
कर्नाटक। ‘वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन’ के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई ने शनिवार को घोषणा की कि उत्तरी कर्नाटक के सभी जिलों में 50-बिस्तर क्षमता वाले अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इन अस्पतालों में लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि मिशन का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, ताकि आर्थिक स्थिति इलाज में बाधा न बने।
मिशन की ओर से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहले से कई पहल संचालित की जा रही हैं। संस्था ने पिछड़े और वंचित वर्गों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिराहट्टी तालुक के मज्जीगुड्डा गांव में एक मुफ्त स्कूल भी शुरू किया है। संस्था का कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में समान अवसर उपलब्ध कराना उसके सामाजिक सेवा कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा है।
चिक्कबल्लापुर में स्थित और सद्गुरु मधुसूदन साई की देखरेख में संचालित ‘वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन’ वर्तमान में कई स्कूलों और अस्पतालों का संचालन कर रहा है। मिशन की विभिन्न परियोजनाओं के जरिए ग्रामीण और जरूरतमंद आबादी तक शिक्षा और चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सद्गुरु मधुसूदन साई ने उत्तरी कर्नाटक में अस्पतालों के विस्तार की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र के सभी जिलों में 50-बिस्तर वाले अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। इन अस्पतालों में मरीजों को इलाज की सुविधा बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराने की योजना है। इससे ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च उठाने में कठिनाई होती है।
उत्तरी कर्नाटक के कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। कई लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर अस्पताल और प्रशिक्षित डॉक्टर उपलब्ध होने से मरीजों को अपने जिले के आसपास ही चिकित्सा सुविधा मिल सकती है।
मिशन पहले से ही चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़कर काम कर रहा है। चिक्कबल्लापुर जिले में संस्था द्वारा ‘श्री मधुसूदन साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च’ संचालित किया जा रहा है। यहां मेडिकल शिक्षा के साथ अस्पताल सेवाओं पर भी ध्यान दिया जाता है।
संस्थान से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए समाजसेवा को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को मिशन के अस्पतालों में एक निर्धारित अवधि के लिए ‘सेवा वैद्य’ यानी वॉलंटियर डॉक्टर के रूप में सेवा देनी होती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नए डॉक्टरों को चिकित्सा सेवा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना है।
मिशन के अनुसार, कई डॉक्टर अपनी मेडिकल ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद भी अस्पतालों और समाजसेवा से जुड़े कार्यों में योगदान जारी रखते हैं। इससे संस्था के अस्पतालों को प्रशिक्षित चिकित्सकों की सेवाएं मिलती हैं और जरूरतमंद मरीजों को भी लाभ पहुंचता है।
‘सेवा वैद्य’ मॉडल के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में सेवा की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टरों को केवल पेशे के तौर पर चिकित्सा कार्य करने के बजाय समाज के कमजोर वर्गों की मदद करने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। मिशन की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख उद्देश्य इलाज को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।
मिशन की ओर से संचालित शिक्षा परियोजनाओं में भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शिराहट्टी तालुक के मज्जीगुड्डा गांव में शुरू किया गया मुफ्त स्कूल इसी पहल का हिस्सा है। संस्था का लक्ष्य ऐसे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है, जिनके परिवार आर्थिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते।
स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर मिशन की इन पहलों में ‘वन वर्ल्ड वन फैमिली’ की अवधारणा को केंद्र में रखा गया है। संस्था का मानना है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं तक समान पहुंच मिलनी चाहिए। इसी सोच के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थानों और सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उत्तरी कर्नाटक के सभी जिलों में 50-बिस्तर वाले अस्पताल स्थापित करने की घोषणा को इसी व्यापक योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित रूप से लागू होती है, तो ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को स्थानीय स्तर पर मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलने का अवसर बढ़ेगा।
इन अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के साथ डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। मिशन द्वारा मेडिकल शिक्षा और अस्पतालों को जोड़ने का मौजूदा मॉडल इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है। मेडिकल संस्थान से निकलने वाले डॉक्टरों को सेवा से जोड़ने से अस्पतालों को चिकित्सकीय मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
शनिवार को की गई घोषणा के बाद अब इन अस्पतालों की स्थापना, स्थान, निर्माण और संचालन से जुड़ी विस्तृत योजना पर नजर रहेगी। अस्पतालों की सेवाओं को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराना भी अहम होगा।
सद्गुरु मधुसूदन साई के नेतृत्व में मिशन द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का फोकस जरूरतमंद वर्गों तक सेवाएं पहुंचाने पर है। उत्तरी कर्नाटक के सभी जिलों में मुफ्त अस्पताल स्थापित करने की योजना इस प्रयास को और व्यापक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इन अस्पतालों की स्थापना और संचालन से जुड़ी जानकारी सामने आने के साथ यह स्पष्ट होगा कि योजना को किस चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।





