
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक सरकार को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने और धर्मस्थल में सौजन्या के 2012 के बलात्कार-हत्या मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया, यह देखते हुए कि जिस तरह से जांच की गई वह अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देती है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने निर्देश दिया कि नई जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए और पुलिस रिपोर्ट कानून के अनुसार संबंधित अदालत के समक्ष दाखिल की जानी चाहिए।
मामले की जांच स्थानीय पुलिस, कर्नाटक सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की थी। अभियोजन पक्ष के एकमात्र आरोपी संतोष राव को जून 2023 में सबूतों के अभाव में सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था।
“प्रतिवादी नंबर 1 - कर्नाटक राज्य एक विशेष जांच दल का गठन करेगा जिसमें कुशल जांचकर्ता शामिल होंगे, जो आधुनिक जांच तकनीक के उपयोग से अच्छी तरह परिचित होंगे, जिसका नेतृत्व राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे।
कोई भी अधिकारी जो बेलथांगडी पुलिस स्टेशन, सीआईडी या सीबीआई की जांच टीमों का हिस्सा नहीं था, जो पहले की जांच से जुड़ा था, विशेष जांच दल का हिस्सा नहीं होगा, ”पीठ ने कहा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि संतोष राव, जिन पर पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका है और उन्हें संबंधित एफआईआर में सत्र अदालत द्वारा बरी कर दिया गया है, आगे की जांच या अभियोजन के अधीन नहीं होंगे।
पीठ ने कहा, ''यहां कही गई किसी भी बात को किसी व्यक्ति की भूमिका पर, यहां तक कि प्रथम दृष्टया, कोई राय व्यक्त करने के रूप में नहीं माना जाएगा... विशेष जांच दल इस आदेश में गुण-दोष के आधार पर कही गई किसी भी बात से प्रभावित हुए बिना जांच करेगा।'' इसमें कहा गया है कि जिस तरह से जांच आगे बढ़ी और जिस तरह से विभिन्न जांच एजेंसियों ने जांच की और सबूत इकट्ठा किए और उनका मूल्यांकन किया, वह अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देता है।
"जिस व्यक्ति पर मुकदमा चलाया गया था, उसे अपराध करने में असमर्थ माना गया था। स्पष्ट रूप से जांच इस तरीके से की गई है जिससे पीड़ित के साथ अन्याय हुआ है। वास्तविक अपराधी द्वारा जांच में हेरफेर करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस तरह की ढीली और अनुचित जांच से उन जांच अधिकारियों को लाभ मिलता है जो अपना काम सही और लगन से करने में विफल रहे।"





