कर्नाटक

मूर्ति विवाद के बाद अब ‘सिद्धारमैया सर्कल’ पर घमासान, समर्थकों ने जंक्शन पर लगाई नेमप्लेट

Kavita2
4 Oct 2026 10:29 AM IST
मूर्ति विवाद के बाद अब ‘सिद्धारमैया सर्कल’ पर घमासान, समर्थकों ने जंक्शन पर लगाई नेमप्लेट
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मैसूर। कलाबुरागी में सिद्धारमैया की मूर्ति लगाए जाने को लेकर हुए विवाद के बाद अब मैसूर में उनके नाम पर एक जंक्शन का नामकरण किए जाने का मामला सामने आया है। सिद्धारमैया के समर्थकों ने मैसूर-हुंसूर रोड पर स्थित लिंगदेवरकोप्पलु गांव के एक जंक्शन को ‘सिद्धारमैया सर्कल’ नाम दिया है। इतना ही नहीं, समर्थकों ने वहां इस नाम की नेमप्लेट भी लगा दी है। इसके बाद एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर नामकरण और इसके लिए आवश्यक आधिकारिक अनुमति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में कलाबुरागी के हाई कोर्ट सर्कल में सिद्धारमैया की मूर्ति लगाए जाने को लेकर विवाद हुआ था। वहां बिना किसी आधिकारिक अनुमति के रातों-रात सिद्धारमैया की मूर्ति लगा दी गई थी। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए मूर्ति को वहां से हटा दिया था।

कलाबुरागी की घटना के बाद अब मैसूर-हुंसूर रोड पर सामने आए इस घटनाक्रम ने लोगों का ध्यान खींचा है। लिंगदेवरकोप्पलु गांव के जंक्शन पर सिद्धारमैया समर्थकों ने ‘सिद्धारमैया सर्कल’ लिखी नेमप्लेट लगा दी। इस तरह समर्थकों ने जंक्शन को नया नाम देने की पहल अपने स्तर पर की है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि जंक्शन का नाम आधिकारिक तौर पर बदलने के लिए किसी सक्षम प्राधिकरण से मंजूरी ली गई है या नहीं। ऐसे में नेमप्लेट लगाए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थान का नाम बदलने या किसी नेता के नाम पर रखने के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की गई है या नहीं।

इससे पहले कलाबुरागी में भी इसी तरह अनुमति का मुद्दा विवाद की वजह बना था। हाई कोर्ट सर्कल में सिद्धारमैया की मूर्ति अचानक रातों-रात स्थापित कर दी गई थी। बताया गया कि इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। मूर्ति लगने की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए और उसे हटा दिया गया।

कलाबुरागी में मूर्ति हटाने की कार्रवाई के बाद मामला चर्चा में रहा। अब सिद्धारमैया के समर्थकों की ओर से मैसूर क्षेत्र में जंक्शन का नाम ‘सिद्धारमैया सर्कल’ रखे जाने से दोनों घटनाओं को जोड़कर देखा जा रहा है।

मैसूर-हुंसूर रोड महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और लिंगदेवरकोप्पलु गांव का यह जंक्शन स्थानीय लोगों की आवाजाही से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी सार्वजनिक जंक्शन पर नया नाम लिखी नेमप्लेट लगाने का मामला केवल समर्थकों की पहल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रशासनिक स्वीकृति और सार्वजनिक स्थानों के आधिकारिक नामकरण की प्रक्रिया से भी जुड़ जाता है।

आमतौर पर किसी सड़क, चौराहे या सर्कल का आधिकारिक नामकरण संबंधित स्थानीय निकाय और सक्षम अधिकारियों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इसके लिए प्रस्ताव, विचार-विमर्श और आवश्यक मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसे में समर्थकों की ओर से सीधे नेमप्लेट लगाए जाने के बाद प्रशासन के अगले कदम पर नजर रहेगी।

