कर्नाटक

कर्नाटक के 177 तालुक सूखाग्रस्त घोषित

Kavita2
23 Sept 2026 12:21 PM IST
कर्नाटक के 177 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
x

बेंगलुरु। कर्नाटक में बारिश की भारी कमी के बीच सूखे का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को विधान परिषद में बताया कि राज्य के 177 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। बाकी क्षेत्रों में जमीनी आकलन जारी है और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले कुछ और तालुक सूची में शामिल किए जा सकते हैं। इसके बाद सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या करीब 200 तक पहुंच सकती है।

राज्य में सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। परमेश्वर ने मौजूदा स्थिति को 'सुपर अल नीनो से प्रभावित सूखा' बताते हुए दावा किया कि राज्य में बारिश की कमी पिछले 150 वर्षों की सबसे गंभीर स्थितियों में से एक है।

53 और तालुक सूची में शामिल

राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से सूखाग्रस्त तालुकों की पहचान की है। पहले चरण में 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। बाद में 23 और तालुक जोड़े गए। अब 53 अतिरिक्त तालुकों को शामिल करने के बाद कुल संख्या बढ़कर 177 हो गई है।

सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। बारिश की कमी, फसलों को हुए नुकसान और जमीनी परिस्थितियों के आधार पर दूसरे क्षेत्रों का भी आकलन किया जा रहा है।

परमेश्वर ने कहा कि आने वाले चरण में 20 से 30 और तालुक सूखाग्रस्त सूची में शामिल हो सकते हैं। इससे कुल संख्या करीब 200 तक पहुंच सकती है।

सामान्य से काफी कम हुई बारिश

परमेश्वर ने विधान परिषद में बताया कि कर्नाटक में सामान्य तौर पर करीब 852 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 642 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने राज्य में औसत बारिश की कमी 36 प्रतिशत बताई।

क्षेत्रवार आंकड़ों में भी बड़ा अंतर सामने आया है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश की कमी 46 प्रतिशत और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 44 प्रतिशत बताई गई। मलनाड क्षेत्र में 38 प्रतिशत और तटीय क्षेत्र में 28 प्रतिशत की कमी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई।

सरकार का कहना है कि बारिश में इस कमी का सीधा असर खेती और किसानों की आजीविका पर पड़ा है।

फसलों को बड़े नुकसान का दावा

उपमुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि बारिश की कमी के कारण राज्य में फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक फसल नुकसान का अनुमान करीब 82 प्रतिशत तक है।

कई क्षेत्रों में किसानों ने शुरुआती बारिश के बाद बुआई की, लेकिन बाद में बारिश रुकने से अंकुरित फसलें सूख गईं। बारिश लौटने के बाद कुछ किसानों ने दोबारा बुआई की, लेकिन बाद में फिर पर्याप्त पानी नहीं मिलने से दूसरी फसल भी प्रभावित हुई।

ऐसी स्थिति में किसानों को बीज, खाद, मजदूरी और दूसरी कृषि लागत पर दोबारा खर्च करना पड़ा, जिससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

'सुपर अल नीनो' का किया जिक्र

सूखे पर चर्चा के दौरान परमेश्वर ने मौजूदा हालात को 'सुपर अल नीनो से प्रभावित सूखा' बताया। यह राज्य सरकार की ओर से मौजूदा मौसम की स्थिति का वर्णन है। उन्होंने इसे 1876 के गंभीर सूखे से तुलना करते हुए कहा कि बारिश की मौजूदा कमी असाधारण है।

हालांकि मौसम और जलवायु घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक निर्धारण संबंधित मौसम और जलवायु एजेंसियों के विश्लेषण पर निर्भर करता है।

केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर घोषणा

राज्य सरकार का कहना है कि किसी तालुक को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता। इसके लिए केंद्र सरकार के 2020 के सूखा घोषणा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

इन मानकों में बारिश की कमी, फसलों की स्थिति और जमीनी सत्यापन जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है। परमेश्वर ने कहा कि इसी प्रक्रिया के तहत तालुकों को अलग-अलग चरणों में सूची में शामिल किया जा रहा है।

सरकार का तर्क है कि निर्धारित मानकों के बिना सभी तालुकों को एक साथ सूखाग्रस्त घोषित करने पर केंद्र से राहत प्राप्त करने की प्रक्रिया में समस्या आ सकती है।

विधान परिषद में सरकार-विपक्ष आमने-सामने

सूखे की स्थिति पर चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने भी सूखे की स्थिति को गंभीर बताया।

विपक्ष की ओर से किसानों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और सूखा राहत उपायों को तेज करने की मांग उठाई गई। सरकार ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों का आकलन और राहत संबंधी कदम उठाए जा रहे हैं।

किसानों के लिए राहत की मांग

JDS के विधान परिषद सदस्य टी.ए. शरवण ने भी सरकार से किसानों के लिए तत्काल राहत उपाय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सूखे का सीधा असर किसानों के जीवन और कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के सामने सहायता का मुद्दा उठाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग भी की।

सूखे के कारण किसानों के सामने फसल नुकसान के साथ पशुओं के लिए चारा और आने वाली फसलों की तैयारी जैसी चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं।

केंद्र से मांगी गई राहत

परमेश्वर ने सदन को बताया कि शुरुआती 101 सूखाग्रस्त तालुकों में नुकसान का अनुमान करीब 18 हजार करोड़ रुपये लगाया गया था और राज्य सरकार ने केंद्र को लगभग 3,500 करोड़ रुपये की राहत की मांग वाला पहला ज्ञापन भेजा है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने पेयजल संबंधी जरूरतों के लिए प्रत्येक जिले को पांच करोड़ रुपये और प्रत्येक विधायक क्षेत्र को एक करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी दी।

सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता प्राप्त करने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के जरिए प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का प्रस्ताव भी रखा है।

आगे और बढ़ सकती है सूची

कर्नाटक में सूखे का अंतिम दायरा अभी तय नहीं हुआ है। सरकार बाकी तालुकों में बारिश, फसल नुकसान और जमीनी परिस्थितियों का आकलन जारी रखे हुए है।

अभी 177 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। अगले चरण की जांच में अन्य तालुक निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं तो यह संख्या करीब 200 या उससे अधिक भी हो सकती है।

राज्य के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने, पेयजल व्यवस्था बनाए रखने और कृषि नुकसान का विस्तृत आकलन करने की है। सूखे पर विशेष सत्र में जारी बहस के बीच सरकार और विपक्ष दोनों की नजर अब राहत पैकेज और आगे होने वाले जमीनी आकलन पर है।

Next Story