कर्नाटक

बेंगलुरु छोड़ते भावुक हुए अभिजीत दीपके, बोले- अजनबी आया था, परिवार लेकर जा रहा हूं

Kavita2
9 Oct 2026 2:13 PM IST
बेंगलुरु छोड़ते भावुक हुए अभिजीत दीपके, बोले- अजनबी आया था, परिवार लेकर जा रहा हूं
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बेंगलुरु। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बेंगलुरु की अपनी यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने कर्नाटक की राजधानी में बिताए दो दिनों के अनुभवों को याद करते हुए स्थानीय लोगों से मिले प्यार, अपनापन और स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया। दीपके ने कहा कि वह बेंगलुरु में एक अजनबी के तौर पर पहुंचे थे, लेकिन अब उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह एक परिवार का हिस्सा बन गए हों। उन्होंने अपनी इस यात्रा को भावनात्मक अनुभव बताते हुए कन्नड़ लोगों की मेहमाननवाजी की सराहना की।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए बेंगलुरु से विदा होने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने लिखा कि पिछले दो दिनों के दौरान उन्हें कन्नड़ लोगों से जो प्यार और दयालुता मिली, उसने उनका दिल जीत लिया है। उन्होंने कविता लंकेश और ईशा लंकेश के प्रति भी विशेष स्नेह व्यक्त किया और उन्हें अपने नए परिवार जैसा बताया।

बेंगलुरु छोड़ते समय भावुक हुए अभिजीत दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी बेंगलुरु यात्रा के अनुभवों को बेहद भावुक शब्दों में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहर से विदा होते समय उनका मन भारी है। यहां बिताए दो दिनों के दौरान लोगों से मिले अपनापन और स्नेह ने उन पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।

दीपके ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मैं भारी मन से बेंगलुरु से जा रहा हूं। पिछले दो दिनों में कन्नड़ लोगों से मुझे जो अपनापन, प्यार और दयालुता मिली है, उसने सचमुच मेरा दिल जीत लिया है।"

उनके इस बयान में बेंगलुरु के लोगों के प्रति आभार और भावनात्मक जुड़ाव दिखाई देता है। उन्होंने अपनी यात्रा को केवल एक शहर में बिताए समय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे नए रिश्तों और आत्मीयता से जुड़ा अनुभव बताया।

कन्नड़ लोगों के प्यार और अपनापन की सराहना

अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में विशेष रूप से कन्नड़ लोगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में उन्हें स्थानीय लोगों से जो स्नेह मिला, वह उनके लिए यादगार बन गया है।

उनके अनुसार, बेंगलुरु में लोगों की दयालुता और अपनापन ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि शहर में बिताया समय उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा।

दीपके ने अपनी पोस्ट में किसी विशेष सार्वजनिक कार्यक्रम या राजनीतिक गतिविधि का विस्तृत उल्लेख नहीं किया। उनका संदेश मुख्य रूप से व्यक्तिगत अनुभव, लोगों के व्यवहार और नए रिश्तों के प्रति आभार व्यक्त करने पर केंद्रित रहा।

कविता लंकेश और ईशा लंकेश को बताया नया परिवार

अभिजीत दीपके ने अपनी भावुक पोस्ट में कविता लंकेश और ईशा लंकेश का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने दोनों के प्रति प्यार और स्नेह व्यक्त करते हुए कहा कि वे उनके लिए नए परिवार की तरह हैं।

उन्होंने लिखा, "कविता लंकेश और ईशा लंकेश को मेरा ढेर सारा प्यार और स्नेह; वे मेरे नए परिवार की तरह हैं।"

दीपके के इस संदेश से स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु यात्रा के दौरान उनके लिए इन दोनों के साथ बना व्यक्तिगत जुड़ाव महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने दोनों के प्रति आभार जताते हुए अपने रिश्ते को पारिवारिक अपनापन से जोड़ा।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कविता लंकेश और ईशा लंकेश के साथ उनकी मुलाकात के स्थान, बातचीत और कार्यक्रमों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

'अजनबी बनकर आया था, परिवार के साथ लौट रहा हूं'

अभिजीत दीपके की पोस्ट का सबसे भावुक हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने बेंगलुरु पहुंचने और वहां से लौटने के अनुभवों के बीच अंतर बताया।

उन्होंने कहा, "मैं यहां एक अजनबी के तौर पर आया था, लेकिन अब मैं एक ऐसे परिवार के साथ लौट रहा हूं जिसके पास मैं बार-बार आता रहूंगा।"

इस बयान के जरिए उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में उन्हें केवल नए परिचित ही नहीं मिले, बल्कि ऐसे लोग मिले जिन्हें वह अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में वह दोबारा बेंगलुरु आना चाहेंगे। उनके मुताबिक, यहां बने रिश्ते उनके लिए इतने महत्वपूर्ण हैं कि वह इन लोगों से बार-बार मिलना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर साझा की अपनी भावनाएं

अभिजीत दीपके ने अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' का सहारा लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बेंगलुरु के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए।

उनकी पोस्ट में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय व्यक्तिगत संबंधों और मानवीय भावनाओं को प्रमुखता दी गई। उन्होंने कन्नड़ लोगों की दयालुता की सराहना करते हुए बताया कि दो दिनों में मिला अपनापन उनके लिए कितना महत्वपूर्ण रहा।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस संदेश में दीपके ने बेंगलुरु के प्रति अपने लगाव को स्पष्ट किया। उन्होंने शहर छोड़ने की उदासी और यहां मिले लोगों के प्रति अपने स्नेह को एक साथ व्यक्त किया।

दो दिनों की यात्रा बनी यादगार

अभिजीत दीपके के मुताबिक, बेंगलुरु में बिताए गए पिछले दो दिन उनके लिए यादगार रहे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के प्यार और आत्मीयता ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी है।

उनके बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि किसी नए शहर में पहुंचने वाला व्यक्ति भी वहां के लोगों से मिले व्यवहार और स्नेह के कारण गहरा जुड़ाव महसूस कर सकता है।

दीपके ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि बेंगलुरु में बने रिश्तों को वह आगे भी बनाए रखना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने बार-बार लौटने की इच्छा जताई।

बेंगलुरु से विदाई के साथ दिया भावुक संदेश

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की बेंगलुरु यात्रा उनके सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में है। उन्होंने दो दिनों के दौरान कन्नड़ लोगों से मिले प्यार और अपनापन के लिए आभार जताया।

कविता लंकेश और ईशा लंकेश को अपने नए परिवार जैसा बताते हुए उन्होंने दोनों के प्रति विशेष स्नेह व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह बेंगलुरु एक अजनबी के रूप में आए थे, लेकिन अब यहां से नए रिश्तों और परिवार जैसी आत्मीयता के साथ लौट रहे हैं।

फिलहाल उनकी इस यात्रा के संबंध में उपलब्ध जानकारी उनके सोशल मीडिया संदेश पर आधारित है। दीपके ने बेंगलुरु से विदा होते हुए स्थानीय लोगों का धन्यवाद किया और भविष्य में दोबारा लौटने की इच्छा व्यक्त की।

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