
बेंगलुरु। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंसे कर्नाटक के 17 ट्रेकर्स आखिरकार सुरक्षित बेंगलुरु लौट आए हैं। मंगलवार देर रात काठमांडू से निर्धारित उड़ान के जरिए वे बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (KIA) पहुंचे। एयरपोर्ट पर परिवार के सदस्यों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। कई दिनों तक मुश्किल हालात का सामना करने के बाद घर पहुंचने पर ट्रेकर्स ने राहत की सांस ली और आपदा के दौरान बिताए डरावने पलों को याद किया।
जानकारी के मुताबिक, नेपाल गए इस ट्रेकिंग समूह में कुल 23 लोग शामिल थे। इनमें से 17 कन्नड़ ट्रेकर्स नेपाल एयरलाइंस की फ्लाइट RA 225 से बेंगलुरु पहुंचे। समूह के दो अन्य सदस्यों के बुधवार को शहर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक बिगड़े मौसम, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण यह समूह मुश्किल में फंस गया था। संपर्क और आवागमन प्रभावित होने के कारण उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ गई थी।
एयरपोर्ट पर परिवारों ने किया स्वागत
केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जैसे ही ट्रेकर्स पहुंचे, वहां इंतजार कर रहे उनके परिजनों में खुशी और राहत दिखाई दी। लंबे समय तक अनिश्चितता में रहने के बाद परिवार के सदस्यों के लिए उनका सुरक्षित लौटना बड़ी राहत लेकर आया।
ट्रेकर्स ने भी घर पहुंचने के बाद राहत महसूस की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आपदा के दौरान हालात तेजी से बदले और कई जगहों पर आवागमन मुश्किल हो गया था। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी।
नेपाल में फंसे होने के दौरान समूह के सदस्यों को अपनी सुरक्षा के साथ सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की चिंता बनी रही।
23 लोगों का था ट्रेकिंग ग्रुप
नेपाल की यात्रा पर गए समूह में कुल 23 लोग शामिल थे। समूह के अधिकतर सदस्यों को ट्रेकिंग का पहले से अनुभव नहीं था। उन्होंने अपनी यात्रा के लिए नेपाल में 'मून हिमालय एडवेंचर' नाम की ट्रेकिंग कंपनी की सेवाएं ली थीं।
ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से यात्रा की योजना बनाई गई थी, लेकिन क्षेत्र में अचानक आई प्राकृतिक आपदा के कारण परिस्थितियां बदल गईं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन ने कई रास्तों को प्रभावित किया, जिससे पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए सुरक्षित वापसी चुनौती बन गई।
समूह के 17 सदस्यों के बेंगलुरु पहुंचने के बाद उनके परिवारों की चिंता काफी हद तक दूर हुई है। बाकी सदस्यों की सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया पर भी नजर रखी जा रही है।
बाढ़ और भूस्खलन से बिगड़े हालात
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास भी कई स्थानों पर यातायात और संचार व्यवस्था प्रभावित हुई।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होने से पर्यटकों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। कई बार सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मौसम लगातार खराब रहे तो राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।
कर्नाटक के ट्रेकर्स भी इसी तरह की परिस्थितियों के बीच फंस गए थे। परिवारों को उनकी सुरक्षा की चिंता थी और वे लगातार उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे।
काठमांडू पहुंचना था बड़ी चुनौती
प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर काठमांडू तक पहुंचना ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण चरण था। काठमांडू पहुंचने के बाद उनकी भारत वापसी की राह आसान हुई और निर्धारित विमान से उन्हें बेंगलुरु लाया गया।
मंगलवार देर रात नेपाल एयरलाइंस की फ्लाइट RA 225 के बेंगलुरु पहुंचने के बाद 17 सदस्यों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हुई।
एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने भी उनकी वापसी से संबंधित व्यवस्थाओं में सहयोग किया। परिजनों ने अपने लोगों को सुरक्षित देखकर राहत महसूस की।
घर लौटकर याद किए मुश्किल पल
बेंगलुरु लौटे ट्रेकर्स ने नेपाल में बिताए मुश्किल समय को याद किया। प्राकृतिक आपदा के बीच अचानक रास्ते बंद होना और आगे की यात्रा को लेकर अनिश्चितता उनके लिए डरावना अनुभव रहा।
समूह में अधिकतर लोग अनुभवी ट्रेकर्स नहीं थे। ऐसे में कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और खराब मौसम के बीच फंस जाना उनके लिए और चुनौतीपूर्ण रहा।
घर पहुंचने के बाद उन्होंने सुरक्षित वापसी पर संतोष जताया। परिवारों के लिए भी यह भावुक क्षण रहा क्योंकि वे कई दिनों से अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे थे।
दो और सदस्यों के लौटने की उम्मीद
23 सदस्यीय समूह में शामिल दो और ट्रेकर्स के बुधवार को बेंगलुरु पहुंचने की संभावना है। उनकी यात्रा की व्यवस्था और सुरक्षित वापसी को लेकर संबंधित पक्षों की नजर बनी हुई है।
समूह के बाकी सदस्यों की स्थिति और वापसी के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। प्राथमिकता सभी यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की है।
17 ट्रेकर्स की वापसी के बाद यह उम्मीद मजबूत हुई है कि अन्य सदस्य भी जल्द सुरक्षित घर लौट सकेंगे।
अनुभवहीन ट्रेकर्स के लिए सबक
इस घटना ने पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा और तैयारी के महत्व को भी रेखांकित किया है। खासकर ऐसे लोगों के लिए जो पहली बार ट्रेकिंग पर जा रहे हों, मौसम की जानकारी, सुरक्षित मार्ग, स्थानीय प्रशासन की सलाह और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बेहद जरूरी होती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, अचानक बाढ़ और रास्ते बंद होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ट्रेकिंग से पहले मौसम की स्थिति और स्थानीय चेतावनियों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।
ट्रेकिंग एजेंसी चुनते समय भी उसके अनुभव, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता की जांच करना यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकता है।
परिवारों के लिए राहत की खबर
नेपाल में प्राकृतिक आपदा की खबरों के बीच कर्नाटक के ट्रेकर्स के फंसे होने की जानकारी ने उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में 17 लोगों की सुरक्षित वापसी उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
एयरपोर्ट पर ट्रेकर्स और उनके परिवारों की मुलाकात के दौरान भावुक माहौल रहा। सुरक्षित घर लौटे लोगों ने भी राहत महसूस की कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे वापस अपने परिवारों के बीच पहुंच गए।
फिलहाल 23 सदस्यीय समूह के अन्य सदस्यों की वापसी पर नजर है। दो और सदस्यों के बुधवार को बेंगलुरु पहुंचने की संभावना है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंसे इन ट्रेकर्स की सुरक्षित वापसी ने उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है।





