कर्नाटक

टनल रोड की लागत 97% बढ़ने का आरोप

Kavita2
5 Sept 2026 10:59 AM IST
टनल रोड की लागत 97% बढ़ने का आरोप
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बेंगलुरु। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने बेंगलुरु में प्रस्तावित टनल रोड परियोजना को लेकर कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए टेंडर की राशि में 97 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने पूछा कि क्या शहर को वास्तव में इतनी महंगी टनल रोड परियोजना की जरूरत है। करंदलाजे ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को बड़े पैमाने पर धन खर्च करने से पहले बेंगलुरु में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक जाम के वास्तविक कारणों का विस्तृत अध्ययन कराना चाहिए।

मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बेंगलुरु की यातायात समस्या का समाधान करने के नाम पर इतनी बड़ी परियोजना शुरू करने से पहले उसकी आवश्यकता और उपयोगिता का आकलन होना चाहिए। उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए जिनसे शहर के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़े।

टेंडर राशि में 97 प्रतिशत वृद्धि का आरोप

शोभा करंदलाजे ने दावा किया कि प्रस्तावित बेंगलुरु टनल रोड परियोजना की टेंडर राशि 97 प्रतिशत बढ़ा दी गई है। उन्होंने इसे लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि परियोजना की लागत में इतनी बड़ी बढ़ोतरी किन कारणों से हुई और क्या वास्तव में इस पर इतनी राशि खर्च करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बनने वाली किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना में लागत, आवश्यकता और उसके संभावित लाभों का स्पष्ट आकलन होना चाहिए।

हालांकि टेंडर राशि में 97 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा केंद्रीय मंत्री की ओर से किया गया है। राज्य सरकार की ओर से इस आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही परियोजना की लागत से संबंधित पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

‘बेंगलुरु को टनल रोड की जरूरत नहीं’

करंदलाजे ने प्रस्तावित परियोजना की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार बेंगलुरु को टनल रोड की आवश्यकता नहीं है।

उनका कहना है कि शहर की ट्रैफिक समस्या का समाधान केवल नई सड़क या सुरंग बनाने से नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम की समस्या इतनी गंभीर क्यों होती जा रही है।

उन्होंने सरकार से शहर की यातायात व्यवस्था पर विस्तृत अध्ययन कराने की मांग की। इस अध्ययन में प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव, सार्वजनिक परिवहन, सड़क नेटवर्क और यातायात प्रबंधन जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।

ट्रैफिक जाम के कारणों का हो विस्तृत अध्ययन

बेंगलुरु देश के सबसे व्यस्त महानगरों में शामिल है। आईटी और अन्य उद्योगों के तेजी से विस्तार के साथ शहर में वाहनों की संख्या और दैनिक यात्रियों का दबाव बढ़ा है।

कई प्रमुख मार्गों पर व्यस्त समय में लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या सामने आती है। ऐसे में सरकार शहर के यातायात दबाव को कम करने के लिए विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम कर रही है।

करंदलाजे का कहना है कि सरकार को किसी बड़े प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले समस्या की जड़ का अध्ययन करना चाहिए। इससे यह तय किया जा सकेगा कि टनल रोड ही सबसे प्रभावी समाधान है या अन्य विकल्पों से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए एक साल से अधिक समय हो चुका है और इस दौरान सरकार को ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए जो बेंगलुरु के हितों के खिलाफ हों।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को शहर के विकास के नाम पर बेंगलुरु को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

उनका कहना था कि बुनियादी ढांचे का विकास जरूरी है, लेकिन किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले उसके आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पार्क की जमीन से जुड़े विधेयक का भी किया जिक्र

करंदलाजे ने अपनी बात के दौरान पार्क की जमीन को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में इस्तेमाल करने से जुड़े प्रस्ताव का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि लोगों के कड़े विरोध के बाद राज्य सरकार ने उस विधेयक को वापस लेने का फैसला किया, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के लिए पार्क की जमीन के इस्तेमाल का प्रावधान होने की बात कही जा रही थी।

केंद्रीय मंत्री ने इसे जनता की आपत्तियों का असर बताया। उन्होंने संकेत दिया कि शहर के विकास से जुड़े फैसलों में नागरिकों की चिंताओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

बड़े प्रोजेक्ट की लागत पर राजनीतिक बहस

टनल रोड जैसी बड़ी परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावना रहती है। ऐसे में परियोजना की लागत और उससे मिलने वाले फायदे राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

यदि किसी परियोजना की अनुमानित या टेंडर राशि में बड़ा बदलाव होता है तो उसके कारणों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। निर्माण सामग्री की लागत, डिजाइन में बदलाव, तकनीकी आवश्यकताएं और परियोजना का दायरा जैसे कई कारण लागत को प्रभावित कर सकते हैं।

अब करंदलाजे द्वारा 97 प्रतिशत बढ़ोतरी का आरोप लगाए जाने के बाद इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

शहर के भविष्य से जुड़ा मुद्दा

बेंगलुरु में यातायात की समस्या लंबे समय से शहर की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। ट्रैफिक जाम के कारण लोगों का समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं। इससे उत्पादकता और पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ता है।

ऐसे में किसी भी नई यातायात परियोजना का उद्देश्य शहर में यात्रा का समय कम करना और प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव घटाना होना चाहिए। लेकिन परियोजना की लागत और उसके वास्तविक लाभ के बीच संतुलन भी जरूरी है।

फिलहाल केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने टनल रोड परियोजना की आवश्यकता और टेंडर राशि में कथित 97 प्रतिशत बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार को घेरा है। अब राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और परियोजना से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों पर नजर रहेगी।

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