
Karnataka कर्नाटक:चामराजनगर जिले में तापमान लगातार बढ़ने और पानी की मांग तेज होने के बीच ग्रामीणों ने बारिश की उम्मीद में पारंपरिक मान्यताओं का सहारा लिया है। जिले के हनूर तालुक के केम्पययानट्टी गांव में ग्रामीणों ने ‘कप्पे पूजा’ कर बारिश के लिए प्रार्थना की।
यह पारंपरिक रस्म क्षेत्र की लोक आस्था और मान्यताओं से जुड़ी हुई मानी जाती है। इस आयोजन में विशेष रूप से बच्चों की अहम भूमिका रहती है। परंपरा के अनुसार, छोटे बच्चे मेंढकों को नीम के पत्तों से सजी टोकरी में रखकर अपने सिर पर उठाते हैं और पूरे गांव में जुलूस निकालते हैं।
जुलूस के दौरान बच्चे और ग्रामीण पारंपरिक गीत “बा बा मालेराया” गाते हुए बारिश के लिए प्रार्थना करते हैं। गांव की गलियों में निकले इस जुलूस को लोग सामूहिक आस्था और मौसम से जुड़ी उम्मीदों के रूप में देखते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह की परंपराएं लंबे समय से क्षेत्र में प्रचलित हैं और सूखे या गर्मी के समय ग्रामीण इन्हें अपनाते हैं। उनका मानना है कि इससे बारिश की संभावना बढ़ती है और प्राकृतिक संतुलन के प्रति उनकी आस्था भी जुड़ी रहती है।
हाल के दिनों में तापमान बढ़ने से इलाके में पानी की समस्या और गहराई है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि पारंपरिक पूजा और अनुष्ठान उनके लिए केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामूहिक उम्मीद और एकजुटता का प्रतीक भी हैं।
गांव में हुए इस आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में पारंपरिक माहौल देखने को मिला।





