
मंगलुरु। मंगलुरु सिटी पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल ले जाने के लिए 30 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम तैनात की गई है। पुलिस के अनुसार, इन नागरिकों को पश्चिम बंगाल पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई और देश-निकाले की प्रक्रिया के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा। यह कार्रवाई अवैध रूप से भारत में प्रवेश और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में की जा रही है।
पिछले महीने मंगलुरु सिटी पुलिस ने सुरथकल और उरवा थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए मुक्का और कोडिकल स्थित निर्माण स्थलों से 21 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप है कि ये लोग कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर निर्माण स्थलों पर काम कर रहे थे।
निर्माण स्थलों से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, सुरथकल थाना क्षेत्र के मुक्का और उरवा थाना क्षेत्र के कोडिकल में कुछ निर्माण परियोजनाओं पर काम कर रहे लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच के दौरान मामला सामने आया। जांच के बाद पुलिस ने 21 लोगों को हिरासत में लिया।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को इनके बांग्लादेशी नागरिक होने का पता चला। आरोप है कि भारत में काम करने के लिए आवश्यक वैध दस्तावेजों के बजाय इन लोगों ने कथित तौर पर फर्जी कागजात का इस्तेमाल किया था।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इनके भारत में प्रवेश, पहचान और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिसके माध्यम से इन लोगों को मंगलुरु लाए जाने का आरोप है।
तीन लोगों की भी गिरफ्तारी
पुलिस ने 21 बांग्लादेशी नागरिकों के अलावा तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे उत्तर भारतीय राज्यों से आने वाले मजदूरों के साथ बांग्लादेशी नागरिकों को भी मजदूर बताकर मंगलुरु लाते थे।
आरोप है कि इन लोगों को शहर की विभिन्न निर्माण साइटों पर काम दिलाया जाता था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरी व्यवस्था में और कितने लोग शामिल हैं और क्या अन्य निर्माण स्थलों पर भी इसी तरह लोगों को काम दिलाया गया था।
जांचकर्ताओं के सामने अब कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनकी व्यवस्था करने और निर्माण स्थलों तक पहुंचाने से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। पुलिस इन सभी पहलुओं को जांच के दायरे में रखकर आगे बढ़ रही है।
पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में प्रवेश का आरोप
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए 21 बांग्लादेशी नागरिकों पर आरोप है कि वे अपनी गिरफ्तारी से करीब तीन महीने पहले बिना पासपोर्ट और वीजा के अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे।
प्रारंभिक जांच में उनके पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रास्ते भारत में प्रवेश करने की बात सामने आई है। इसके बाद उन्हें अन्य राज्यों से होते हुए कर्नाटक के मंगलुरु तक लाए जाने का आरोप है।
पुलिस अब उनके भारत में प्रवेश से लेकर मंगलुरु पहुंचने तक की पूरी गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। इस दौरान उनके संपर्क में आए लोगों और उन्हें रोजगार दिलाने वालों से भी पूछताछ की जा रही है।
30 पुलिसकर्मियों की टीम तैनात
मंगलुरु पुलिस ने सभी 21 लोगों को पश्चिम बंगाल ले जाने के लिए 30 पुलिसकर्मियों की टीम तैनात की है। टीम सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें पश्चिम बंगाल लेकर जाएगी।
पश्चिम बंगाल पहुंचने के बाद इन लोगों को BSF को सौंपे जाने की योजना है। इसके बाद संबंधित एजेंसियां उनके दस्तावेज, नागरिकता और भारत में प्रवेश से जुड़े मामलों की जांच करेंगी तथा निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देश-निकाले की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की ओर से आवश्यक दस्तावेजों और पहचान की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
निर्माण क्षेत्र में दस्तावेजों की जांच का मुद्दा
मामले ने मंगलुरु के निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के दस्तावेजों की जांच का मुद्दा भी सामने ला दिया है। बड़े शहरों में निर्माण परियोजनाओं पर देश के अलग-अलग हिस्सों से मजदूर काम करने आते हैं। ऐसे में ठेकेदारों और श्रमिक उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि काम पर रखने से पहले मजदूरों की पहचान और दस्तावेजों की उचित जांच की जाए।
पुलिस का आरोप है कि इस मामले में बांग्लादेशी नागरिकों को अन्य मजदूरों के साथ मिलाकर मंगलुरु लाया गया और उन्हें निर्माण स्थलों पर रोजगार दिलाया गया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।
नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश
21 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच केवल उनके खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है। पुलिस उन लोगों की भूमिका भी जांच रही है, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें भारत में प्रवेश कराने, मंगलुरु तक पहुंचाने और रोजगार दिलाने में मदद की।
तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद उनके संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क के जरिए इससे पहले भी अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को मंगलुरु लाया गया था।
फिलहाल 21 बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल ले जाने की तैयारी है। वहां उन्हें BSF को सौंपे जाने के बाद उनकी नागरिकता और भारत में प्रवेश से संबंधित मामलों की आगे जांच होगी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत देश-निकाले की कार्रवाई की जाएगी।
मंगलुरु पुलिस की यह कार्रवाई अवैध प्रवास और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों पर निगरानी बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।





