कर्नाटक

बेंगलुरु में 50 हजार करोड़ खर्च, फिर भी विकास बेहाल

Kavita2
3 Nov 2026 11:34 AM IST
बेंगलुरु में 50 हजार करोड़ खर्च, फिर भी विकास बेहाल
x

बेंगलुरु। देश की आईटी राजधानी और सिलिकॉन सिटी के नाम से मशहूर बेंगलुरु में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बेंगलुरु नवनिर्माण पार्टी (BNP) ने दावा किया है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान शहर में करीब 50 हजार करोड़ रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद सड़कों, जल निकासी व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पार्टी ने बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के अनुबंधों और विकास परियोजनाओं से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण कर यह मुद्दा उठाया है। इस खुलासे के बाद शहर में सरकारी खर्च, विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

BNP के अनुसार, पिछले एक दशक में शहर में लगभग 80 हजार विकास परियोजनाओं पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें सड़क निर्माण, मरम्मत, जल निकासी, नागरिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं। पार्टी का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद बेंगलुरु के नागरिक आज भी टूटी सड़कों, यातायात जाम, जलभराव और खराब ड्रेनेज सिस्टम जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

पार्टी का कहना है कि विकास कार्यों पर खर्च की गई धनराशि और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों के बीच बड़ा अंतर नजर आता है। यही कारण है कि सरकारी खर्च की पारदर्शिता और विकास परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की समीक्षा आवश्यक हो गई है।

BNP ने अपने 'लेक्का बेकू' (Lekka Beku) अभियान के तहत बीबीएमपी के पुराने अनुबंधों और परियोजनाओं से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की पहल की है। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को यह बताना है कि उनके क्षेत्र में किस विकास कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, किस एजेंसी को काम सौंपा गया और संबंधित परियोजना पर कितना खर्च दर्ज किया गया।

BNP के संस्थापक श्रीकांत नरसिम्हन ने सरकारी विभागों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनकी पार्टी सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों को जुटाकर व्यवस्थित कर सकती है, तो सरकार अपने व्यापक संसाधनों के माध्यम से यह जानकारी नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध क्यों नहीं करा सकती?

नरसिम्हन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके टैक्स से प्राप्त राशि कहां और किस उद्देश्य से खर्च की जा रही है। विकास कार्यों की जानकारी केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे आम नागरिकों की पहुंच में भी होना चाहिए।

पार्टी के अनुसार, यदि प्रत्येक वार्ड के विकास कार्यों की जानकारी व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध हो, तो स्थानीय निवासी यह जांच सकेंगे कि उनके क्षेत्र में घोषित परियोजनाएं वास्तव में पूरी हुई हैं या नहीं। इससे अधूरे कार्यों, खराब गुणवत्ता और अनावश्यक खर्च को लेकर सवाल उठाने में भी मदद मिलेगी।

बेंगलुरु देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले महानगरों में शामिल है। आईटी कंपनियों, स्टार्टअप और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण शहर का आर्थिक महत्व लगातार बढ़ा है। लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के मुकाबले बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

विशेष रूप से मानसून के दौरान कई इलाकों में जलभराव और यातायात बाधित होने की समस्या सामने आती रही है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों की खराब स्थिति भी लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल है। ऐसी परिस्थितियों में विकास कार्यों पर हुए खर्च की प्रभावशीलता का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

BNP का आरोप है कि नागरिकों को कई बार यह भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि उनके क्षेत्र की सड़क का निर्माण कब हुआ था, उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है और मरम्मत के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई थी।

हालांकि, 50 हजार करोड़ रुपये के खर्च और विकास कार्यों के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने का दावा फिलहाल BNP के विश्लेषण पर आधारित है। इस आंकड़े से अपने आप किसी घोटाले या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए संबंधित परियोजनाओं के भुगतान, कार्य पूर्ण होने के प्रमाणपत्र, गुणवत्ता परीक्षण और स्वतंत्र ऑडिट का अध्ययन आवश्यक होगा।

यह पहली बार नहीं है जब BNP ने बीबीएमपी के विकास कार्यों में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया हो। पार्टी पहले भी सूचना के अधिकार के माध्यम से सरकारी खर्च का विवरण जुटाने और उसे नागरिकों के सामने रखने की पहल कर चुकी है। उसके पुराने अभियानों में विभिन्न वार्डों के विकास कार्यों तथा ठेकेदारों को दिए गए अनुबंधों का विश्लेषण भी शामिल रहा है।

पार्टी का मानना है कि विकास योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक होने से स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ाई जा सकती है। नागरिक अपने वार्ड में किए गए कार्यों की तुलना उपलब्ध दस्तावेजों से कर सकेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग सकेंगे।

शहर की नागरिक समस्याओं को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। विकास परियोजनाओं की सफलता केवल स्वीकृत बजट या जारी किए गए अनुबंधों से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके स्थायी परिणामों से आंकी जानी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, तेजी से बढ़ते महानगरों में सड़क, नालियों और जल निकासी से जुड़ी परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। यदि विभिन्न विभागों के कार्यों में तालमेल नहीं हो, तो बार-बार सड़क खोदने, मरम्मत कराने और निर्माण कार्य दोहराने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

BNP की इस पहल ने बेंगलुरु में एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया है कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी नागरिक सुविधाओं में सुधार का आकलन किस आधार पर किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित सरकारी विभाग पार्टी के विश्लेषण पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या विकास कार्यों से जुड़े आंकड़ों को अधिक पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने की दिशा में कोई कदम उठाया जाता है।

Next Story