
Karnataka कर्नाटक : कृषि उपज मंडी परिसर के बाहर कृषि उपज बेचने की अनुमति वापस लिए जाने के बाद एपीएमसी परिसर में व्यापार में उछाल आया है, जिससे वर्ष 2024-25 में 75 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है।
पिछली भाजपा नीत सरकार ने वर्ष 2020 में अधिनियम में संशोधन करके किसानों को कृषि उपज मंडियों (एपीएमसी) के बाहर अपनी उपज बेचने की अनुमति दी थी। इससे एपीएमसी में व्यापार में उल्लेखनीय गिरावट आई और उन्हें आय के अभाव से जूझना पड़ा।
‘कृषि उपज मंडी व्यापार (विनियमन एवं विकास) अधिनियम’ में संशोधन करके किसानों को निजी व्यक्तियों को और मंडी के बाहर अपनी उपज बेचने की अनुमति दी गई। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में कहा था कि अगर वह राज्य में सत्ता में आई तो इस अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। सत्ता में आने के बाद उसने अपना वादा पूरा किया। अप्रैल 2024 से किसान अपनी उपज मंडी के अंदर बेचने लगे। मुरझाए कृषि उपज मंडी प्रांगण को पुनर्जीवित किया गया। एपीएमसी ने एक ही वर्ष में कृषि उपज की बिक्री का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
कृषि मंडी मंत्री शिवानंद पाटिल कहते हैं, "रिकॉर्ड कारोबार का कारण कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के परिसर में सुधार, किसान-हितैषी मंडी व्यवस्था और उद्योगों को समर्थन देने वाली कुछ नीतियों सहित अधिनियम में कई सुधार लागू करना है। मंडी परिसर के बाहर व्यापारिक गतिविधियों पर सख्ती से नियंत्रण किया गया है। इसीलिए अतिरिक्त निदेशकों के साथ चार संभागीय कार्यालय खोले गए हैं। किसानों को वजन, बिक्री और आय की गारंटी दी जा रही है।"





