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Bengaluru बेंगलुरु। इंफोसिस के चेयरमैन Nandan Nilekani नंदन नीलेकणी ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आईटी सॉफ्टवेयर कंपनियों को प्रतिस्थापित नहीं करेगी, बल्कि उन कंपनियों के विस्तार और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी जो नई तकनीकों को तेजी से अपनाती हैं।
इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में संबोधन करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े उद्यम ग्राहकों में एआई के उपयोग को लेकर एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है और इस अंतर को पाटना कंपनी का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने कहा, “एआई हमारी जैसी कंपनियों का स्थान नहीं लेगा, बल्कि उन कंपनियों को मजबूत करेगा जो उद्देश्यपूर्ण तरीके से आगे बढ़ती हैं और तेजी से बदलाव के अनुसार खुद को ढालती हैं। नीलेकणी ने बताया कि इंफोसिस 2030 तक लगभग 400 अरब डॉलर के एआई-आधारित सेवाओं के अवसर का लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जेनरेटिव एआई के आने के बाद भी कंपनी की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि और बढ़ी है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ लोगों के बीच यह सवाल है कि जब कोडिंग का बड़ा हिस्सा ऑटोमेटेड हो जाएगा, तब आईटी कंपनियों की भूमिका क्या होगी। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि सॉफ्टवेयर विकास केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एंटरप्राइज आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा, टेस्टिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। नीलेकणी ने कहा कि भविष्य का बड़ा अवसर मिशन-क्रिटिकल एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एआई सिस्टम के एकीकरण में निहित है। उन्होंने बताया कि इंफोसिस पहले ही अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से 90 प्रतिशत के साथ एआई परियोजनाओं पर काम कर रही है।
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