
Karnataka कर्नाटक: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार पर जल जीवन मिशन के तहत राज्य का बकाया फंड जारी न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से अधिक समय से केंद्र से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने मिशन को जारी रखते हुए 17,554 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्नाटक ने अब तक इस योजना पर कुल 17,554.63 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसमें केंद्र सरकार के अनुमानित हिस्से के रूप में 8,880.71 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिन्हें राज्य ने काम को बाधित न होने देने के लिए अपने संसाधनों से वहन किया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता के साथ परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक फंड जारी करने में देरी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजटीय प्रावधान होने के बावजूद दो वर्षों से अधिक समय से राशि जारी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित और स्थायी पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बताया कि राज्य ने बिना किसी समझौते के गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।
यह बयान उस समय आया जब सिद्धारमैया ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जल जीवन मिशन 2.0 के लिए सहमति पत्र पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने केंद्र के साथ सहयोग जारी रखने और सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का अधिकार है और राज्य सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि लंबित फंड को जल्द से जल्द जारी किया जाए ताकि परियोजनाओं को और गति दी जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय समन्वय से जुड़ा एक अहम मामला बन गया है, जो आने वाले समय में और चर्चा का विषय बन सकता है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि फंड की कमी के बावजूद जल जीवन मिशन को किसी भी स्तर पर रुकने नहीं दिया गया है और काम लगातार जारी है।





