
हुबली। सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद कथित तौर पर मारपीट और अपहरण तक पहुंच गया। मामले में पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें तीन नाबालिग भी शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत इंस्टाग्राम पर एक नाबालिग की ओर से की गई पोस्ट और उस पर आए कमेंट से हुई थी। इसके बाद दो गुट आमने-सामने आ गए और कुछ ही दिनों के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में मारपीट तथा अपहरण के आरोप सामने आए।
बताया जा रहा है कि एक नाबालिग ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी। पोस्ट किए जाने के कुछ समय बाद उसके दोस्तों ने उस पर कमेंट करना शुरू कर दिया। सामान्य सोशल मीडिया गतिविधि के तौर पर शुरू हुआ यह मामला उस समय विवाद में बदल गया, जब पोस्ट विरोधी गुट के लोगों की नजर में आया।
आरोप है कि दूसरे गुट के लोगों ने पोस्ट और उस पर किए गए कमेंट को लेकर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पर शुरू हुई तनातनी धीरे-धीरे वास्तविक विवाद में बदल गई। इसके बाद 29 सितंबर को नाबालिग को कथित तौर पर एक होटल में बुलाया गया।
आरोप है कि होटल पहुंचने के बाद दूसरे गुट के लोगों ने नाबालिग के साथ मारपीट की। इस दौरान उसे डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है। बताया गया कि आरोपियों ने इलाके में अपनी मनमानी चलाने की बात कहते हुए धमकी दी। हालांकि पूरे घटनाक्रम में किसने क्या भूमिका निभाई, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
29 सितंबर की घटना के बाद मामला शांत होने के बजाय और गंभीर हो गया। मारपीट से नाराज नाबालिग ने कथित तौर पर बदला लेने की योजना बनाई। इसके बाद 1 अक्टूबर को दूसरे गुट में शामिल एक लड़के का अपहरण किए जाने का आरोप सामने आया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नाबालिग ने उस लड़के को निशाना बनाया, जो उस समूह का हिस्सा था जिस पर पहले उसके साथ मारपीट करने का आरोप है। आरोप है कि लड़के का अपहरण करने के बाद उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उसे हुबली के बाहरी इलाके में स्थित KLE अस्पताल ले जाया गया।
इस तरह इंस्टाग्राम की एक पोस्ट से शुरू हुआ विवाद कुछ ही दिनों में दो गुटों के बीच कथित हिंसा और बदले की कार्रवाई में बदल गया। पहले 29 सितंबर को एक नाबालिग से मारपीट का मामला सामने आया और इसके दो दिन बाद 1 अक्टूबर को दूसरे गुट के लड़के के अपहरण तथा पिटाई का आरोप लगा।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच शुरू की। अब तक कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें तीन नाबालिग बताए जा रहे हैं। नाबालिगों के शामिल होने के कारण मामले में कानूनी प्रक्रिया भी उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाई जाएगी।
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद आखिर इतना कैसे बढ़ गया कि मामला कथित अपहरण और मारपीट तक पहुंच गया। जांच में पोस्ट, उस पर किए गए कमेंट और दोनों पक्षों के बीच पहले से किसी विवाद की स्थिति थी या नहीं, जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी होगा।
घटनाक्रम में 29 सितंबर की घटना अहम मानी जा रही है। इसी दिन नाबालिग को होटल बुलाकर कथित तौर पर पीटा गया था। आरोप के अनुसार, उसे इलाके में दबदबा दिखाने की धमकी भी दी गई। इसी घटना के बाद नाबालिग नाराज हुआ और दो दिन बाद बदला लेने के इरादे से दूसरे गुट के एक सदस्य को कथित तौर पर अगवा कर लिया।
दूसरी घटना 1 अक्टूबर को हुई। आरोप है कि जिस लड़के का अपहरण किया गया, वह पहले नाबालिग के साथ हुई मारपीट में शामिल गुट से जुड़ा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अपहरण के बाद उसकी पिटाई की गई और बाद में उसे हुबली के बाहरी इलाके में KLE अस्पताल ले जाया गया।
पूरे मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इंस्टाग्राम पर की गई पोस्ट और उसके नीचे आए कमेंट ने दो गुटों के बीच तनाव को बढ़ाने का काम किया। ऑनलाइन शुरू हुआ विवाद जब व्यक्तिगत टकराव में बदला तो मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर घटना बन गया।
किशोरों और युवाओं के बीच सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में किसी पोस्ट, कमेंट या ऑनलाइन बहस को लेकर आपसी विवाद को हिंसा में बदलने से रोकना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस मामले में भी शुरुआती विवाद ऑनलाइन था, लेकिन बाद में आरोपों के मुताबिक दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शारीरिक हिंसा का सहारा लिया।
फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। दोनों घटनाओं में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच का हिस्सा हो सकती है। पुलिस के लिए यह पता लगाना भी अहम होगा कि कथित अपहरण किस तरह किया गया और उसके बाद लड़के को अस्पताल तक किन परिस्थितियों में ले जाया गया।
चूंकि हिरासत में लिए गए छह लोगों में तीन नाबालिग हैं, इसलिए मामले में उनकी पहचान और उनसे संबंधित कानूनी प्रक्रिया किशोर न्याय से जुड़े प्रावधानों के तहत की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही अलग-अलग आरोपों में संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि सोशल मीडिया पर होने वाला छोटा विवाद भी समय रहते नहीं सुलझने पर गंभीर रूप ले सकता है। पोस्ट और कमेंट से शुरू हुई तनातनी में पहले कथित मारपीट और धमकी सामने आई, फिर बदले में अपहरण और पिटाई का आरोप लगा।
फिलहाल पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लेकर मामले की जांच आगे बढ़ाई है। 29 सितंबर और 1 अक्टूबर की दोनों घटनाओं को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों गुटों के कौन-कौन से लोग कथित मारपीट, धमकी और अपहरण की घटनाओं में शामिल थे और विवाद को हिंसक रूप देने में किसकी क्या भूमिका रही।





