
बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में हुए चर्चित घोटाले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई। SIT की अगुवाई सीनियर IPS अधिकारी आलोक कुमार (DGP, जेल और सुधार सेवाएं) करेंगे और IPS अधिकारी दिव्या वी गोपीनाथ, अनूप ए शेट्टी, कुशल चौकसे और क्षमा मिश्रा इसके सदस्य होंगे।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जांच के मकसद से इस SIT को एक पुलिस स्टेशन घोषित करने का नोटिफिकेशन जारी करे। कोर्ट ने आदेश दिया कि कोई भी अधिकारी या अथॉरिटी SIT को सौंपी गई जांच में दखल न दे, उसे रोके नहीं या प्रभावित न करे। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने यह आदेश सुनाया। यह आदेश विधायक बसनागौड़ा आर पाटिल (यत्नाल) और 'ऑल कर्नाटक स्टेट स्टूडेंट्स एसोसिएशन' की याचिका पर सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था। याचिका में मांग की गई थी कि KPSC घोटाले की जांच CBI को सौंपी जाए।
कोर्ट ने कहा कि SIT वेटरनरी अधिकारियों की भर्ती के आरोपों की "नए सिरे से" (de novo) जांच करेगी (जिसकी जांच CID कर रही है)। साथ ही, वह सस्पेंड किए गए KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस साहूकार की बेटी की भर्ती में गड़बड़ी से जुड़े मामले (जिसकी जांच विधान सौधा पुलिस कर रही है) और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य मामलों की भी जांच करेगी।
जांच सिर्फ़ नामजद लोगों, लगाए गए आरोपों या पहले से तय दायरे तक ही सीमित नहीं रहेगी। कोर्ट ने कहा कि अगर जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों से किसी अन्य व्यक्ति, अपराध, लेन-देन या हरकत की संलिप्तता का पता चलता है, जिसका जांच से कोई संबंध हो, तो SIT कानून के मुताबिक सबूतों का पीछा करेगी, चाहे वे कहीं भी ले जाएं।
कोर्ट ने कहा कि यह बात सार्वजनिक है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी दो 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराध) के आधार पर ECIR दर्ज किया है और 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2022' के तहत अपराधों की जांच कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि SIT, ED को सहयोग भी देगी और उससे जानकारी भी लेगी।





