
बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को केंद्रीय जांच एजेंसियों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों के दबाव और कथित उत्पीड़न के कारण करीब 12 लाख व्यापारी देश छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से कर चुकाने वाले कारोबारियों को मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वित्तीय अनियमितताओं में शामिल लोगों से अपेक्षित तरीके से पूछताछ नहीं हो रही है।
शिवकुमार इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने देश में कारोबारी माहौल, कर व्यवस्था और सरकारी राजस्व से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और वे बिना डर के अपना व्यवसाय चला सकें।
ईमानदार करदाताओं को परेशान करने का आरोप
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि जो व्यापारी और कारोबारी ईमानदारी से अपना टैक्स भरते हैं, उन्हें कई स्तरों पर मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का दबाव इतना अधिक है कि कई कारोबारी देश छोड़ने का फैसला कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि IT विभाग, ED और CBI की ओर से आने वाले दबाव के कारण कारोबारी समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। उनके अनुसार, कारोबारियों को यह भरोसा होना चाहिए कि यदि वे कानून का पालन कर रहे हैं तो उन्हें बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा।
हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए 12 लाख कारोबारियों के देश छोड़ने के आंकड़े का कोई स्रोत उन्होंने अपने संबोधन में नहीं बताया। इसलिए यह आंकड़ा स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की आवश्यकता रखता है। शिवकुमार का बयान ऐसे समय आया है जब देश में टैक्स अनुपालन, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कारोबारी सुगमता को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
कारोबार के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर जोर
शिवकुमार ने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी केवल टैक्स वसूलना नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल बनाना भी है जिसमें कारोबार आसानी से चल सके। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को लगातार जांच और अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दबाव में रखने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार और वित्तीय संस्थानों से कारोबारी समुदाय के साथ विश्वास का माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ईमानदार करदाताओं को सम्मान और सहयोग मिलना चाहिए, जबकि जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और टैक्स व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और कानून का पालन सुनिश्चित करना होना चाहिए। यदि कारोबारी वर्ग को लगातार भय और दबाव में रखा जाएगा तो इसका असर निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से मांगे सुझाव
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने ICAI के सदस्यों से राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने, टैक्स लीकेज रोकने और वित्तीय प्रबंधन में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सुझाव देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों के पास व्यवस्था में मौजूद खामियों को पहचानने और उन्हें दूर करने के लिए व्यावहारिक अनुभव होता है। सरकार ऐसे सुझावों को सुनने और उन पर काम करने के लिए तैयार है।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार नए विचारों और समाधान का स्वागत करती है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से आग्रह किया कि वे केवल आलोचना तक सीमित न रहें, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस सुझाव भी दें।
उनके अनुसार, यदि सरकार और वित्तीय विशेषज्ञ मिलकर काम करें तो राजस्व संग्रह को बेहतर बनाया जा सकता है, टैक्स चोरी और लीकेज को कम किया जा सकता है तथा सरकारी वित्तीय प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
राजस्व बढ़ाने की चुनौती
कर्नाटक सरकार के सामने राजस्व बढ़ाना और वित्तीय संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती है। राज्य में विकास योजनाओं और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे में टैक्स संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व के नुकसान को रोकना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
शिवकुमार ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से इसी दिशा में विशेषज्ञ सलाह देने को कहा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार वित्तीय प्रबंधन में सुधार के लिए पेशेवर विशेषज्ञों की राय को महत्व देना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने के लिए तैयार है। इसके लिए विशेषज्ञ समुदाय से खुलकर सुझाव देने की अपील की गई।
केंद्रीय एजेंसियों को लेकर राजनीतिक बहस
शिवकुमार के बयान से केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों द्वारा भी कई बार IT, ED और CBI की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार इन एजेंसियों के कामकाज को कानून के अनुसार बताती रही है।
ऐसे में शिवकुमार का यह आरोप कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी देश छोड़ रहे हैं, राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
सरकार और कारोबारियों के बीच भरोसे की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान शिवकुमार के बयान का मुख्य संदेश कारोबारियों और सरकार के बीच भरोसे को मजबूत करने पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक परेशानियों से बचाना जरूरी है, वहीं टैक्स चोरी और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से सरकार को व्यावहारिक सुझाव देने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन में सुधार के लिए बाहरी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण है। राजस्व बढ़ाने, लीकेज रोकने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नए विचारों को अपनाने की सरकार की तैयारी का उन्होंने भरोसा दिलाया।
अब शिवकुमार के 12 लाख व्यापारियों के देश छोड़ने वाले दावे पर आधिकारिक आंकड़े या स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कारोबारी सुगमता को लेकर उनके बयान से कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है।





