कर्नाटक

बारिश में 5% कमी की आशंका, Siddaramaiah ने पेयजल आपूर्ति पर सख्त निर्देश दिए

Kavita2
3 May 2026 12:00 PM IST
बारिश में 5% कमी की आशंका, Siddaramaiah ने पेयजल आपूर्ति पर सख्त निर्देश दिए
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में इस वर्ष बारिश में लगभग 5 प्रतिशत की कमी की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य में पेयजल आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित न हो। उन्होंने कहा कि जल संकट की आशंका को ध्यान में रखते हुए अभी से ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

बेंगलुरु में सभी विभागों के शीर्ष अधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने जिलों में स्थिति की नियमित समीक्षा पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि जिला प्रभारी सचिव अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के जिलों में जल आपूर्ति और वर्षा स्थिति पर लगातार निगरानी रखें और समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएं ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का तुरंत समाधान किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में पेयजल आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित सचिवों की जिम्मेदारी है कि वे अपने जिलों में किसी भी समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करें और प्रशासनिक स्तर पर कोई ढिलाई न बरती जाए। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन के सुचारू संचालन में विभागीय सचिवों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और संविधान में भी उनकी जिम्मेदारियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

सिद्धारमैया ने अधिकारियों से कहा कि वे संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करें और किसी भी परिस्थिति में इसके विपरीत निर्णय न लें। उन्होंने वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि सचिवों को बिना किसी दबाव के अपनी राय स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए, भले ही मंत्री असहमत हों।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी कि सरकार को गलत जानकारी न दी जाए और न ही किसी भी निर्णय में जनता के हितों से समझौता किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय हमेशा जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां जनप्रतिनिधि सीमित समय के लिए पद पर रहते हैं, वहीं अधिकारी लंबे समय तक प्रशासन का हिस्सा होते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ काम करना आवश्यक है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि संभावित जल संकट को देखते हुए सभी विभागों को पहले से तैयारी करनी होगी ताकि किसी भी जिले में पेयजल की कमी न हो और जनता को असुविधा का सामना न करना पड़े।

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