सिद्धारमैया का मैसूर क्षेत्र से लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है और यहां उनके समर्थकों की बड़ी मौजूदगी देखने को मिलती रही है। ऐसे में समर्थकों द्वारा उनके नाम पर सर्कल बनाए जाने की पहल को उनके प्रति समर्थन प्रदर्शित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि किसी नेता के प्रति समर्थन और सार्वजनिक स्थान के आधिकारिक नामकरण की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं।

हालिया घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कलाबुरागी में मूर्ति लगाने और मैसूर में सर्कल का नाम रखने के दोनों मामलों में समर्थकों ने सार्वजनिक स्थान पर सिद्धारमैया का नाम स्थापित करने की कोशिश की है। कलाबुरागी में मूर्ति को प्रशासन ने अनुमति नहीं होने के कारण हटा दिया था। अब लिंगदेवरकोप्पलु में लगी नेमप्लेट को लेकर प्रशासन क्या रुख अपनाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

कलाबुरागी के हाई कोर्ट सर्कल में हुई घटना अचानक सामने आई थी। रात के समय वहां सिद्धारमैया की मूर्ति स्थापित कर दी गई थी। सुबह इसकी जानकारी मिलने पर मामला चर्चा में आ गया। बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट कार्रवाई करते हुए मूर्ति को वहां से हटा दिया।

मूर्ति हटाए जाने के बाद समर्थकों की प्रतिक्रिया और पूरे विवाद की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि मैसूर-हुंसूर रोड पर नया मामला सामने आ गया। इस बार मूर्ति के बजाय एक जंक्शन का नाम सिद्धारमैया के नाम पर रखने और नेमप्लेट लगाने की पहल की गई है।

सार्वजनिक स्थानों पर नेताओं की प्रतिमाएं लगाने या उनके नाम पर सड़क और चौराहों का नामकरण करने के मामले कई बार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन जाते हैं। ऐसे मामलों में समर्थकों की भावनाओं के साथ स्थानीय प्रशासन के नियम और आधिकारिक अनुमति भी महत्वपूर्ण होती है। यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है तो स्थानीय निकाय हस्तक्षेप कर सकता है।

फिलहाल लिंगदेवरकोप्पलु गांव के जंक्शन पर ‘सिद्धारमैया सर्कल’ की नेमप्लेट लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। समर्थकों ने इसे सिद्धारमैया के नाम से पहचान देने की कोशिश की है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से इस नामकरण को आधिकारिक मान्यता दिए जाने का उल्लेख नहीं है।

अब यह मामला स्थानीय प्रशासन के सामने भी पहुंच सकता है। अधिकारी यह देख सकते हैं कि नेमप्लेट किसने लगाई, इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं और जंक्शन के आधिकारिक नाम में किसी तरह का बदलाव किया गया है या नहीं।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों के नामकरण में निर्धारित प्रक्रिया के पालन का सवाल सामने ला दिया है। कलाबुरागी में बिना अनुमति मूर्ति लगाए जाने पर नगर निगम ने उसे हटा दिया था। ऐसे में मैसूर के लिंगदेवरकोप्पलु जंक्शन पर लगाई गई ‘सिद्धारमैया सर्कल’ की नेमप्लेट को लेकर भी आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।

कुल मिलाकर सिद्धारमैया की मूर्ति से शुरू हुआ विवाद अब उनके नाम पर सर्कल बनाए जाने तक पहुंच गया है। कलाबुरागी में बिना आधिकारिक अनुमति लगाई गई मूर्ति हटाए जाने के बाद समर्थकों ने मैसूर-हुंसूर रोड के लिंगदेवरकोप्पलु गांव के जंक्शन को ‘सिद्धारमैया सर्कल’ नाम देकर वहां नेमप्लेट लगा दी है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पहल को लेकर क्या फैसला करता है और यह नाम आधिकारिक रूप से स्वीकार होता है या नेमप्लेट पर भी कार्रवाई की जाती है।

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