झारखंड

पलामू का युवक दुबई की जेल में, परिवार ने बिचौलिए पर फंसाने का आरोप लगाया

nidhi
28 Oct 2026 12:46 PM IST
पलामू का युवक दुबई की जेल में, परिवार ने बिचौलिए पर फंसाने का आरोप लगाया
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पलामू: बहन की शादी में शामिल होने के लिए घर लौटना चाह रहे पलामू के एक युवक के दुबई की जेल में बंद होने की जानकारी सामने आई है। युवक की पहचान हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के दादरा गांव निवासी शशि कुमार पासवान के रूप में बताई गई है। परिवार का आरोप है कि घर भेजने का भरोसा देने वाले एक बिचौलिए के संपर्क में आने के बाद वह परेशानी में पड़ गया। पिता ललन पासवान ने हुसैनाबाद थाना प्रभारी को आवेदन देकर बेटे की सहायता के लिए उच्च स्तर पर पहल करने की मांग की है।
स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, शशि वर्ष 2025 में एक कंपनी के अनुबंध पर दुबई गया था। छोटी बहन की शादी तय होने पर वह भारत लौटना चाहता था। पिता का आरोप है कि बिचौलिए ने घर भेजने के नाम पर उससे पैसे लिए। पत्नी सुमित्रा के मुताबिक, शशि ने जेल से फोन पर संपर्क कर खुद को टेलीग्राम से जुड़े एक संदिग्ध मामले में फंसाए जाने की बात कही। परिवार का कहना है कि वह करीब तीन महीने से जेल में है। गिरफ्तारी के कारण और मुकदमे की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
परिवार के आरोपों की पुष्टि जरूरी
इस मामले में अभी परिवार का पक्ष सामने आया है। संबंधित बिचौलिए, कंपनी और दुबई के अधिकारियों का बयान उपलब्ध नहीं है। युवक पर कौन-सा आरोप है, उसकी गिरफ्तारी कब हुई और मामला किस चरण में है, इन प्रश्नों के उत्तर आधिकारिक दस्तावेजों से ही मिल सकेंगे। टेलीग्राम से संबंधित होने का उल्लेख भर किसी विशेष अपराध की पुष्टि नहीं करता। इसलिए इसे साइबर अपराध, आर्थिक धोखाधड़ी या किसी अन्य निश्चित मामले से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।
पिता की अपील का मुख्य उद्देश्य बेटे की स्थिति का पता लगाना और उसे जरूरी सहायता दिलाना है। स्थानीय स्तर पर दिए आवेदन के साथ विदेश में दर्ज मामले की प्रमाणित जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण होगा। परिवार के पास उपलब्ध पासपोर्ट विवरण, नियोक्ता की जानकारी, गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज और संपर्क का रिकॉर्ड सहायता मांगने में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, आवेदन दिए जाने के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, इसका विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
भारतीय मिशन किस तरह मदद कर सकता है?
विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, किसी भारतीय नागरिक की विदेश में गिरफ्तारी या हिरासत की सूचना मिलने पर संबंधित भारतीय दूतावास अथवा वाणिज्य दूतावास स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करता है। इसका उद्देश्य नागरिक तक कांसुलर पहुंच प्राप्त करना, उसकी स्थिति जानना और कल्याण सुनिश्चित करना है। पात्र मामलों में शुरुआती कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जा सकता है। सहायता का स्वरूप संबंधित देश के कानून और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। mea.gov.in
मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय मिशन स्थानीय पुलिस और जेल अधिकारियों से संपर्क, कानूनी प्रक्रिया से संबंधित मार्गदर्शन तथा निष्पक्ष और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर सकते हैं। कुछ मामलों में जल्द सुनवाई के अनुरोध या परिवार की ओर से दी गई दया याचिका संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में भी सहायता की जाती है। रिहाई के बाद जरूरी यात्रा दस्तावेज और पात्र मामलों में स्वदेश वापसी से जुड़ा सहयोग भी उपलब्ध हो सकता है।
स्थानीय कानूनी प्रक्रिया का पालन होगा
विदेश मंत्रालय की कांसुलर सेवा मार्गदर्शिका स्पष्ट करती है कि भारतीय अधिकारी किसी दूसरे देश की न्यायिक प्रक्रिया में मनमाना हस्तक्षेप नहीं कर सकते। विदेश की जेल से रिहाई वहां की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही संभव होती है। दूतावास से संपर्क करने का अर्थ तत्काल रिहाई की गारंटी नहीं है। उसकी भूमिका नागरिक के कल्याण, संपर्क और नियमों के अनुसार उपलब्ध सहायता में सहयोग की होती है। इसलिए मामले की सही जानकारी और दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं।
मार्गदर्शिका के अनुसार, गिरफ्तार भारतीय नागरिक संबंधित भारतीय मिशन से कांसुलर संपर्क की मांग कर सकता है। मिशन नागरिक की सहमति के अधीन परिवार को जानकारी देने और स्थानीय कानूनों के अंतर्गत उचित व्यवहार के लिए प्रयास कर सकता है। प्रत्येक मामले में सहायता की संभावना अलग होती है। शशि के मामले में भारतीय मिशन से संपर्क हुआ है या नहीं और कोई सहायता शुरू हुई है अथवा नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में नहीं की गई है।
मदद पोर्टल पर दर्ज की जा सकती है शिकायत
विदेश में संकट में फंसे भारतीयों से संबंधित कांसुलर शिकायतों के लिए विदेश मंत्रालय का ‘मदद’ पोर्टल उपलब्ध है। मंत्रालय के अनुसार, इसके माध्यम से शिकायत दर्ज करने, संबंधित मिशन तक पहुंचाने और उसकी प्रगति देखने की व्यवस्था है। परिवार सहायता मांगते समय युवक की पहचान, उपलब्ध संपर्क और मामले का विवरण साझा कर सकता है। शिकायत की प्राप्ति संख्या संभालकर रखने से आगे की जानकारी और अनुवर्ती संपर्क व्यवस्थित रखने में सहायता मिलती है।
ऐसी स्थिति में परिवार के लिए केवल किसी निजी व्यक्ति के आश्वासन पर निर्भर रहने के बजाय आधिकारिक माध्यम से जानकारी लेना महत्वपूर्ण है। रिहाई कराने के नाम पर नई रकम देने से पहले संबंधित व्यक्ति की भूमिका और दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए। विदेश मंत्रालय भी विदेश की जेलों में बंद भारतीयों तथा उनके परिवारों को शोषण करने वाले एजेंटों से बचाने के प्रयासों का उल्लेख करता है।
फिलहाल शशि के परिवार की अपील पर आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। पिता बेटे के लिए सहायता और सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हैं। गिरफ्तारी का प्रमाणित विवरण, संबंधित मामले की स्थिति और भारतीय मिशन का पक्ष सामने आने पर स्पष्ट होगा कि उसके लिए किस तरह की सहायता संभव है। बिचौलिए द्वारा फंसाने का आरोप भी जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही पुष्ट हो सकेगा।
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