
बेलगावी। देश में डिजिटल इंडिया, स्मार्ट गांव और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली, इंटरनेट और सड़कों का विस्तार हो रहा है। लेकिन कर्नाटक के बेलगावी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिले के खानापुर तालुका की गोलीयाली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले गौली वाडा गांव में लगभग 175 लोग आज भी बिजली, मोबाइल नेटवर्क और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। जंगल के किनारे बसे इस गांव के 20 परिवारों को हर दिन कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजारना पड़ रहा है। आजादी के लगभग आठ दशक बीत जाने के बावजूद गांव तक बिजली नहीं पहुंचना स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है।
गौली वाडा एक सुदूर ग्रामीण बस्ती है, जो घने जंगलों के नजदीक स्थित है। यहां रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या बिजली की अनुपलब्धता है। शाम ढलते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है। बिजली नहीं होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के काम करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
गांव में रहने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अधिक परेशानी पैदा करती है। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से घरों के बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के आसपास होने के कारण अंधेरा होने के बाद जंगली जानवरों का डर भी बना रहता है।
स्थानीय निवासी संजय पाटिल ने बताया कि बिजली के अभाव में गांव का जीवन बेहद कठिन हो गया है। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है और अंधेरे में जंगली जानवरों के गांव के आसपास आने का खतरा रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार, रात में सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना भी आसान नहीं है। जरूरी काम होने पर लोगों को अंधेरे में ही बाहर निकलना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में दुर्घटना या अन्य खतरे की आशंका बनी रहती है।
गांव की दूसरी बड़ी समस्या मोबाइल नेटवर्क की अनुपलब्धता है। आज जब देश के अधिकांश हिस्सों में लोग मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े हुए हैं, तब गौली वाडा के लोग सामान्य फोन कॉल करने की सुविधा से भी वंचित हैं।
मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण ग्रामीण अपने रिश्तेदारों और परिचितों से आसानी से संपर्क नहीं कर पाते। किसी आपात स्थिति में सहायता मांगना भी मुश्किल हो जाता है। विशेष रूप से किसी व्यक्ति के अचानक बीमार पड़ने या तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होने पर यह समस्या गंभीर बन सकती है।
गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण लोगों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। बाहरी क्षेत्रों से जुड़ने के लिए ग्रामीणों को खराब रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। बारिश के दौरान रास्तों पर कीचड़ होने से आवाजाही और कठिन हो सकती है।
इस समस्या का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। स्कूली बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है, जबकि बुजुर्गों और बीमार लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचाने में मुश्किलें सामने आती हैं।
सड़क की कमी के कारण किसी मरीज को अस्पताल ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में समय पर उपचार मिलना कठिन हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक अच्छी सड़क उपलब्ध हो जाए, तो उनकी कई समस्याएं कम हो सकती हैं।
बिजली नहीं होने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ता है। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लेकिन गौली वाडा के बच्चों के लिए इन सुविधाओं का लाभ उठाना आसान नहीं है।
शाम के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क की कमी से ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री तक पहुंच भी प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया है। इसके बावजूद अब तक उनकी परेशानियों का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
गांव के निवासी भागू ढाकलू धनगर ने बताया कि ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न अधिकारियों के पास जा चुके हैं। उन्होंने बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन अब तक उनकी अपील पर अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों की ओर से विकास कार्यों को लेकर आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन इन आश्वासनों के बावजूद गांव की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
अब ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर फिर से आवाज उठाई है। हाल ही में गांव के प्रतिनिधियों ने खानापुर तहसीलदार और हुबली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (HESCOM) के खानापुर उपखंड के सहायक कार्यकारी अभियंता को ज्ञापन सौंपा है।
इस ज्ञापन में गांव तक बिजली पहुंचाने के साथ अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल में विट्ठल धनगर, बीरू धनगर, नवलू अवने और इजू अवने सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि लंबे समय से वे बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं और अब प्रशासन को ठोस कदम उठाने चाहिए।
गौली वाडा की स्थिति ग्रामीण विकास के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। बिजली, सड़क और संचार जैसी सुविधाएं आज केवल आराम का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार से जुड़ी आवश्यकताएं बन चुकी हैं।
आजादी के 79 वर्ष बाद भी 175 लोगों का बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं से वंचित रहना चिंताजनक है। अब ग्रामीणों की उम्मीदें स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। देखना होगा कि उनकी मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और गौली वाडा के लोगों को अंधेरे तथा बुनियादी सुविधाओं के अभाव से कब राहत मिलती है।





