कर्नाटक

दलबदल कानून को मजबूत करने की तैयारी, MLA पर कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश संभव

Kavita2
7 May 2026 11:09 AM IST
दलबदल कानून को मजबूत करने की तैयारी, MLA पर कड़े प्रतिबंधों की सिफारिश संभव
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Karnataka कर्नाटक: दसवीं अनुसूची यानी एंटी-डिफेक्शन लॉ की समीक्षा कर रही पीठासीन अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति दलबदल करने वाले विधायकों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की सिफारिश कर सकती है। प्रस्ताव के तहत ऐसे विधायकों को नो-कॉन्फिडेंस मोशन के दौरान वोटिंग के अधिकार से वंचित करने और भविष्य में मंत्री पद या किसी भी लाभ के पद पर नियुक्ति से रोकने का सुझाव शामिल हो सकता है।

कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू. टी. खादर ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर की अध्यक्षता में गठित यह समिति दलबदल विरोधी कानून को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से काम कर रही है। समिति का लक्ष्य राजनीतिक दल बदल की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है।

यह पैनल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले जून में कर्नाटक में अपनी अंतिम बैठक करेगा। इस बैठक के बाद सिफारिशों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

इस समिति का गठन इस वर्ष फरवरी में किया गया था। इसमें कर्नाटक के स्पीकर यू. टी. खादर के साथ-साथ ओडिशा के स्पीकर सुरमा पाधी और नागालैंड के स्पीकर शारिंगेन लोंगकुमेर भी शामिल हैं। समिति देश के विभिन्न राज्यों में दलबदल कानून के प्रभाव और उसकी चुनौतियों का अध्ययन कर रही है।

अब तक मुंबई और पुरी में हुई बैठकों में कई महत्वपूर्ण सुझावों पर चर्चा की जा चुकी है। इनमें सबसे अहम प्रस्ताव एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल के गठन का है, जो यह तय करेगा कि किसी राजनीतिक विभाजन की स्थिति में असली पार्टी कौन सी है। इस व्यवस्था से विधानसभा स्पीकरों पर बढ़ते दबाव को कम करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह भारतीय राजनीति में दलबदल की प्रवृत्ति को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इससे न केवल विधायकों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि सरकारों की स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

फिलहाल समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है और सभी राज्यों से मिले सुझावों और अनुभवों का विश्लेषण किया जा रहा है। जून में होने वाली बैठक के बाद इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से लोकसभा स्पीकर को सौंपा जाएगा।

इस पूरे कदम को दलबदल कानून के ढांचे को और मजबूत करने तथा राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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