झारखंड

7 साल पुराने विवाद में विधवा जोबा पात्रो को मिला अपना हक और आत्मसम्मान

Saba Naaz
26 Jun 2026 2:41 PM IST
7 साल पुराने विवाद में विधवा जोबा पात्रो को मिला अपना हक और आत्मसम्मान
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घाटशिला (पूर्वी सिंहभूम): झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला व्यवहार न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसला सुनाते हुए सात वर्षों से लंबित भूमि एवं मकान विवाद का निपटारा कर दिया है. न्यायालय ने एक विधवा महिला को न्याय दिलाते हुए विवादित संपत्ति पर उनका वैधानिक कब्जा सुनिश्चित कराया. एसीजेएम-4 अशोक कुमार की अदालत के आदेश पर न्यायालय की सख्त निगरानी में विवादित जमीन का सीमांकन कराया गया और पीड़िता को उसके हिस्से की जमीन एवं मकान पर विधिवत कब्जा दिलाया गया. इस फैसले के बाद भावुक महिला ने न्यायपालिका के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया.

वर्ष 2017 में दायर हुआ था टाइटल सूट

विवाद की पृष्ठभूमि साल 2017 से जुड़ी है. घाटशिला के दाहीगोड़ा पानी टंकी के समीप स्थित कीमती भूमि और मकान को लेकर दाहीगोड़ा निवासी कुलीन पात्रो ने वर्ष 2017 में घाटशिला न्यायालय में एक टाइटल सूट (वाद संख्या 04/17) दायर किया था. उन्होंने इस मामले में कमल पात्रो, नंदन कानन पात्रो एवं किशोर पात्रो को प्रतिवादी बनाया था. पूरा विवाद पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे और स्वामित्व अधिकार से जुड़ा था. मामला कई वर्षों तक न्यायालय में विचाराधीन रहा और इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे, दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए.

पति की मृत्यु के बाद पत्नी ने जारी रखी कानूनी लड़ाई

इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान एक दुखद मोड़ तब आया जब मूल वादी कुलीन पात्रो का निधन हो गया. पति की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी जोबा पात्रो पूरी तरह अकेली पड़ गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने हक के लिए संघर्ष जारी रखा. दिसंबर 2024 में जोबा पात्रो ने न्यायालय में आवेदन देकर अपने दिवंगत पति के दावे को आगे बढ़ाने तथा अपने वैधानिक अधिकार की मांग की. न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आवेदन पर त्वरित सुनवाई की और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई.

अदालत की निगरानी में हुआ सीमांकन और बंटवारा

विवादित संपत्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और अंतिम समाधान के लिए अदालत ने जमीन के सीमांकन (मापी) का निर्णय लिया. एसीजेएम के आदेश पर बीते मंगलवार को भारी सुरक्षा और प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच दाहीगोड़ा स्थित विवादित भूमि एवं मकान का सीमांकन कराया गया. इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मौके पर न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त मनोज कुमार झा, न्यायालय के नाजिर प्रभात बांद्रा तथा वादी पक्ष के अधिवक्ता मिथिलेश कुमार मुख्य रूप से मौजूद रहे. अमीन द्वारा की गई सटीक मापी के बाद पूरी संपत्ति को पांच बराबर हिस्सों में विभाजित किया गया. इसमें से एक वैधानिक हिस्से पर जोबा पात्रो को विधिवत और कानूनी रूप से कब्जा दिला दिया गया. न्यायालय की सक्रियता के कारण यह पूरी प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और वर्षों पुराने विवाद का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो गया.

न्याय मिलने पर भावुक हुईं जोबा पात्रो, कहा- सुरक्षित रहा स्वाभिमान

अपने हिस्से की जमीन और मकान पर भौतिक कब्जा मिलने के बाद जोबा पात्रो की आंखें नम हो गईं. भावुक होते हुए उन्होंने कहा: "वर्षों तक न्याय के लिए भटकने और संघर्ष करने के बाद आखिरकार अदालत ने मुझे मेरा अधिकार दिला दिया. न्यायपालिका पर मेरा भरोसा हमेशा से था, और आज के इस फैसले ने उस विश्वास को और मजबूत कर दिया है. इस फैसले ने न केवल मुझे रहने के लिए छत और जमीन दी है, बल्कि समाज में मेरा खोया हुआ आत्मसम्मान और स्वाभिमान भी लौटाया है." उन्होंने त्वरित न्याय के लिए न्यायालय, संबंधित न्यायिक अधिकारियों और अपने अधिवक्ता मिथिलेश कुमार का सहृदय आभार व्यक्त किया. वहीं स्थानीय समाज और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी अदालत के इस कदम की सराहना की है. लोगों का कहना है कि इस निर्णय से आम जनता में यह सकारात्मक संदेश गया है कि भारतीय कानूनी प्रक्रिया में समय भले ही लग जाए, लेकिन अंततः जीत न्याय और सच्चाई की ही होती है.

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