
मंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने तटीय क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं और पहलों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। शुक्रवार को मंगलुरु में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की पहली बैठक में पर्यटन, बुनियादी ढांचा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, सड़क संपर्क और शहरी विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की।
मंत्रिमंडल के फैसलों का मुख्य फोकस दक्षिण कन्नड़, उडुपी और उत्तर कन्नड़ जिलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और तटीय कर्नाटक को पर्यटन तथा ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
हालांकि पैकेज की कुल राशि को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। एक रिपोर्ट में तटीय कर्नाटक के लिए 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का विकास पैकेज बताया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में शुक्रवार की पूरी कैबिनेट बैठक में मंजूर परियोजनाओं और प्रस्तावों की संयुक्त राशि करीब 32,611 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें करीब 16 हजार करोड़ रुपये ग्रामीण विकास और लगभग इतनी ही राशि मंगलुरु, उडुपी तथा व्यापक तटीय क्षेत्र की योजनाओं से जुड़ी बताई गई है।
पर्यटन मंत्रिमंडल के फैसलों के केंद्र में रहा। सरकार ने ‘कोस्टल-मलेनाड कर्नाटक टूरिज्म पॉलिसी-2026’ को मंजूरी दी है। नीति के तहत तटीय और मलेनाड क्षेत्र में नौ पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना है। पर्यटन परियोजनाओं को इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में मान्यता देने का भी फैसला किया गया है, जिससे निवेशकों को ऋण चुकाने के लिए लंबी अवधि सहित अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में पर्यटन के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के लिए कोस्टल रेगुलेशन जोन यानी CRZ से संबंधित नियमों में आवश्यक बदलाव के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य निजी निवेश को आकर्षित करने के साथ समुद्र तट, द्वीप और अन्य प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है।
कैबिनेट ने उत्तर कन्नड़ जिले के कारवार, भटकल और अंकोला तालुकों में सात द्वीपों को पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने के लिए करीब 307.71 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। उडुपी जिले में अयाबा, दरिया और मालपे द्वीपों के इको-टूरिज्म विकास के लिए लगभग 279.03 करोड़ रुपये की योजना भी शामिल है। इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल पर विकसित करने की योजना है।
समुद्री परिवहन के क्षेत्र में भी बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। सरकार ने 12 तटीय केंद्रों को जोड़ने वाली करीब 343 किलोमीटर लंबी कोस्टल फेरी प्रणाली को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्ग से संपर्क बढ़ाना और पर्यटन के साथ स्थानीय आवागमन को नया विकल्प उपलब्ध कराना है।
उत्तर कन्नड़ में मल्टीपर्पज हार्बर और शिपयार्ड विकसित करने की योजना को भी मंजूरी मिली है। करीब 6,925 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को PPP मॉडल पर आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा भारतीय नौसेना की मंजूरी के अधीन कारवार एयरपोर्ट के विस्तार की योजना को भी हरी झंडी दी गई है, जिससे भविष्य में नागरिक उड़ानों के संचालन का रास्ता खुल सकता है।
मत्स्य पालन और ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए मंगलुरु के कॉलेज ऑफ फिशरीज को ‘फिशरीज एंड ब्लू इकोनॉमी यूनिवर्सिटी’ के रूप में अपग्रेड करने का फैसला किया गया है। यहां विद्यार्थियों की क्षमता 60 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 11.5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और परिवर्तन प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
इसके साथ ही उडुपी जिले में ‘कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन बायोटेक्नोलॉजी एंड ब्लू इकोनॉमी’ स्थापित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और बायोटेक्नोलॉजी विभाग को इसका विस्तृत खाका तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र को भी पैकेज में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मंगलुरु में किदवई कैंसर संस्थान और जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज की इकाइयां स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। वेनलॉक अस्पताल में 200 अतिरिक्त बेड जोड़ने की योजना है। पुत्तूर मेडिकल कॉलेज में भवन, छात्रावास और क्वार्टर सहित बुनियादी ढांचे के लिए 425 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
मंगलुरु शहर की सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 400 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा कुंदापुर, उडुपी और पुत्तूर में लंबित जलापूर्ति कार्यों के लिए 167.11 करोड़ रुपये तथा विटला शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए 94 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है।
गुरुपुरा नदी के विकास के लिए करीब 125.43 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। मंगलुरु के लाइटहाउस क्षेत्र में पर्यटन और आतिथ्य सुविधाएं विकसित करने के लिए लगभग 60.34 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी गई है। कोडिकल, थन्नीरभावी और त्रासी जैसे पर्यटन स्थलों के विकास पर करीब 238 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
मंगलुरु में जल आधारित शहरी परिवहन की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुपुरा और नेत्रावती नदियों पर प्रस्तावित ‘मंगलुरु वाटर मेट्रो’ की व्यवहार्यता का अध्ययन करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। प्रस्तावित परियोजना की तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता का अध्ययन होने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
विशेष कैबिनेट बैठक में तटीय क्षेत्र की भाषा और संस्कृति से जुड़ा फैसला भी लिया गया। तुलु को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने को मंजूरी दी गई है। यह तटीय क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांगों में शामिल था।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक से पहले भी कहा था कि तटीय और मलेनाड क्षेत्रों से मानव संसाधन के पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। सरकार का कहना है कि पर्यटन, मत्स्य पालन, समुद्री अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में निवेश के जरिए क्षेत्र की आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
मंगलुरु में पहली बार हुई इस कैबिनेट बैठक के फैसलों से सरकार ने तटीय कर्नाटक के लिए बड़े विकास रोडमैप का संकेत दिया है। हालांकि कई परियोजनाएं अभी सैद्धांतिक मंजूरी, व्यवहार्यता अध्ययन या PPP प्रक्रिया के स्तर पर हैं। इसलिए इनके निर्माण की समयसीमा और अंतिम लागत संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिक स्पष्ट होगी।





