कर्नाटक

पावागढ़ में नक्सली गतिविधियों की पुष्टि हुई तो तैनात होगा अतिरिक्त बल डिप्टी सीएम

Kavita2
11 Sept 2026 2:12 PM IST
पावागढ़ में नक्सली गतिविधियों की पुष्टि हुई तो तैनात होगा अतिरिक्त बल डिप्टी सीएम
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कर्नाटक : उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को कहा कि तुमकुरु जिले के पावागढ़ क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों से जुड़ी खबरों की पुष्टि होने पर वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। क्षेत्र में कथित रूप से नक्सली पोस्टर मिलने की सूचना के बाद सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है। गृह मंत्री ने कहा कि तथ्यों की जांच की जा रही है और आवश्यक होने पर एंटी-नक्सल फोर्स को भी वहां भेजा जाएगा।

पावागढ़ में नक्सली गतिविधियों से संबंधित पोस्टर मिलने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए परमेश्वर ने बताया कि उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी मिली है। शुक्रवार को तुमकुरु जिले के दौरे के दौरान वह जिला पुलिस अधीक्षक के साथ इस मामले पर विस्तार से चर्चा करेंगे। बैठक में पोस्टर मिलने के स्थान, उसकी सामग्री, उन्हें लगाने वाले लोगों और इलाके की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की संभावना है।

परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि अभी नक्सली गतिविधियों की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक रिपोर्ट और जांच में ऐसी गतिविधि के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त बल तैनात करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर तुमकुरु क्षेत्र में एंटी-नक्सल फोर्स यानी एएनएफ की टीम को भेजा जा सकता है।

कर्नाटक को नक्सल-मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है, लेकिन सरकार ने एंटी-नक्सल फोर्स को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है। गृह मंत्री के अनुसार, इस बल के लगभग आधे कर्मियों को सांप्रदायिक दंगों और विशेष कानून-व्यवस्था परिस्थितियों को नियंत्रित करने के लिए स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स यानी एसएएफ में बदला गया है। शेष कर्मी एंटी-नक्सल यूनिट के रूप में काम कर रहे हैं।

एंटी-नक्सल यूनिट को बनाए रखने का उद्देश्य किसी भी संभावित गतिविधि पर तेजी से प्रतिक्रिया देना है। राज्य को नक्सल-मुक्त घोषित किए जाने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां इस प्रकार की सूचनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। पोस्टर मिलने जैसी घटनाएं वास्तविक संगठनात्मक गतिविधि, स्थानीय शरारत या भय फैलाने की कोशिश भी हो सकती हैं। इसलिए जांच के बाद ही उनकी प्रकृति स्पष्ट हो पाएगी।

पावागढ़ में कथित पोस्टर किस स्थान पर मिले, उन पर क्या लिखा था और वे कितने पुराने हैं, इन सवालों का जवाब जांच से मिलने की उम्मीद है। अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगे कि पोस्टर स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए थे या उनका संबंध किसी प्रतिबंधित संगठन से है। लिखावट, कागज, छपाई और इस्तेमाल किए गए प्रतीकों की जांच पहचान तक पहुंचने में सहायक हो सकती है।

स्थानीय पुलिस इलाके में हाल की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। आसपास के गांवों, जंगल क्षेत्रों और संपर्क मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा सकती है। पोस्टर मिलने वाले स्थान के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने पर उसे भी देखा जा सकता है। किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन की आवाजाही सामने आने पर जांच को नई दिशा मिल सकती है।

डॉ. परमेश्वर का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नक्सली गतिविधियों से जुड़ी किसी सूचना का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय लोगों में भय पैदा हो सकता है और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि तथ्यों की शीघ्र पुष्टि कर अफवाहों और वास्तविक खतरे के बीच अंतर स्पष्ट किया जाए।

गृह मंत्री ने कहा कि जिला पुलिस अधीक्षक से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय होगी। यदि यह मामला केवल किसी असामाजिक तत्व द्वारा भय फैलाने का पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। यदि किसी संगठित नक्सली गतिविधि के संकेत मिलते हैं तो सुरक्षा व्यवस्था को उसी स्तर पर मजबूत किया जाएगा।

तुमकुरु जिले का पावागढ़ क्षेत्र भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। विस्तृत ग्रामीण क्षेत्र और सीमावर्ती संपर्क मार्गों के कारण यहां सुरक्षा से जुड़ी किसी सूचना का गंभीरता से परीक्षण आवश्यक है। अतिरिक्त बल की तैनाती का निर्णय केवल पोस्टर मिलने के आधार पर नहीं, बल्कि खुफिया जानकारी और स्थानीय स्तर पर जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

एंटी-नक्सल फोर्स विशेष रूप से जंगल और दुर्गम इलाकों में अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित होती है। यदि उसे तुमकुरु लाया जाता है तो स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त रूप से संवेदनशील स्थानों की तलाशी और निगरानी की जा सकती है। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना जुटाने के लिए खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जा सकता है।

गृह मंत्री के अनुसार, बल का एक हिस्सा अब स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स के रूप में सांप्रदायिक दंगों और गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी परिस्थितियों को संभालने के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि सरकार ने पुराने सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह खत्म करने के बजाय वर्तमान जरूरतों के अनुसार उसका पुनर्गठन किया है।

शेष एंटी-नक्सल कर्मियों को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। पावागढ़ की रिपोर्ट सही पाई गई तो इसी उपलब्ध इकाई को क्षेत्र में भेजने की तैयारी की जाएगी। इससे स्थानीय पुलिस को तलाशी, निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में अतिरिक्त सहायता मिलेगी।

सुरक्षा अधिकारियों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि पोस्टर किसी पुराने नक्सली नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने का संकेत हैं या केवल ध्यान आकर्षित करने की कोशिश। ऐसे मामलों में संगठन के नाम का दुरुपयोग कर धमकी देने या व्यक्तिगत विवाद में डर पैदा करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जांच में सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

सरकार स्थानीय लोगों से भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना प्रशासन को देने की अपील कर सकती है। किसी अनजान व्यक्ति की लगातार आवाजाही, जंगल में संदिग्ध बैठक या धमकी भरे पोस्टर दिखाई देने पर तुरंत जानकारी देने से स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलती है। साथ ही लोगों को अपुष्ट जानकारी सोशल मीडिया पर फैलाने से बचने की सलाह दी जाती है।

फिलहाल पावागढ़ में नक्सली गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जिला पुलिस की रिपोर्ट और गृह मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। डॉ. जी. परमेश्वर ने भरोसा दिया है कि सरकार किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए तैयार है और पुष्टि होने पर एंटी-नक्सल फोर्स सहित अतिरिक्त बल की तैनाती में देरी नहीं की जाएगी।

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