
बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा है कि राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की सूची में 25 और तालुकों को शामिल किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सूखे की स्थिति का आकलन करने का दूसरा चरण जल्द पूरा होने वाला है, जिसके बाद नए क्षेत्रों को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डॉ. परमेश्वर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य में पहले ही 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन किया जा रहा है।
101 तालुक पहले ही घोषित हो चुके हैं सूखा प्रभावित
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कर्नाटक में सूखे की गंभीरता को देखते हुए अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में सरकार की ओर से राहत और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं है, इसलिए सभी इलाकों का अलग-अलग स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है। सरकार वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही नए क्षेत्रों को सूची में शामिल करेगी।
25 तालुकों ने पूरी की जरूरी शर्तें
डॉ. परमेश्वर के अनुसार, 25 और तालुक ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित किए जाने के लिए जरूरी मानदंडों को पूरा किया है।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्द ही इन्हें सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
हालांकि, अंतिम निर्णय विस्तृत रिपोर्ट और तकनीकी आकलन के आधार पर लिया जाएगा।
सैटेलाइट और तकनीकी अध्ययन से हो रहा मूल्यांकन
राजस्व मंत्री ने बताया कि सूखे की स्थिति का आकलन पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की मदद से किया जा रहा है।
इसके लिए सैटेलाइट इमेज, जमीनी निरीक्षण और तकनीकी अध्ययनों का सहारा लिया जा रहा है। इन माध्यमों से बारिश की स्थिति, फसल की हालत, जल स्रोतों की उपलब्धता और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सही आंकड़ों के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करना है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद इलाकों तक राहत पहुंचाई जा सके।
किसानों पर सूखे का असर
कर्नाटक में सूखे की स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। बारिश की कमी के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राहत योजनाएं लागू करने की तैयारी कर रही है। इसमें पेयजल व्यवस्था, कृषि सहायता और अन्य जरूरी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा सकता है।
दूसरे चरण का आकलन जल्द होगा पूरा
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की स्थिति का दूसरा चरण का आकलन जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद उन तालुकों की सूची तैयार की जाएगी, जिन्हें अतिरिक्त रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं करेगी और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
राहत कार्यों की तैयारी
सूखा प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासन ने राहत कार्यों की तैयारी भी तेज कर दी है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट और कृषि से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
वैज्ञानिक तरीके से निर्णय ले रही सरकार
डॉ. परमेश्वर ने कहा कि सूखा घोषित करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक मानकों पर आधारित है। केवल बारिश की कमी के आधार पर फैसला नहीं लिया जाता, बल्कि कई अन्य परिस्थितियों का भी मूल्यांकन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सैटेलाइट डेटा, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और मौके के निरीक्षण के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
किसानों और ग्रामीणों को राहत की उम्मीद
यदि 25 नए तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाता है तो वहां के किसानों और ग्रामीणों को सरकार की राहत योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
सरकार का कहना है कि सूखे से प्रभावित लोगों को सहायता पहुंचाना उसकी प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में दूसरे चरण के आकलन के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल कर्नाटक सरकार सूखे की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। 101 तालुकों के बाद अब 25 और तालुकों को सूची में शामिल करने की तैयारी से संकेत मिलता है कि राज्य में सूखे का प्रभाव कई नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।





