झारखंड
डायन के शक में महिला की बेरहमी से हत्या, इलाके में सनसनी
Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 9:50 PM IST

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चक्रधरपुर। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से अंधविश्वास और बर्बरता की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिले के कराईकेला थाना क्षेत्र के कोलजोमरो गांव में एक 46 वर्षीय महिला की कथित तौर पर डायन होने का झूठा आरोप लगाकर लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। महिला की हत्या की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है। इस वारदात ने एक बार फिर समाज में गहरी जड़ें जमा चुके अंधविश्वास और उसके कारण महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतका की पहचान कोलजोमरो गांव की निवासी रेंदाई सुंबरुई (46), पति साधु चरण सुंबरुई के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की रात रेंदाई सुंबरुई अपने घर में सो रही थीं। इसी दौरान उनके साथ यह वारदात हुई। आरोप है कि महिला पर डायन होने का आरोप मढ़कर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना की भयावहता ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
घर में सो रही महिला को बनाया निशाना
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, रेंदाई सुंबरुई अपने परिवार के साथ कोलजोमरो गांव में रहती थीं। शुक्रवार की रात वह अपने घर में सो रही थीं। इसी दौरान कथित तौर पर अंधविश्वास के आधार पर उन्हें निशाना बनाया गया। महिला पर डायन होने का आरोप लगाकर लाठी-डंडों से हमला किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। वारदात को अंजाम देने वाले लोगों की पहचान, हमले के पीछे की वास्तविक वजह और घटना से पहले महिला के साथ किसी प्रकार का विवाद हुआ था या नहीं, इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
किसी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करना या उसकी जान ले लेना न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून और मानवाधिकारों के भी खिलाफ है। किसी बीमारी, पारिवारिक विवाद या व्यक्तिगत रंजिश को अंधविश्वास से जोड़कर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना गंभीर सामाजिक समस्या है।
घटना के बाद गांव में आक्रोश
महिला की हत्या की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। इस घटना से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त होने की जानकारी सामने आई है। एक महिला को अंधविश्वास के नाम पर इस तरह निशाना बनाए जाने से गांव में भय और चिंता का माहौल पैदा हो गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कुछ स्थानों पर अंधविश्वास के कारण लोगों को सामाजिक बहिष्कार, अपमान, मारपीट और अन्य प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से महिलाओं को डायन बताकर निशाना बनाए जाने की घटनाएं समाज के सामने बड़ी चुनौती हैं। कई बार व्यक्तिगत दुश्मनी, जमीन संबंधी विवाद, पारिवारिक तनाव या किसी बीमारी के लिए जिम्मेदार ठहराने जैसी वजहों से महिलाओं पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं।
हालांकि, रेंदाई सुंबरुई के मामले में हमले के पीछे की वजहों और आरोपियों की भूमिका को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इन तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता जरूरी
कोलजोमरो गांव की यह घटना समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर अंधविश्वास के नाम पर किसी इंसान की जान लेने जैसी घटनाओं पर रोक कैसे लगाई जाए। शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जागरूकता के अभाव में इस तरह की कुप्रथाओं को बढ़ावा मिल सकता है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान और पीड़ितों की समय पर मदद भी बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति पर डायन होने का आरोप लगाना अंधविश्वास पर आधारित है। ऐसी धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। बीमारी या किसी अप्रिय घटना के लिए किसी महिला को जिम्मेदार ठहराना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि हिंसा और अन्याय को बढ़ावा देना है।
ग्रामीण समुदायों, पंचायतों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में ही होना चाहिए और अफवाहों के आधार पर किसी व्यक्ति को प्रताड़ित करना गंभीर अपराध बन सकता है।
जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल इस घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं। महिला की हत्या में कौन-कौन लोग शामिल थे, वारदात को किस परिस्थिति में अंजाम दिया गया और कथित अंधविश्वास के पीछे क्या वजह थी, इन सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना के संबंध में पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले में दर्ज कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना बेहद महत्वपूर्ण है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोलजोमरो गांव में हुई इस कथित हत्या ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अंधविश्वास के नाम पर होने वाली हिंसा समाज के लिए गंभीर खतरा है। रेंदाई सुंबरुई की मौत से उनके परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंची है। अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई की जरूरत है, ताकि घटना की सच्चाई सामने आए और भविष्य में किसी अन्य महिला को इस तरह की बर्बरता का सामना न करना पड़े।
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