
बेंगलुरु। कर्नाटक में जारी स्टिंग ऑपरेशन विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता एचडी कुमारस्वामी जब चाहें केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर कर्नाटक की राजनीति में वापस लौट सकते हैं। उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में किस दल की सरकार बनेगी, इसका फैसला राज्य की जनता करेगी। इसके बारे में अभी कोई भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
परमेश्वर ने राज्य में चल रहे कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप होना स्वस्थ राजनीतिक परंपरा नहीं है। जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को अपने बयानों में संयम रखना चाहिए।
कुमारस्वामी की वापसी पर क्या बोले परमेश्वर?
सोमवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जी. परमेश्वर से केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के राज्य की राजनीति में लौटने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया।
इस पर उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी व्यक्ति को सक्रिय होने से रोका नहीं जा सकता।
परमेश्वर ने कहा कि यदि कुमारस्वामी चाहें तो अगले ही दिन केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देकर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह कुमारस्वामी का होगा। किसी अन्य नेता को उनके राजनीतिक भविष्य का रास्ता तय करने का अधिकार नहीं है।
हालांकि, कुमारस्वामी ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
2028 में किसकी सरकार बनेगी, जनता करेगी फैसला
कुमारस्वामी की राजनीतिक वापसी और सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि विधानसभा चुनाव का परिणाम पहले से तय नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में कर्नाटक की सत्ता किसे मिलेगी, इसका निर्णय प्रदेश के मतदाता करेंगे।
उनके अनुसार, राजनीतिक दल अपनी योजनाएं और चुनावी रणनीतियां बना सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय जनता के हाथों में होता है।
परमेश्वर ने चुनावी परिणामों को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी।
स्टिंग ऑपरेशन विवाद पर जताई नाराजगी
कर्नाटक में पिछले कुछ दिनों से कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
इस मामले में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं।
परमेश्वर ने इस पूरे घटनाक्रम को अस्वस्थ राजनीतिक स्थिति बताया।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पहले भी गलतियां और विवाद हुए होंगे, लेकिन वर्तमान विवाद जिस स्तर तक पहुंच गया है, वह उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को अपनी जिम्मेदारी और पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए बयान देने चाहिए।
सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से बिगड़ रहा माहौल
जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य राजनीतिक नेताओं के बीच लगातार आरोप और जवाबी आरोप लगाए जा रहे हैं।
उनके अनुसार, इससे राजनीतिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर नेता लगातार एक-दूसरे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देता रहेगा तो ऐसी स्थिति आखिर कहां जाकर रुकेगी।
परमेश्वर ने सुझाव दिया कि संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक बयानबाजी बढ़ाने के बजाय कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहना अधिक उचित होता है।
सिद्धारमैया से जुड़े कथित वीडियो पर विवाद
कर्नाटक की राजनीति में हालिया विवाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े एक कथित स्टिंग वीडियो के सामने आने के बाद बढ़ा है।
जद(एस) ने वीडियो के पीछे राजनीतिक साजिश होने का आरोप लगाया है।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उनका आरोप है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन का इस्तेमाल राजनीतिक नेताओं की छवि खराब करने और उन्हें दबाव में लाने के लिए किया गया।
हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता, उसके निर्माण और कथित साजिश से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुमारस्वामी ने सरकार पर लगाए आरोप
एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे जिम्मेदार व्यक्तियों को संरक्षण दे रही है।
उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर शिवकुमार ने खुद को कथित स्टिंग ऑपरेशन में फंसाने की कोशिश किए जाने का दावा किया है।
इन परस्पर विरोधी आरोपों के कारण कर्नाटक में राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है।
किसी भी नेता की संलिप्तता को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
गृह विभाग कर रहा आवश्यक कार्रवाई
परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में कानून के अनुसार कदम उठाएगी।
उन्होंने बताया कि गृह विभाग संबंधित घटनाक्रम पर आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।
उनके अनुसार, सरकार इस विषय पर चर्चा करने के बाद आगे का निर्णय लेगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक आरोप पर तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है।
कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार की छवि पर भी उठे सवाल
पत्रकारों ने परमेश्वर से पूछा कि क्या स्टिंग ऑपरेशन विवाद का असर सरकार की छवि पर पड़ रहा है।
इस पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य सदस्य इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
उन्होंने बताया कि सरकार की प्रतिष्ठा बनाए रखने और वास्तविक तथ्यों को जनता के सामने रखने के लिए उचित कदमों पर विचार किया जाएगा।
परमेश्वर ने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले पूरे घटनाक्रम का आकलन करना आवश्यक है।
दलित मुख्यमंत्री की चर्चाओं पर दिया जवाब
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अटकलों पर भी परमेश्वर से सवाल किया गया।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी योजना या प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।
परमेश्वर ने सवाल किया कि यदि इस संबंध में पार्टी नेतृत्व ने उनसे कोई बातचीत नहीं की है तो ऐसी खबरों का आधार क्या है।
उन्होंने बिना ठोस जानकारी के नेतृत्व परिवर्तन से जुड़ी अटकलें लगाने से बचने की सलाह दी।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस संबंध में किसी आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं हुई है।
कर्नाटक की राजनीति में कुमारस्वामी की सक्रियता
पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी इस समय केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
केंद्र में जिम्मेदारी संभालने के बावजूद वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं।
वह राज्य सरकार की नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और विभिन्न राजनीतिक विवादों पर लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं।
हाल के दिनों में उन्होंने सरकारी नौकरियों में नियुक्ति और सेवा अवधि से संबंधित बदलावों का प्रस्ताव भी रखा था।
उन्होंने वर्ष 2028 के चुनाव के संदर्भ में भी अपनी पार्टी की योजनाओं का उल्लेख किया है।
राजनीतिक संयम बरतने की अपील
परमेश्वर का बयान ऐसे समय आया है, जब कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को लेकर कांग्रेस और जद(एस) के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का राज्य की राजनीति में लौटना उनका व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय होगा।
साथ ही उन्होंने सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से बचने और संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी से बयान देने की आवश्यकता जताई।
परमेश्वर के अनुसार, सरकार मामले की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करने के बाद आवश्यक निर्णय लेगी।
फिलहाल कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन की जांच, नेताओं के आरोप और वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।





