हरियाणा

बंद कुओं में उतरना पड़ सकता है भारी, जहरीली गैसों से बढ़ रहा जानलेवा खतरा

nidhi
20 July 2026 12:40 PM IST
बंद कुओं में उतरना पड़ सकता है भारी, जहरीली गैसों से बढ़ रहा जानलेवा खतरा
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जैविक कचरे से निकल रही जहरीली गैसें, बंद पड़े कुओं में बढ़ रहे जानलेवा हादसे

HARYANA: देश के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बंद पड़े या परित्यक्त कुएं अब 'गैस चैंबर' में बदलते जा रहे हैं। इन कुओं में वर्षों से फेंके जा रहे पत्ते, गोबर, मरे हुए जानवर, घरेलू जैविक कचरे और अन्य सड़ने वाले पदार्थों के कारण जहरीली गैसें बन रही हैं। यही गैसें अब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कुओं में बिना सुरक्षा के उतरना बेहद खतरनाक हो सकता है। कई मामलों में लोगों की मौत जहरीली गैसों के कारण हुई है, न कि पानी में डूबने से।
कैसे बन जाते हैं बंद कुएं 'गैस चैंबर'?
जब किसी बंद कुएं में लंबे समय तक जैविक कचरा जमा रहता है, तो ऑक्सीजन की कमी वाले वातावरण में उसका अपघटन (Decomposition) शुरू हो जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान कई जहरीली और दम घोंटने वाली गैसें बनती हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
हाइड्रोजन सल्फाइड (Hydrogen Sulfide - H₂S) – सड़े अंडे जैसी गंध वाली बेहद जहरीली गैस।
मीथेन (Methane - CH₄) – ज्वलनशील गैस, जो विस्फोट का खतरा भी बढ़ा सकती है।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) – अधिक मात्रा में होने पर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है।
अमोनिया (Ammonia) – आंखों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकती है।
इन गैसों के जमा होने से कुएं के भीतर ऑक्सीजन का स्तर तेजी से घट जाता है।
क्यों होती हैं मौतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कुएं में उतरने वाला व्यक्ति कई बार यह समझ ही नहीं पाता कि वहां ऑक्सीजन बेहद कम है या जहरीली गैस मौजूद है।
संभावित खतरे—
कुछ ही सेकंड में चक्कर आना।
सांस लेने में कठिनाई।
बेहोशी।
दम घुटना।
समय पर बाहर न निकाले जाने पर मृत्यु।
अक्सर किसी व्यक्ति को बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति भी बिना सुरक्षा के कुएं में उतर जाता है और वह भी गैस की चपेट में आ जाता है। इसी वजह से एक ही घटना में कई लोगों की जान चली जाती है।
बरसात में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
मानसून के दौरान कुओं में नमी और जैविक कचरे का सड़ना तेज हो जाता है। पानी का स्तर बदलने और हवा के कम प्रवाह के कारण गैसें अधिक मात्रा में जमा हो सकती हैं।
इसी कारण बारिश के मौसम में ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ जाता है।
किन जगहों पर सबसे ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न स्थानों पर विशेष सावधानी की जरूरत होती है—
वर्षों से बंद पड़े कुएं।
बिना उपयोग वाले बोरवेल।
पुराने सेप्टिक टैंक।
सीवर और ड्रेनेज चैंबर।
जैविक कचरा जमा होने वाले गहरे गड्ढे।
इन सभी स्थानों को Confined Space (सीमित बंद स्थान) माना जाता है, जहां प्रवेश के लिए विशेष सुरक्षा उपाय आवश्यक होते हैं।
कैसे करें बचाव?
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए—
बंद कुएं में कभी भी बिना जांच के न उतरें।
पहले गैस और ऑक्सीजन स्तर की जांच कराएं।
बचाव कार्य के दौरान प्रशिक्षित टीम की मदद लें।
सुरक्षा उपकरण और रस्सी का उपयोग करें।
अकेले बचाव का प्रयास न करें।
बंद पड़े कुओं में कचरा फेंकने से बचें।
ऐसे कुओं को सुरक्षित ढंग से ढककर रखें या प्रशासन की मदद से भरवाएं।
प्रशासन और ग्रामीणों की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय प्रशासन और पंचायतों को ऐसे परित्यक्त कुओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना चाहिए। वहीं ग्रामीणों को भी उनमें कचरा फेंकने से बचना चाहिए और किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना संबंधित विभाग को देनी चाहिए।
जनजागरूकता अभियान चलाकर भी ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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