
गदग: कर्नाटक के गदग जिले के बेटागेरी शेल्टर कॉलोनी स्थित ‘नम्मा क्लिनिक’ में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां इलाज के लिए आए एक मरीज को एक्सपायर हो चुकी खांसी की गोलियां दे दी गईं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
‘नम्मा क्लिनिक’ की शुरुआत गरीब और आम लोगों को मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे में क्लिनिक में दवाओं की गुणवत्ता और जांच व्यवस्था को लेकर यह मामला चर्चा में आ गया है।
मरीज ने खुद पकड़ी एक्सपायर दवा
जानकारी के अनुसार, बेटागेरी शेल्टर कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में एक व्यक्ति इलाज कराने पहुंचा था। डॉक्टर ने जांच के बाद उसे खांसी की दवा लिखी और कथित तौर पर गोली उपलब्ध कराई।
मरीज ने जब दवा लेने से पहले पैकेट पर लिखी जानकारी देखी तो उसे एक्सपायरी डेट निकल चुकी होने का पता चला। इसके बाद मरीज ने तुरंत डॉक्टर का ध्यान इस ओर दिलाया।
दवा की जांच के बाद उठे सवाल
मरीज द्वारा दवा दिखाए जाने के बाद क्लिनिक में मौजूद अन्य लोगों ने भी इस मामले पर नाराजगी जताई। लोगों का आरोप है कि यह केवल एक घटना नहीं है और इससे पहले भी ऐसी लापरवाही सामने आ चुकी है।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि मरीज दवा की तारीख नहीं देखता तो उसके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता था।
गरीब मरीजों की सुरक्षा पर चिंता
लोगों का कहना है कि नम्मा क्लिनिक जैसे केंद्रों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को इलाज उपलब्ध कराना है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और उनकी समय सीमा की जांच बेहद जरूरी है।
स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गरीब मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि दवाएं मरीजों को देने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।
स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं के रखरखाव और वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई जा रही है।
नम्मा क्लिनिक की भूमिका
नम्मा क्लिनिक को स्थानीय स्तर पर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था। इन केंद्रों में आम बीमारियों का इलाज, स्वास्थ्य जांच और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है।
ऐसे में दवा वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल इस मामले में आधिकारिक जांच और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एक्सपायर दवा मरीज तक कैसे पहुंची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
दवा वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सरकारी या मुफ्त स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की नियमित जांच जरूरी होती है। दवाओं के स्टॉक की निगरानी, एक्सपायरी डेट की जांच और सही तरीके से भंडारण स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा है।
गदग के नम्मा क्लिनिक में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर दवा वितरण व्यवस्था और स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल स्थानीय लोग इस मामले में जल्द कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।





