
बेलगावी। कर्नाटक के बेलगावी दक्षिण से भाजपा विधायक अभय पाटिल ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने मतदाता सूची से अल्पसंख्यक समुदाय के 2,500 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी। पाटिल ने कहा कि उन्होंने किसी समुदाय के मतदाताओं को निशाना नहीं बनाया और चुनाव अधिकारियों से केवल संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों की जांच करने का अनुरोध किया था।
यह विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची में दर्ज नामों को लेकर शुरू हुआ। बी.के. हरिप्रसाद ने आरोप लगाया था कि अभय पाटिल ने चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर करीब 2,500 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की मांग की और ये मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित थे। हरिप्रसाद ने अपने आरोपों के समर्थन में कथित पत्र भी सार्वजनिक किया था और चुनाव आयोग से मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
आरोपों का जवाब देते हुए अभय पाटिल ने कहा कि उनके पत्र का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा कि पत्र में किसी धर्म या समुदाय का नाम नहीं लिखा गया था। पाटिल के मुताबिक SIR के बाद जारी मतदाता सूची के मसौदे की जांच के दौरान बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) ने कुछ संदिग्ध मतदाताओं को लेकर बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के सामने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इन्हीं आपत्तियों की जांच करने की मांग की थी।
पाटिल ने कहा कि उनका अनुरोध सीधे किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए नहीं था। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से कहा था कि जिन नामों पर आपत्तियां आई हैं, उनका सत्यापन किया जाए। यदि जांच में कोई प्रविष्टि फर्जी पाई जाती है तो चुनावी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि हरिप्रसाद ने उनके पत्र की अपनी तरह से व्याख्या की और इसे अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने की मांग के रूप में पेश किया।
भाजपा विधायक के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया में किसी भी मतदाता का नाम केवल आरोप के आधार पर नहीं हटाया जा सकता। BLO को संबंधित मतदाता का फील्ड वेरिफिकेशन करना होता है और इसके बाद ही नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि BLA-2 ने संदिग्ध प्रविष्टियां मिलने पर अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई थीं और इन्हीं शिकायतों की जांच के लिए उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिखा था।
पाटिल ने उदाहरण देते हुए दावा किया कि बेलगावी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के सभी 260 मतदान केंद्रों में कुछ संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आई थीं। उन्होंने एक मकान में करीब 50 मतदाताओं के नाम दर्ज होने का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी प्रविष्टियों की जांच जरूरी है। उनका कहना था कि सत्यापन के बाद यदि मतदाता वास्तविक पाए जाते हैं तो उनके नाम बने रहने चाहिए और फर्जी पाए जाने पर ही नियमों के अनुसार नाम हटाए जाने चाहिए।
इस बीच बेलगावी में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित तौर पर बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला भी सामने आया है। वीरभद्र नगर के एक मतदान केंद्र पर करीब 200 फॉर्म-7 आवेदनों पर BLO से हस्ताक्षर कराने के कथित प्रयास को लेकर विवाद हुआ था। संबंधित BLO ने आवेदनों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। बेलगावी जिला प्रशासन ने कहा कि इन आपत्तियों के आधार पर कोई नाम नहीं हटाया गया और मामले की जांच की जाएगी।
चुनाव अधिकारियों की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि मतदाताओं के नामों की सामूहिक जांच या उन्हें एक साथ हटाने के लिए SIR प्रक्रिया में इस तरह का प्रावधान नहीं है। हालांकि BLA संदिग्ध मतदाताओं को लेकर संबंधित BLO के माध्यम से आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बेलगावी सिटी कॉरपोरेशन कमिश्नर और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर एम. कार्तिक ने पाटिल के पत्र के जवाब में इसी प्रक्रिया का उल्लेख किया।
दूसरी तरफ हरिप्रसाद अपने आरोपों पर कायम हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति की गई, उनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी विधायक को इस तरह मतदाताओं के नाम हटाने की मांग करने का अधिकार कैसे हो सकता है। कांग्रेस ने इस मामले को चुनाव आयोग के सामने उठाने और पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है।
अभय पाटिल ने कहा कि वह चार बार से विधायक हैं और मतदाता सूची से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं से परिचित हैं। उन्होंने दोहराया कि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम सीधे हटाने की मांग नहीं की, बल्कि केवल आपत्तियों की जांच कराने को कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वह चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
पाटिल ने स्थानीय चुनाव अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम जैसी संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आई हैं और इनकी उचित जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि BLA-2 की ओर से दी गई आपत्तियों का सत्यापन करना चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
फिलहाल मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। हरिप्रसाद का आरोप है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया, जबकि पाटिल का कहना है कि उनका पत्र केवल संदिग्ध प्रविष्टियों के सत्यापन के लिए था। चुनाव अधिकारियों के स्तर पर जांच और आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित मतदाता प्रविष्टियों में कोई गड़बड़ी थी या नहीं





