
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव कॉम्प्रिहेंसिव रिविज़न (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुनरीक्षण के दौरान 1,07,96,339 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसके बाद राज्य की मतदाता सूची में अब कुल 5,54,32,314 मतदाता दर्ज हैं।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया पूरी की गई। पुनरीक्षण के दौरान ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं, निर्धारित सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इन श्रेणियों में आने वाले नामों को सूची से हटाया गया है।
एक करोड़ से अधिक नाम हटाए गए
मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार के अनुसार SIR प्रक्रिया के दौरान कुल 1,07,96,339 नाम हटाए गए। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, 65,45,679 मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित पाए गए। वहीं 15,17,042 मतदाता सत्यापन के दौरान अनुपस्थित मिले। इसके अलावा 16,39,864 मृत मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
निर्वाचन विभाग की ओर से इन आंकड़ों को मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। इसका उद्देश्य सूची में मौजूद वास्तविक और पात्र मतदाताओं का सही विवरण बनाए रखना है।
अब भी 5.54 करोड़ से अधिक मतदाता
SIR प्रक्रिया के बाद कर्नाटक की मतदाता सूची में 5,54,32,314 मतदाता रह गए हैं। निर्वाचन विभाग ने कहा कि पुनरीक्षण के बाद तैयार सूची में पात्र मतदाताओं का विवरण शामिल किया गया है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान नामों और पते से संबंधित जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। इससे एक ही व्यक्ति के कई स्थानों पर दर्ज नाम, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम और मृत व्यक्तियों के नाम जैसी विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलती है।
नाम हटने के बाद भी जुड़वा सकते हैं नाम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे उसे दोबारा जुड़वा सकते हैं। इसके लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति फॉर्म-6 के माध्यम से मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इस प्रावधान से उन लोगों को राहत मिल सकती है, जिनका नाम पुनरीक्षण के दौरान सूची में नहीं रह गया है या जो नए स्थान पर स्थानांतरित हुए हैं।
निर्वाचन विभाग की ओर से मतदाताओं से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी जानकारी की जांच करें और किसी प्रकार की गलती होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार या नाम जोड़ने के लिए आवेदन करें।
मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटे
SIR के आंकड़ों में मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं की संख्या विशेष रूप से सामने आई है। 16.39 लाख से अधिक मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने से मतदाता सूची को अद्यतन करने में मदद मिलेगी।
इसी तरह 65.45 लाख से अधिक ऐसे मतदाता, जो स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं, उनके नाम हटाए गए हैं। यदि ऐसे नाम मतदाता सूची में बने रहते हैं तो चुनाव के समय मतदाता संख्या और वास्तविक मतदाताओं के आंकड़ों में अंतर की स्थिति पैदा हो सकती है।
अनुपस्थित मतदाताओं का भी सत्यापन
SIR के दौरान 15,17,042 मतदाता अनुपस्थित पाए गए। इन मतदाताओं की पहचान भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में की गई। मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए घर-घर सत्यापन और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी जुटाई गई।
अनुपस्थित पाए गए मतदाताओं के संबंध में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई। हालांकि, पात्र मतदाताओं के लिए नाम जुड़वाने की प्रक्रिया खुली रखी गई है।
मतदाता सूची को लेकर आगे भी प्रक्रिया जारी
निर्वाचन विभाग की ओर से मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, स्थान बदलने वाले मतदाताओं के विवरण में बदलाव करने और गलत या अपूर्ण जानकारी को सुधारने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।
फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने की सुविधा इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे नागरिक जो मतदाता बनने की पात्रता रखते हैं और सूची में उनका नाम नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
पारदर्शी मतदाता सूची पर जोर
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होती है। इसलिए निर्वाचन विभाग का जोर सूची में पात्र मतदाताओं के नाम बनाए रखने और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाने पर रहता है। कर्नाटक में SIR के दौरान सामने आए आंकड़े इसी व्यापक प्रक्रिया को दर्शाते हैं।
एक करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के बाद अब राज्य में 5.54 करोड़ से ज्यादा मतदाता सूची में हैं। निर्वाचन विभाग ने पात्र नागरिकों को फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जोड़ने का विकल्प दिया है।
अब SIR के बाद तैयार मतदाता सूची के आधार पर आगे की चुनावी प्रक्रिया संचालित होगी। साथ ही, नाम जोड़ने और विवरण में सुधार की प्रक्रिया भी जारी रहने की उम्मीद है। इससे उन मतदाताओं को अवसर मिलेगा, जो पात्र होने के बावजूद वर्तमान सूची में शामिल नहीं हैं।





