेशानियों का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, नशे में यात्रियों के कारण कैब ड्राइवरों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव और सुरक्षा से जुड़ी चिंता का भी सामना करना पड़ता है।

कैब में उल्टी से बढ़ जाता है खर्च

ड्राइवरों के सामने आने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक कैब के अंदर यात्रियों का उल्टी कर देना है। अरफात के मुताबिक, कई बार रात में यात्री इतनी अधिक मात्रा में शराब पीकर कैब में बैठते हैं कि रास्ते में उनकी तबीयत बिगड़ जाती है और वे वाहन के अंदर ही उल्टी कर देते हैं।

ऐसी स्थिति में कैब को तुरंत अगली बुकिंग के लिए इस्तेमाल करना संभव नहीं होता। वाहन की सफाई के लिए ड्राइवर को किसी बाहरी व्यक्ति या सफाई सेवा की मदद लेनी पड़ती है। अरफात ने बताया कि कैब को साफ कराने में 500 रुपये तक का खर्च आ सकता है।

समस्या तब और बढ़ जाती है, जब यात्री सफाई का खर्च उठाने से इनकार कर देता है। ऐसे में ड्राइवर को अपनी जेब से वाहन की सफाई का खर्च उठाना पड़ता है। इसके अलावा कैब की सफाई में लगने वाला समय भी ड्राइवर की कमाई को प्रभावित करता है, क्योंकि उस दौरान वह दूसरी सवारी नहीं ले पाता।

किराया देने से भी इनकार

नशे में यात्रियों से जुड़ी दूसरी परेशानी किराया भुगतान को लेकर होती है। ड्राइवरों के अनुसार, कुछ यात्री गंतव्य तक पहुंचने के बाद किराया देने से इनकार कर देते हैं या नशे की हालत में उन्हें भुगतान करने की स्थिति का ठीक से अंदाजा नहीं रहता।

ऐसे मामलों में ड्राइवर के लिए स्थिति असहज हो जाती है। एक तरफ उसे यात्री को सुरक्षित छोड़ने की जिम्मेदारी महसूस होती है, वहीं दूसरी ओर यात्रा का भुगतान नहीं मिलने से उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

घर का पता भूल जाते हैं यात्री

अरफात ने नशे में धुत महिला यात्रियों से जुड़ी कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, कई बार महिला यात्री इतनी नशे में होती हैं कि उन्हें अपने घर या अपार्टमेंट का सही पता याद नहीं रहता। कुछ यात्री मंजिल तक पहुंचने से पहले ही कैब में सो जाती हैं।

ऐसी स्थिति में ड्राइवरों के सामने सबसे बड़ी चिंता यात्री की सुरक्षा को लेकर होती है। ड्राइवरों के लिए यात्री को अकेले छोड़कर चले जाना उचित नहीं होता, खासकर तब जब वह अपने घर या गंतव्य की जानकारी देने की स्थिति में न हो।

सिक्योरिटी गार्ड और रिश्तेदारों की मदद

जब कोई यात्री अपने घर की पहचान नहीं कर पाता या कैब से उतरने की स्थिति में नहीं होता, तो ड्राइवरों को कई बार संबंधित अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड की मदद लेनी पड़ती है। कुछ मामलों में यात्री के रिश्तेदारों या परिचितों के आने तक इंतजार करना पड़ता है।

इस पूरी प्रक्रिया में ड्राइवर का काफी समय लग जाता है। लेकिन अरफात के मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में प्राथमिक चिंता यात्री को सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाना होती है। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को यात्रियों की सुरक्षा की चिंता रहती है।

आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव

कैब ड्राइवरों के लिए नशे में यात्रियों से जुड़ी समस्याएं केवल सफाई या किराया न मिलने तक सीमित नहीं हैं। देर रात तक कैब चलाने वाले ड्राइवरों को ऐसी परिस्थितियों में मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है।

एक ओर उन्हें अपनी कैब को नुकसान से बचाना होता है, दूसरी ओर यात्री की सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है। यदि यात्री रास्ते में बीमार हो जाए या गंतव्य तक पहुंचने के बाद घर की पहचान न कर पाए, तो ड्राइवर को सामान्य यात्रा की तुलना में काफी अधिक समय देना पड़ता है।

इसके अलावा, कैब की सफाई और मरम्मत पर होने वाला खर्च भी ड्राइवर की आय को प्रभावित कर सकता है। खासकर उन ड्राइवरों के लिए जो रोजाना की कमाई पर निर्भर हैं, ऐसी घटनाएं आर्थिक बोझ बढ़ा सकती हैं।

देर रात कैब सेवाओं के सामने चुनौती

शहर में ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं का इस्तेमाल देर रात तक बड़ी संख्या में लोग करते हैं। इनमें पार्टी, पब या अन्य कार्यक्रमों से लौटने वाले यात्री भी शामिल होते हैं। ऐसे में ड्राइवरों के सामने यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है।

ड्राइवरों का कहना है कि नशे में यात्री अपनी स्थिति को लेकर कई बार खुद निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में ड्राइवरों को सावधानी बरतनी पड़ती है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा गार्ड या परिवार के सदस्यों से संपर्क करना पड़ता है।

अरफात जैसे ड्राइवरों के अनुभव बताते हैं कि देर रात कैब सेवा देने वालों के सामने यात्री सुरक्षा, वाहन की सफाई, भुगतान और समय से जुड़ी कई व्यावहारिक चुनौतियां मौजूद हैं। ड्राइवरों का कहना है कि यात्रियों को भी कैब में सफर करते समय जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए, खासकर तब जब वे नशे की स्थिति में हों।

देर रात की इन घटनाओं ने ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए एक ऐसी चुनौती को सामने ला दिया है, जिसका असर उनकी कमाई, काम के समय और मानसिक तनाव—तीनों पर पड़ता है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जहां जरूरी है, वहीं ड्राइवरों के नुकसान और परेशानियों को लेकर भी व्यवस्था में स्पष्ट समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है।

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