कर्नाटक

चार तालुकों का दौरा कर CM बोले कहीं भी फसल ठीक नहीं

Kavita2
5 Sept 2026 10:53 AM IST
चार तालुकों का दौरा कर CM बोले कहीं भी फसल ठीक नहीं
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बागलकोट। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बागलकोट जिले में फसलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्होंने जिले के चार तालुकों का दौरा किया है और कहीं भी फसल ठीक तरीके से विकसित होती नजर नहीं आई। शुक्रवार को शिरूर गांव में किसानों के खेतों का निरीक्षण करने और फसलों की स्थिति का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि सूरजमुखी, मिर्च, कुट्टू और अरहर जैसी फसलें गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों और विधायकों के साथ चर्चा कर किसानों को राहत देने के लिए संभावित कदम उठाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ स्थानों पर सूखा घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखे की स्थिति की समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खेत दूर से हरे दिखाई देने के आधार पर फसल को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। कई जगह पौधे तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वास्तविक उत्पादन की संभावना बेहद कमजोर है।

चार तालुकों का किया दौरा

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, “मैंने बागलकोट जिले के चार तालुकों का दौरा किया है और कहीं भी फसल ठीक से नहीं उगी है।”

उन्होंने अलग-अलग खेतों में पहुंचकर किसानों से बातचीत की और फसलों की स्थिति को करीब से देखा। किसानों से बुवाई, खेती पर हुए खर्च, बारिश और मौजूदा फसल की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी रिपोर्ट के आधार पर स्थिति को समझने के बजाय उन्होंने स्वयं खेतों में जाकर वास्तविक हालात देखने का प्रयास किया है।

सूरजमुखी से मिर्च तक फसलों पर असर

शिवकुमार ने बताया कि क्षेत्र में सूरजमुखी, मिर्च, कुट्टू और अरहर जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं। किसानों ने इन फसलों की बुवाई में काफी रकम खर्च की, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ किसानों ने 20 से 30 एकड़ तक जमीन में बुवाई की है। इन किसानों ने उन्हें बताया कि उन्होंने फसलों का बीमा भी कराया है।

ऐसे किसानों के लिए बीमा और सरकारी राहत महत्वपूर्ण हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अधिकारियों और विधायकों से बातचीत करेंगे और देखेंगे कि प्रभावित किसानों को किस तरह राहत दी जा सकती है।

कहीं सूखा घोषित कहीं समीक्षा जारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ स्थानों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। वहीं जिन इलाकों में अभी घोषणा नहीं हुई है, वहां सूखे की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।

सूखे का निर्धारण विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है। बारिश की स्थिति के साथ बुवाई और फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का खेतों का दौरा जमीनी हालात समझने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

उन्होंने संकेत दिया कि अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के बाद प्रभावित किसानों को राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

‘हरे खेत का मतलब अच्छी फसल नहीं’

मुख्यमंत्री ने फसलों की वास्तविक स्थिति बताते हुए कहा कि कई खेत ऊपर से हरे-भरे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वहां अच्छी फसल तैयार हो रही है।

उन्होंने कहा, “खेत भले ही हरे-भरे दिखें, लेकिन असल में कोई फसल नहीं है। सूरजमुखी सूख गए हैं और मिर्च की फसल में बीमारी लग गई है। सिर्फ इसलिए कि वे हरे दिख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि फसल तैयार मिलेगी।”

मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी से साफ है कि सरकार फसलों का आकलन केवल खेत में मौजूद हरियाली के आधार पर नहीं बल्कि संभावित उत्पादन और फसल की गुणवत्ता के आधार पर करने पर जोर दे रही है।

मिर्च की फसल में बीमारी से नुकसान

क्षेत्र में मिर्च की खेती करने वाले किसानों को दोहरी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ मौसम और बारिश की स्थिति ने फसल को प्रभावित किया है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के मुताबिक मिर्च की फसल में बीमारी भी लगी है।

फसल में बीमारी लगने पर किसानों को कीटनाशक और अन्य कृषि उपायों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। इसके बावजूद उत्पादन प्रभावित होने पर उनकी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

सूरजमुखी की स्थिति भी खराब बताई गई है। मुख्यमंत्री ने अपने निरीक्षण के आधार पर कहा कि कई जगह सूरजमुखी सूख चुका है।

खेती पर हुए खर्च की ली जानकारी

मुख्यमंत्री ने किसानों द्वारा बुवाई, जुताई और ट्रैक्टर के इस्तेमाल पर किए जाने वाले खर्च का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि खेती शुरू करने से लेकर फसल तैयार करने तक किसानों को कितनी लागत उठानी पड़ती है।

बीज, खाद, कृषि उपकरण, ट्रैक्टर और मजदूरी पर होने वाला खर्च किसान के लिए बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी होता है। यदि फसल तैयार नहीं होती तो पूरी लागत किसान पर बोझ बन सकती है।

इसी वजह से मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भविष्य में किसानों की सहायता के लिए क्या किया जा सकता है, इस पर विचार कर रहे हैं।

फसल बीमा पर भी रहेगी नजर

जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उनके दावों और नुकसान के आकलन पर भी ध्यान दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री को कई किसानों ने बताया कि उन्होंने बड़े क्षेत्र में बुवाई करने के साथ फसल का बीमा कराया है।

ऐसे में नुकसान का सही आकलन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा। वास्तविक क्षति के आधार पर पात्र किसानों को बीमा का लाभ मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

राहत के लिए अधिकारियों और विधायकों से होगी चर्चा

शिवकुमार ने कहा कि वह अधिकारियों और विधायकों के साथ बैठक कर स्थिति पर चर्चा करेंगे। इसमें प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट, फसल नुकसान और किसानों की आर्थिक स्थिति पर विचार किया जा सकता है।

बागलकोट के चार तालुकों के दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि फसलों की हालत चिंताजनक है। अब किसानों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा पूरी होने और नुकसान का आकलन होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार किसानों को किस तरह की राहत उपलब्ध कराती है।

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