
बेंगलुरु। कर्नाटक स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क यानी KSWAN 3.0 प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता एन.आर. रमेश ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से संपर्क कर करीब 444 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। रमेश का आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं, जिससे एक विशेष संगठन को फायदा मिल सके।
एन.आर. रमेश ने 28 सितंबर को ED को शिकायत सौंपी। शिकायत में उन्होंने कर्नाटक सरकार के मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया और वरिष्ठ IAS अधिकारी तथा सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस के CEO भूबालन का नाम लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि KSWAN 3.0 की पूरी निविदा प्रक्रिया में कई स्तरों पर पक्षपात किया गया और कुछ कंपनियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। ये सभी आरोप शिकायत का हिस्सा हैं और अभी स्वतंत्र जांच में सिद्ध नहीं हुए हैं।
KSWAN 3.0 प्रोजेक्ट का उद्देश्य कर्नाटक सरकार के विभिन्न कार्यालयों को जोड़ने वाले डिजिटल नेटवर्क को आधुनिक बनाना और KSWAN 2.0 के मौजूदा ढांचे का विस्तार करना है। इसके जरिए नेटवर्क सुरक्षा, सरकारी संचार और प्रशासनिक दक्षता को बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 444.90 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया 2025-26 के दौरान आगे बढ़ी।
रमेश ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें CISCO को लाभ पहुंचाने के हिसाब से तैयार की गईं। उनका दावा है कि अंततः यही संगठन चयनित हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सेंटर फॉर ई-गवर्नेंस के CEO भूबालन ने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और अन्य संगठनों की आपत्तियों पर उचित कार्रवाई नहीं की।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि KSWAN 3.0 के लिए पहला टेंडर जुलाई 2025 में निकाला गया था। उस प्रक्रिया में कई कंपनियों ने भाग लिया, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद दिसंबर 2025 में 444 करोड़ रुपये से अधिक का नया टेंडर जारी किया गया। इससे पहले भी टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे थे कि क्या नई शर्तों ने प्रतिस्पर्धा को सीमित कर दिया था।
रमेश के मुताबिक चयनित व्यवस्था में CISCO ने RailTel के साथ कंसोर्टियम बनाया और तकनीकी जरूरतों के लिए हैदराबाद की Allvy Software Solutions Pvt Ltd के साथ व्यवस्था की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह संरचना टेंडर की मूल पात्रता और तकनीकी शर्तों के अनुरूप थी।
शिकायत में Telecommunications Consultants India Ltd यानी TCIL से जुड़ा मुद्दा भी उठाया गया है। रमेश का आरोप है कि TCIL सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस से जुड़े हिस्से में भाग लेना चाहती थी, लेकिन जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि TCIL की लिखित आपत्तियों पर संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
BJP नेता ने टेंडर से बैंडविड्थ सेवाओं को अलग रखने पर भी सवाल उठाया है। उनका दावा है कि यदि यह हिस्सा बाद में अलग से किसी अन्य एजेंसी को दिया जाता है तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। शिकायत में इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की गई है।
रमेश ने आरोप लगाया कि 2023 से 2026 के दौरान कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग यानी DPAR औपचारिक रूप से तत्कालीन मुख्यमंत्री के पास था, लेकिन विभाग से जुड़े मामलों में यतींद्र सिद्धारमैया का प्रभाव था। उन्होंने भूबालन को भी इस कथित प्रक्रिया से जोड़ते हुए ED से मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े पहलुओं की जांच की मांग की है। ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं।
दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यतींद्र सिद्धारमैया को मंत्री बने कुछ ही समय हुआ है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप गलत हैं। सरकार की ओर से इस पूरे मामले में किसी वित्तीय घोटाले की बात स्वीकार नहीं की गई है।
KSWAN 3.0 की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल पहली बार अब नहीं उठे हैं। अप्रैल 2026 में भी रिपोर्टें सामने आई थीं जिनमें आरोप लगाया गया था कि निविदा प्रक्रिया में स्थापित नियमों का पालन नहीं किया गया और इससे राज्य सरकार पर करीब 90 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। उस समय भी यह आरोप लगाया गया था कि संशोधित तकनीकी शर्तों ने प्रतिस्पर्धा को सीमित किया।
अब मामला ED तक पहुंचने के बाद राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है। हालांकि शिकायत दर्ज कराना जांच या दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। ED यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर मामला उसके अधिकार क्षेत्र में जांच के योग्य है या नहीं।
फिलहाल BJP नेता एन.आर. रमेश ने KSWAN 3.0 प्रोजेक्ट की पूरी टेंडर प्रक्रिया, चयनित संगठनों की भूमिका और संबंधित अधिकारियों के फैसलों की जांच की मांग की है। आगे ED या अन्य जांच एजेंसियां इस शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं, इस पर नजर रहेगी।





